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01-Jul-2021 05:08 PM
PATNA : बिहार के सियासी गलियारे से बड़ी खबर सामने आ रही है. नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है. मदन सहनी ने कहा है कि उनके विभाग में अधिकारियों का राज चल रहा है औऱ अब उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा. मदन सहनी ने अपने विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद पर गंभीर आऱोप लगाये हैं.
ट्रांसफर-पोस्टिंग में विवाद के बाद घमासान
दरअसल समाज कल्याण विभाग में ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर मंत्री औऱ प्रधान सचिव के बीच विवाद हुआ था. इसके कारण सीडीपीओ समेत विभाग के कई दूसरे अधिकारियों का ट्रांसफर जून महीने में नहीं हो पाया था. मंत्री औऱ प्रधान सचिव में घमासान लगातार बढ़ता जा रहा था. जून में ट्रांसफर कर पाने में सफल नहीं हो पाये मंत्री ने आज इस्तीफे की पेशकश कर दी.
प्रधान सचिव पर तीखा हमला
मंत्री मदन सहनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद ने पूरे विभाग को चौपट कर दिया है. विभाग में कोई काम नहीं हो रहा है. ट्रांसफर पोस्टिंग में मंत्री की नहीं सुनी जा रही है. प्रधान सचिव चार सालों से विभाग में जमे हैं. प्रधान सचिव बतायें कि उन्होंने क्या किया. विभाग के कई अहम पदों पर सालों से एक ही अधिकारी जमे हुए हैं. उनके कारण सही तरीके से काम नहीं हो पा रहा है.
मदन सहनी ने कहा कि प्रधान सचिव मंत्री की बात ही नहीं सुनते. प्रधान सचिव के रवैये को लेकर उन्होंने उपर भी शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गयी. पूरा समाज कल्याण विभाग चौपट हो गया है. इसलिए उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.
ट्रांसफर में मंत्री की नहीं चली
जानकारों की मानें तो सारा मामला ट्रांसफर पोस्टिंग से जुड़ा है. जून के महीने में विभागों को अपने स्तर पर ट्रांसफर करने की छूट होती है. समाज कल्याण विभाग के सूत्रों के मुताबिक मंत्री मदन सहनी ने नियमों को ताक पर रख कर ट्रांसफर करने की कवायद शुरू की थी. लेकिन प्रधान सचिव ने नियम विरूद्ध ट्रांसफर करने से इंकार कर दिया था. मंत्री औऱ सचिव की लड़ाई में विभाग में ट्रांसफर ही नहीं हो पाया.
सीडीपीओ के ट्रांसफर पर हुआ विवाद
समाज कल्याण विभाग के सूत्रों के मुताबिक मंत्री बड़े पैमाने पर सीडीपीओ का ट्रांसफर करना चाहते थे. सरकार ने नियम बना रखा है कि तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही अधिकारियों का तबादला किया जाये. लेकिन मंत्री कई ऐसे अधिकारियों का ट्रांसफर करना चाहते थे जिनका तीन साल का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था. वे खराब परफार्मेंस वाले सीडीपीओ को भी अहम जगह देने की कवायद में लगे थे. प्रधान सचिव ने मंत्री की सिफारिशों को मानने से इंकार कर दिया था. इसके बाद मंत्री ने इस्तीफे की पेशकश की है.