ब्रेकिंग न्यूज़

अरवल में हम पार्टी का सदस्यता अभियान तेज, गरीब चौपाल यात्रा से जनता की समस्याओं को मिलेगा मंच: डॉ. संतोष सुमन रोहतास पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 7 कुख्यात अपराधियों को दबोचा, कई कांडों का किया खुलासा मुजफ्फरपुर कांग्रेस में ‘दो’ जिलाध्यक्ष? आलाकमान की सूची ने बढ़ाया कन्फ्यूजन, चर्चाओं का बाजार गर्म आरा-मोहनिया नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: ट्रक की टक्कर से 10 वर्षीय बच्ची की मौत, मामा घायल भारत-नेपाल सीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई, अवैध करेंसी के साथ 2 तस्करों को दबोचा पटना में नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 128 नशीले इंजेक्शन के साथ 2 गिरफ्तार मुजफ्फरपुर सब्जी मंडी में युवती की गोली मारकर हत्या, प्रेम-प्रसंग में मर्डर की आशंका BIHAR CRIME: अरवल में दिनदहाड़े फायरिंग, इलाके में मचा हड़कंप बरारी में राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता का भव्य स्वागत, विकास के मुद्दों पर हुई अहम चर्चा बिहार सरकार की सख्ती का असर: काम पर लौटे 30 परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारी, बाकी 31 के लिए डेडलाइन तय; क्या बोले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा?

Home / news / एक तरफ आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बात कर रही है सरकार, दूसरी...

एक तरफ आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बात कर रही है सरकार, दूसरी तरफ रद्द हो रही कॉलेज की मान्यता

25-Nov-2022 09:42 AM

PATNA : एक तरफ जहां आयुर्वेद को बढ़ावा देने कि बात कि जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ राज्य के सभी आयुर्वेद कालेज में पढ़ाई की मान्‍यता ही रद्द कर दी गई है।  इसके बाद यह चर्चा आम हो गई है कि बिहार सरकार का आयुर्वेद के प्रति बेरुखी के कारण आयुर्वेद कि पढ़ाई करने वालों को यह खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। गिनती के लिए बिहार में आयुर्वेद कॉलेज कि संख्या काफी अधिक है, लेकिन हकीकत में इनके क्या हालत क्या है इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं। इसी बीच अब तो इनमें पढ़ाई कि मान्यता भी रद्द कर दी गई है। 


दरअसल, बिहार में 2022-23 सत्र में आयुर्वेद की पढ़ाई की मान्यता रद हो गई है। आयुष मंत्रालय के नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ़  मेडिसिन (एनसीआइएसएम) ने न्यूनतम मानक पूरे नहीं होने के कारण पटना में स्थित देश के सबसे पुराने व प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक कालेज के साथ बेगूसराय के भी आयुर्वेदिक कालेज सशर्त मान्यता देने से इन्कार कर दिया है। जिसके बाद इस सत्र से दरभंगा आयुर्वेदिक कालेज में भी बीएएमएस की पढ़ाई शुरू करने की सोच पर भी रोक लग गया। इसको लेकर एनसीआइएसएम का पत्र आयुर्वेदिक कालेजों को मिल गया है।


मालूम हो कि, पिछले दिनों स्नातक व परास्नातक की सीटों की सशर्त मान्यता बरकरार रखने के लिए आवश्यक मानकों के आकलन को एनसीआइएसएम की टीम ने 4 व 5 अगस्त को कदमकुआं स्थित राजकीय आयुर्वेद कालेज का निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के दौरान ही शिक्षकों की कमी का मामला उठा था लेकिन पदाधिकारियों ने इसके निराकरण की कोई पहल नहीं की। जिसके बाद अब मान्यता रद्द कर दी गई है। 


इधर, बात करें मान्यता बचाने को लेकर तो अब स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के स्तर से अंडरटेकिंग देने पर ही मान्यता बच सकती है। गौरतलब हो कि, पटना के कदमकुआं स्थित आयुर्वेदिक कालेज में यूजी स्तर पर 84.78 प्रतिशत और स्नातकोत्तर 52.57 प्रतिशत शिक्षक उपलब्ध हैं। स्नातक पाठ्यक्रम में सिर्फ क्रिया शरीर व अगद तंत्र में शिक्षकों की कमी है। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के संबंधित पदाधिकारियों का कहना है कि,निरीक्षण के बाद कमियों की प्रतिपूर्ति के बारे में जो पत्र भेजा था, एनसीआइएसएम ने उसका संज्ञान नहीं लेते हुए यह कार्रवाई की है। शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। इस बाबत अपर मुख्य सचिव की अंडरटेकिंग के बाद दोनों कालेजों में पढ़ाई की मान्यता प्रदान कर दी जाएगी।