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14-Apr-2025 02:37 PM
By First Bihar
Life Style: अगर आप भी लाल दन्त से लेकर गुल मंजन करने के आदि है, तो हो जाए सावधान, क्योंकि अब यह आदत आपको कैंसर व दिल का मर्ज देने लगा है। इस बात की जानकारी बिहार के भागलपुर जिले के कैंसर स्क्रीनिंग से लेकर कार्डियोलॉजी ओपीडी के आंकड़े गवाही दे रहे हैं। वहीं, लंबे समय तक लाल दंत मंजन करने की आदत जहां युवाओं को कैंसर का मरीज बना रहा है तो वहीं गुल मंजन के अत्यधिक इस्तेमाल से लोगों के दिल कमजोर हो रहे हैं।
वैसे तो भागलपुर जिले में कैंसर के बीमारों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन इसके बीमारों की बढ़ रही प्रतिशत चिंतनीय है। वहीं, बीते साल जिले के विभिन्न केंद्रों पर गैर संचारी रोगों के तहत बीपी-शुगर के साथ-साथ कैंसर स्क्रीनिंग की गई। भागलपुर स्थित कैंसर स्क्रीनिंग को होमी भाभा कैंसर अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर टीम के द्वारा जांच किया गया। जिला के गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार मनस्वी ने बताया कि मार्च 2024 से जनवरी 2025 के बीच जिले में कैंसर स्क्रीनिंग व बाद में हुई जांच के बाद कुल 29 माउथ कैंसर के मरीज पाए गए।
वहीं, जांच के दौरान इनमें से 28 पुरुष तो एक महिला में माउथ कैंसर पाया गया। इसमें माउथ कैंसर के सात मरीज ऐसे मिले जिन्हें तंबाकू, पान मसाला, पान से लेकर किसी भी प्रकार के तंबाकू के सेवन की लत नहीं थी। पूछताछ के दौरान पता चला कि इन लोगों ने कई सालों से लाल दंत मंजन आधा घंटा से लेकर एक-एक घंटे तक नियमित रूप से करने की आदत थी। लाल दंत मंजन करने की आदत कई महिलाओं में मिली, लेकिन उनमें माउथ कैंसर कन्फर्म नहीं हुआ।
जानकारी के अनुसार, जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में तीन सितंबर 2024 से कार्डियोलॉजी ओपीडी का संचालन हो रहा है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुमित शंकर जानकारी दी है कि यहां के ओपीडी में औसतन 12 से 15 हृदय के रोगी इलाज के लिए आते हैं। इनमें से करीब 30 प्रतिशत दिल के मरीजों में गुल मंजन या फिर तंबाकू के सेवन की आदत मिलती है। ऐसे मरीजों के हृदय की नसें सामाऩ्य हृदय रोग के मरीजों की तुलना में 50 प्रतिशत तक कमजोर मिल रही हैं।
डॉ. सुमित ने कहा कि गुल को लोग मंजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जो पिसा हुआ एक खतरनाक तंबाकू है। इसके सेवन से हृदय की कोरोनरी सेल पर नेगेटिव प्रभाव पड़ रहा है। कोशिकाओं में खून की आपूर्ति कम हो रही है, जो कि कोशिकाओं को डायलेटेड (दिल फैलना व सिकुड़ना) कर रही है। वहीं, जांच में पता चल रहा है कि गुल मंजन के इस्तेमाल से लोगों के हृदय के आकार में असामान्य वृद्धि, हृदय के मांसपेशियों की दीवारों की मोटाई और हृदय की मांसपेशियों का बढ़ना व सिकुड़ना मिला।
इसके कारण हृदय के पंप करने की क्षमता कम होती जा रही है। इसे डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी कहते हैं। इस कारण बीमारियां बढ़ती जा रही है और सात से आठ प्रतिशत मरीजों को एंजियोप्लास्टी तक करानी पड़ रही है। डॉक्टर का सलाह ये भी है, अगर आप गुल या लाल दन्त से दांत को रगड़ते है तो जल्द से जल्द अपनी आदत को बदल दें।
Life Style: अगर आप भी लाल दन्त से लेकर गुल मंजन करने के आदि है, तो हो जाए सावधान, क्योंकि अब यह आदत आपको कैंसर व दिल का मर्ज देने लगा है। इस बात की जानकारी बिहार के भागलपुर जिले के कैंसर स्क्रीनिंग से लेकर कार्डियोलॉजी ओपीडी के आंकड़े गवाही दे रहे हैं। वहीं, लंबे समय तक लाल दंत मंजन करने की आदत जहां युवाओं को कैंसर का मरीज बना रहा है तो वहीं गुल मंजन के अत्यधिक इस्तेमाल से लोगों के दिल कमजोर हो रहे हैं।
वैसे तो भागलपुर जिले में कैंसर के बीमारों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन इसके बीमारों की बढ़ रही प्रतिशत चिंतनीय है। वहीं, बीते साल जिले के विभिन्न केंद्रों पर गैर संचारी रोगों के तहत बीपी-शुगर के साथ-साथ कैंसर स्क्रीनिंग की गई। भागलपुर स्थित कैंसर स्क्रीनिंग को होमी भाभा कैंसर अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर टीम के द्वारा जांच किया गया। जिला के गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार मनस्वी ने बताया कि मार्च 2024 से जनवरी 2025 के बीच जिले में कैंसर स्क्रीनिंग व बाद में हुई जांच के बाद कुल 29 माउथ कैंसर के मरीज पाए गए।
वहीं, जांच के दौरान इनमें से 28 पुरुष तो एक महिला में माउथ कैंसर पाया गया। इसमें माउथ कैंसर के सात मरीज ऐसे मिले जिन्हें तंबाकू, पान मसाला, पान से लेकर किसी भी प्रकार के तंबाकू के सेवन की लत नहीं थी। पूछताछ के दौरान पता चला कि इन लोगों ने कई सालों से लाल दंत मंजन आधा घंटा से लेकर एक-एक घंटे तक नियमित रूप से करने की आदत थी। लाल दंत मंजन करने की आदत कई महिलाओं में मिली, लेकिन उनमें माउथ कैंसर कन्फर्म नहीं हुआ।
जानकारी के अनुसार, जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में तीन सितंबर 2024 से कार्डियोलॉजी ओपीडी का संचालन हो रहा है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुमित शंकर जानकारी दी है कि यहां के ओपीडी में औसतन 12 से 15 हृदय के रोगी इलाज के लिए आते हैं। इनमें से करीब 30 प्रतिशत दिल के मरीजों में गुल मंजन या फिर तंबाकू के सेवन की आदत मिलती है। ऐसे मरीजों के हृदय की नसें सामाऩ्य हृदय रोग के मरीजों की तुलना में 50 प्रतिशत तक कमजोर मिल रही हैं।
डॉ. सुमित ने कहा कि गुल को लोग मंजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जो पिसा हुआ एक खतरनाक तंबाकू है। इसके सेवन से हृदय की कोरोनरी सेल पर नेगेटिव प्रभाव पड़ रहा है। कोशिकाओं में खून की आपूर्ति कम हो रही है, जो कि कोशिकाओं को डायलेटेड (दिल फैलना व सिकुड़ना) कर रही है। वहीं, जांच में पता चल रहा है कि गुल मंजन के इस्तेमाल से लोगों के हृदय के आकार में असामान्य वृद्धि, हृदय के मांसपेशियों की दीवारों की मोटाई और हृदय की मांसपेशियों का बढ़ना व सिकुड़ना मिला।
इसके कारण हृदय के पंप करने की क्षमता कम होती जा रही है। इसे डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी कहते हैं। इस कारण बीमारियां बढ़ती जा रही है और सात से आठ प्रतिशत मरीजों को एंजियोप्लास्टी तक करानी पड़ रही है। डॉक्टर का सलाह ये भी है, अगर आप गुल या लाल दन्त से दांत को रगड़ते है तो जल्द से जल्द अपनी आदत को बदल दें।