ब्रेकिंग न्यूज़

मुजफ्फरपुर: केंद्रीय कारागार के विचाराधीन बंदी की SKMCH में मौत, गंभीर बीमारी और ड्रग एडिक्शन से था ग्रसित मुजफ्फरपुर कोर्ट का बड़ा फैसला: अपहरण और बाल विवाह मामले में मुकेश सहनी को 3 साल की सजा Bihar News: हड़ताली अंचल अधिकारियों पर बड़ा प्रहार...एक साथ कई CO को किया गया सस्पेंड, डिप्टी CM विजय सिन्हा का चला हथौड़ा WhatsApp कॉलिंग में बड़ा बदलाव: अब मिलेगी पूरी तरह शोर-मुक्त बातचीत की सुविधा, जानिए कैसे? बिहटा के NSMCH में CME का आयोजन: "BIHAR में हीमोग्लोबिनोपैथी निदान को सुदृढ़ बनाना स्क्रीनिंग से मॉलिक्यूलर टेस्टिंग तक” सवारी बिठाने के लिए टोटो चालकों के बीच जमकर मारपीट, चाकू से किया हमला Bihar News: रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहा गंदा काम, पुलिस ने किया पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मस्जिद-कब्रिस्तान विवाद सुलझा, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का रास्ता हुआ साफ बिहार में तेज रफ्तार का कहर: हाईवा की टक्कर से बाइक सवार की मौके पर मौत, गुस्साए ग्रामीणों ने NH किया जाम इस बार बिहार दिवस पर क्या होगा खास? कौन-कौन से भव्य कार्यक्रमों की है तैयारी, जानें

Home / news / डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने किया डाॅ. ध्रुव कुमार की पुस्तक ‘पंडित दीनदयाल...

डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने किया डाॅ. ध्रुव कुमार की पुस्तक ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शिक्षा-दर्शन’ का लोकार्पण

25-Sep-2020 10:48 PM

By Ajay Deep Chouhan

PATNA :  बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षक डाॅ. ध्रुव कुमार की पुस्तक ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शिक्षा-दर्शन’ का लोकार्पण शुक्रवार को किया. इस विशेष अवसर पर डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानव दर्शन’ में जगत का कल्याण निहित है.


डॉ. ध्रुव कुमार के संपादन में 23 आलेखों से संग्रहित पुस्तक "पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शिक्षा-दर्शन" का विमोचन करते हुए बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आगे कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय आधुनिक भारत के उन विचारकों में एक हैं जिन्होंने अपनी मौलिक और सार्वभौमिक चिंतन से समाज, राष्ट्र और विश्व को एक नवीन और समरस मार्ग प्रशस्त किया और जगत कल्याण के लिए एक नई विचारधारा दी.


news image


पं. दीनदयाल उपाध्याय की 105वीं जयंती के अवसर पर डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि पंडित दीनदयाल की स्पष्ट मान्यता थी कि भारतीय संस्कृति एकात्म मानववादी है और इसके अनेक प्रत्यय हैं. धर्म, चिति और विराट आदि प्रत्ययों को सहज तरीके से विश्व के सामने प्रस्तुत करना उनकी क्रांतिकारी पहल थी. आजादी के आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने भी इन भारतीय प्रत्ययों का सफलतापूर्वक उपयोग किया था. वे एक लोक कल्याणकारी राष्ट्र के निर्माण के लिए राजनीतिक शुचिता को परम आवश्यक मानते थे.