1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 21, 2026, 11:59:53 AM
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Income Tax Rules 2026 : सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने इनकम टैक्स नियम, 2026 को नोटिफाई कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। इन नए नियमों के तहत सैलरीड कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों (Allowances), सुविधाओं (Perquisites) और उनके टैक्सेशन के तरीके में बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। आइए जानते हैं इन बदलावों का कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।
HRA में बड़ा बदलाव
मकान किराया भत्ता (HRA) को लेकर नियमों में स्पष्टता लाई गई है। पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों को उच्च श्रेणी में रखा गया है। इन शहरों में रहने वाले कर्मचारी अपने बेसिक सैलरी का 50% तक HRA छूट के रूप में क्लेम कर सकते हैं। वहीं अन्य शहरों में रहने वालों के लिए यह सीमा 40% तय की गई है। हालांकि, नई टैक्स व्यवस्था अपनाने वालों को HRA छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
बच्चों के भत्तों में भारी बढ़ोतरी
नए नियमों के तहत बच्चों से जुड़े भत्तों में बड़ा इजाफा किया गया है। एजुकेशन अलाउंस को 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा कर दिया गया है, जो अधिकतम दो बच्चों तक लागू होगा। इसके अलावा हॉस्टल अलाउंस को भी 300 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह बदलाव मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
कार सुविधा पर नए टैक्स नियम
कंपनी द्वारा दी जाने वाली कार सुविधा के टैक्सेशन नियम भी अपडेट किए गए हैं। इंजन क्षमता के आधार पर अलग-अलग वैल्यू तय की गई है। 1.6 लीटर तक की कार पर 5000 रुपये प्रति माह और ड्राइवर के लिए 3000 रुपये जोड़े जाएंगे। वहीं 1.6 लीटर से अधिक इंजन क्षमता वाली कार पर 7000 रुपये प्रति माह और ड्राइवर के लिए 3000 रुपये जोड़े जाएंगे। अगर कर्मचारी खुद खर्च उठाता है, तो कम वैल्यू लागू होगी। इससे टैक्स कैलकुलेशन अधिक स्पष्ट होगा।
घरेलू सेवाओं और यूटिलिटी पर टैक्स
नए नियमों के अनुसार, यदि नियोक्ता कर्मचारी को घरेलू सेवाएं जैसे माली, सफाईकर्मी या चौकीदार उपलब्ध कराता है, तो उस पर टैक्स लगेगा। इसी तरह गैस, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी टैक्सेबल मानी जाएंगी। अगर ये सेवाएं कंपनी के संसाधनों से मिलती हैं, तो टैक्स उत्पादन लागत के आधार पर तय होगा।
गिफ्ट और वाउचर पर लिमिट तय
अगर किसी वित्तीय वर्ष में गिफ्ट और वाउचर की कुल वैल्यू 15,000 रुपये से ज्यादा होती है, तो यह टैक्सेबल इनकम में शामिल की जाएगी। इससे पहले इस पर स्पष्टता नहीं थी।
फूड और कूपन पर राहत
कार्य के दौरान मिलने वाला भोजन और पेय पदार्थ टैक्स फ्री रहेगा, लेकिन इसकी सीमा 200 रुपये प्रति आइटम तय की गई है। इसके अलावा फूड कूपन भी नई टैक्स व्यवस्था में जारी रहेंगे।
डॉक्यूमेंट्स देना होगा जरूरी
पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले कर्मचारियों को अब सभी कटौतियों के लिए प्रमाण देना अनिवार्य होगा। HRA के लिए मकान मालिक का नाम, पता और पैन देना होगा, खासकर जब सालाना किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा हो। वहीं LTA के लिए यात्रा खर्च के दस्तावेज और होम लोन ब्याज पर कटौती के लिए लोन देने वाली संस्था की जानकारी देना जरूरी होगा।
क्या होगा असर?
इन नए नियमों से जहां टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी होगा, वहीं कर्मचारियों को अपने खर्च और भत्तों का पूरा हिसाब रखना होगा। कुल मिलाकर, यह बदलाव टैक्सपेयर और सरकार दोनों के लिए संतुलित व्यवस्था बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।