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24-Aug-2022 07:56 PM
By RITESH HUNNY
SAHARSA: 11 साल से भाई की जगह बिहार गृह रक्षा वाहिनी में नौकरी करने का मामला सामने आया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि सड़क हादसे में जवान की मौत के बाद उसका भाई 11 साल से नौकरी कर रहा था और सेलरी उठाता आ रहा था लेकिन इस बात की भनक पुलिस के अधिकारियों को भी नहीं हुई।
जब बाद लोगों ने इस फर्जी जवान महेंद्र पासवान उर्फ खलीफा पासवान के खिलाफ परिवाद पत्र दायर किया तो विभाग की नींद खुल गयी। होमगार्ड कमांडेंट अखिलेश ठाकुर ने मामले की जांच की तो पाया कि सदर थाना क्षेत्र के अगवानपुर के रहने वाले और गृह रक्षा वाहिनी सहरसा में कार्यरत मनी पासवान की मौत 2011 में एक सड़क हादसे में हो गयी थी। ट्रैक्टर की चपेट में आने से हुई मौत के बाद सगे भाई महेंद्र पासवान उर्फ खलीफा ने 2011 में ही फर्जी तरीकें से मृत जवान मनी पासवान की जगह ड्यूटी पर लग गये। खलीफा ने 11 साल तक पुलिस की नौकरी की।
परिवाद पत्र के सूचक भीम कुमार भारती ने बताया कि 12 जनवरी 2011 को होमगार्ड जवान मणी कुमार पासवान की मौत बरियाही के पास ट्रैक्टर दुर्घटना में हो गई थी। आरोपी महेंद्र उर्फ खलीफा पासवान ने ही आवेदन देकर बनगांव थाने में अपने भाई होमगार्ड जवान की मौत के मामले में कांड संख्या 04/2011 दर्ज कराया। महेंद्र पासवान ने विभाग के साथ छल एवं फर्जीवाड़े कर नौकरी हासिल कर ली।
शिकायतकर्ता भीम कुमार भारती ने बताया कि इसकी शिकायत उन्होंने दर्जनों ग्रामीणों के साथ मिलकर विभाग से किया था लेकिन महेंद्र पासवान पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। लेकिन जब लोक निवारण पदाधिकारी के पास परिवाद पत्र दायर किया गया तो विभाग ने जांच शुरू की। जांच के दौरान फर्जीवाड़े की मामला संज्ञान में आते ही होमगार्ड कमांडेंट अखिलेश ठाकुर ने बनगांव थाने में मामला दर्ज कराया।
इस बाबत बनगांव थानाध्यक्ष बिनोद कुमार सिंह ने बताया कि त्वरित कार्यवाई करते हुए फर्जी जवान महेंद्र पासवान को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी को अब जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।
सिस्टम से बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मनी पासवान की मौत सड़क हादसे में 11 साल पहले हुई थी तब सड़क दुर्घटना से मौत का मामला बनगाँव थाने में दर्ज की गई थी। जिसका सूचक खुद मृतक का भाई महेंद्र पासवान उर्फ खलीफा है। जो अपने मृतक भाई मनी पासवान के नाम पर 11 वर्षों से गृह रक्षा वाहिनी में नौकरी कर रहा था लेकिन संबंधित विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। इस मामले पर होमगार्ड कमांडेंट अखिलेश ठाकुर से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।