8 फरवरी से बिहार यात्रा पर निकलेंगे प्रशांत किशोर, हार के बाद जन सुराज को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी पूर्णिया में जमीन विवाद बनी बड़ी समस्या, शिवम मेडिकल कॉलेज निर्माण में अड़चन का आरोप नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद बड़ा फैसला: बिहार में गर्ल्स हॉस्टल-लॉज के लिए नियम सख्त, 24 घंटे महिला वार्डन अनिवार्य, जानिये पूरी गाईडलाइन झारखंड के गोड्डा हॉस्टल से फरार 4 नाबालिग बच्चे जमुई स्टेशन पर बरामद, GRP ने परिजनों से मिलाया PMCH और NMCH में फ्लाइंग स्क्वायड की रेड, पकड़ा गया दलाल सफाईकर्मी टर्मिनेट बिहार से लापता 3 नाबालिग बच्चियां दिल्ली से बरामद, पुलिस ने किया परिजनों के हवाले गुलज़ारबाग़ प्रिंटिंग प्रेस के दुर्लभ दस्तावेजों का डिजिटलीकरण, मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण बदहाली का आलम देखिये: दिन के उजाले में मरीज का मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ ईलाज कैमूर में जहरीला बीज खाने से 8 बच्चे बीमार, भभुआ सदर अस्पताल में भर्ती मधेपुरा में BPSC की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत, किराए के कमरे में मिली लाश, इलाके में सनसनी
12-Mar-2024 02:08 PM
By First Bihar
PATNA: केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से सोमवार को CAA को लेकर अधिसूचना जारी करने के बाद पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों को छोड़कर पूरे देश में यह कानून लागू हो गया हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले लिए गए सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठ रहे हैं। लालू-तेजस्वी की पार्टी आरजेडी ने केंद्र की बीजेपी सरकार से सवाल पूछे हैं।
आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सीसीए लागू करने के समय को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मणिपुर पिछले चार महीनों से जल रहा है लेकिन केंद्र सरकार ने मणिपुर की तरफ से आंखें मूंद लीं, क्योंकि यहां अल्पसंख्यकों की संख्या अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो विविधता में एकता को प्रदर्शित करता है और हमारे पास एक धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना है। लोकसभा चुनाव से पहले यह लोगों को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का भाजपा का स्पष्ट एजेंडा था।
बता दें कि देश में इस कानून के लागू होने के बाद अब दूसरे देश से भारत आए गैर-मुस्लिम शर्णार्थियों को केंद्र सरकार देश की नागरिकता दे सकेगी हालांकि, इसको लेकर पूरे देश में सियासत शुरू हो गई है और लोकसभा चुनाव से पहले देश में सीएए लागू करने को लेकर विपक्षी दल विरोध जताने लगे हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस कानून को लागू किया है। उधर, मुस्लिम संगठनों ने इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और इस कानून को असंवैधानिक करार देते हुए कोर्ट से इसपर रोक लगाने की मांग की है।