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03-Jul-2021 06:12 PM
PATNA : बिहार में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर बवाल मचा है. मंत्री से लेकर विधायक तक सब के सब नीतीश सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं. इसी ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सरकार का एक और बड़ा कारनामा सामने आया है. स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर से मरे हुए डॉक्टर का तबादला कर दिया है. हैरत की बात तो ये है कि सरकार ने मरे हुए चिकित्सक को प्रोमोशन भी दे दिया है.
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के गृह जिले सीवान में स्वास्थ्य विभाग का नया कारनामा सामने आया है, जिसमें एक मृत स्वास्थ्य अधिकारी का गोपालगंज में ट्रांसफर कर दिया गया है. दरअसल 30 जून को स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमाने पर डॉक्टरों का तबादला किया. तबादले की अधिसूचना 322 (3) में 35 डॉक्टरों का नाम है. इस सूची में 22वें नंबर पर डॉ राजेश्वर प्रसाद सिन्हा का नाम है. जिनका निधन हो गया है. कोरोना की वजह से दो महीना पहले ही इनकी मौत हो चुकी है. लेकिन सरकार ने राजेश्वर प्रसाद सिन्हा को पदोन्नति देते हुए गोपालगंज के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर तैनात किया है.

आपको बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में 19 अप्रैल को सीवान के महाराजगंज के तत्कालीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी राजेश्वर प्रसाद सिन्हा कोविड पॉजिटिव पाए गए थे, इलाज के दौरान 6 मई को इनकी मौत हो गई थी. लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने गोपालगंज जिले में इनका तबादला कर दिया है. आपको याद दिला दें कि ये कोई नया मामला नहीं है. कुछ ही दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की काफी फजीहत हुई थी. 8 मार्च को स्वास्थ्य विभाग ने 12 डॉक्टरों के ट्रांसफर का नोटिस जारी किया था. जिसमें डॉक्टर रामनारायण राम का भी नाम शामिल था. लेकिन इनकी भी मौत कोरोना की दूसरी लहर में 7 फ़रवरी को हो गई थी. इस मामले को लेकर काफी हंगामा भी हुआ था.

बीते गुरूवार को भी बिहार सरकार ने एक मृतक कृषि पदाधिकारी का भी तबादला किया. फर्स्ट बिहार ने इस खबर को सबसे पहले प्रकाशित किया. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक इस विभाग में 155 कृषि पदाधिकारी, सहायक अनुसंधान पदाधिकारी और इनके समकक्ष कर्मियों का तबादला किया गया. इस तबादले की लिस्ट में 15वें नंबर पर पटना जिले के नौबतपुर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी रहे अरुण कुमार शर्मा का भी नाम है, जिनका निधन हो चुका है. उनकी मौत हो जाने के बावजूद भी सरकार की ओर से उनका तबादला भोजपुर जिले के चौगाई में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के रूप में कर दिया गया. हालांकि सरकार ने अब अपनी भूल सुधार ली है. सरकार की ओर से अधिसूचना संख्या 2489 में गलती का सुधार करते हुए दिवंगत अधिकारी अरुण शर्मा के तबादले के निर्णय को हटाने का आदेश दिया गया है.

बिहार सरकार ने पटना जिले के नौबतपुर में पदस्थापित रहे दिवंगत कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार शर्मा का तबादला भोजपुर जिले के चौगाई में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के रूप में किया. आपको बता दें कि मूल रूप से नवादा के रहने वाले अरुण कुमार शर्मा का निधन दो महीना पहले हो चुका है. कोरोना की दूसरी लहर में 27 अप्रैल को इनकी मौत हुई थी. नौबतपुर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार शर्मा का इलाज राजधानी पटना स्थित जक्कनपुर के श्री राज ट्रस्ट हॉस्पिटल में चल रहा था.
56 साल के अरुण कुमार शर्मा की मूल रुप से नवादा के मूल निवासी थे. नवादा जिले के लाल बीघा निवासी में अरुण कुमार शर्मा का घर है लेकिन वे नवादा के नवीन नगर मोहल्ला स्थित अपने आवास में रह रहे थे. पिछले 3 सालों से अरुण कुमार शर्मा नौबतपुर में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित थे. निधन से दो दिन पहले अरुण शर्मा की तबीयत खराब हुई थी और उन्हें इलाज के लिए पटना ले जाया गया था. पटना में इलाज के दौरान ही उनकी जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी और उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था. इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और कोरोना महामारी से संक्रमित होने के कारण 27 अप्रैल को दोपहर में करीब 2 बजे उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.
अरुण सिंह के निधन के बाद नौबतपुर प्रखंड के विकास पदाधिकारी नीरज आनंद ने जानकारी दी थी कि कोरोना की दूसरी लहर में जब तेजी से संक्रमण फ़ैल रहा था. तब बढ़ते संक्रमण की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से उन्हें पटना के सब्जी बाग इलाके में नोडल पदाधिकारी के रूप में तैनात किया गया था. बीडीओ नीरज आनंद के मुताबिक उनकी तभीयात अरुण शर्मा की तबीयत अचानक खराब हो गई थी और सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो हो रही थी. उनका ऑक्सीजन लेवल घट कर 70 पर आ गया था. जिसके बाद परिजनों ने जक्कनपुर के श्री राज ट्रस्ट हॉस्पिटल अस्पताल में भर्ती कराया था.