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फांसी से बच जाएंगे निर्भया के गुनहगार? जज ने कहा- कानून जीने की इजाजत देता है तो फांसी देना पाप

08-Feb-2020 12:17 PM

DELHI: निर्भया के चारों गुनहगार कानूनी दांव-पेंच खेलकर अब तक अपनी फांसी टालने में कामयाब होते रहे हैं. घटना के 7 साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी दोषियों को अब तक सूली पर लटकाया नहीं जा सका है. गुनहगारों को फांसी देने की तारीख दो बार तय होने के बाद भी कानून पैंतरेबाजी खेलकर चारों दोनों बार बच गये. निर्भया के गुनहगारों को फांसी के तख्ते पर लटकता देखने को निर्भया के माता-पिता के साथ पूरा देश तरस रहा है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर कब इन दरिंदों को सूली पर लटकाया जाएगा?


कोर्ट ने डेथ वारंट जारी करने से किया इनकार

दिल्ली की केजरीवाल सरकार की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी दाखिल करके दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करने की मांग की गई थी ताकि निर्भया के गुनहगारों को जल्दी फांसी के फंदे पर लटकाया जा सके. लेकिन पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों के खिलाफ दोबारा डेथ वारंट जारी करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अगर कानून दोषियों को जीने की इजाजत देता है तो उन्हें फांसी पर चढ़ाना पाप होगा.


पवन ने अपने अधिकार का नहीं किया है इस्तेमाल

कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से वकील ने अपनी दलील में कहा कि अब किसी भी दोषी की कोई भी याचिका किसी भी कोर्ट में लंबित नहीं है, लिहाजा कोर्ट नया डेथ वारंट जारी करने के लिए स्वतंत्र है. सरकारी वकील की इस दलील पर कोर्ट ने पूछा कि क्या एक दोषी की दया याचिका और एक की क्यूरेटिव लगनी बाकी है? यह कैसे माना जाए कि दोषी नई याचिका नहीं लगाएंगे? इस पर सरकारी वकील ने कहा कि कोर्ट या तिहाड़ प्रशासन किसी भी दोषी को याचिका लगाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं. दरअसल निर्भया के चार दोषियों में से अक्षय, मुकेश और विनय अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर चुके हैं. जबकि चौथे दोषी पवन ने अभी तक क्यूरेटिव और दया याचिका के अधिकार का प्रयोग नहीं किया है. बावजूद इसके निर्भया के चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करने की मांग की गई.


'कानून दे रहा जीने की इजाजत, फांसी देना है पाप'

दिल्ली सरकार के वकील ने दलील देते हुए कोर्ट को कहा कि राष्ट्रपति पहले ही तीन दोषियों की दया याचिका खारिज कर चुके हैं और फिलहाल चारों में से किसी की कोई अपील किसी अदालत के सामने लंबित नहीं है. लेकिन कोर्ट इस याचिका से सहमत नहीं दिखा. पटियाला हाउस कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी करने की मांग खारिज कर दी. दिल्ली सरकार की याचिका खारिज करने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने कहा कि जब कानून दोषियों को जीने की इजाजत देता है तो उन्हें फांसी देना पाप है.