ब्रेकिंग न्यूज़

बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती: 52 हजार ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन/रद्द करने का निर्देश Bihar Budget 2026-27: दिल्ली मुंबई के बाद अब देश के इस राज्यों में बनेगा बिहार भवन, बजट भाषण में सरकार का एलान; जानिए ख़ास बातें Bihar Budget 2026-27 : जानिए बिहार बजट में किस विभाग को मिला कितना पैसा, कौन रहा सबसे आगे तो कौन पीछे Bihar Budget 2026-27 : बिहार के विकास और सामाजिक कल्याण के लिए 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश; रोजगार -नौकरी समेत इन चीजों पर होगा अधिक फोकस Bihar Budget 2026 : ज्ञान- ईमान- विज्ञान-अरमान-सम्मान, पांच संकल्पों पर चल रही सरकार, 3 लाख 47 हजार करोड़ का बजट Bihar Budget Session : वित्त मंत्री विजेंद्र यादव थोड़ी देर में पेश करेंगे आम बजट, लाल सूटकेस लेकर पहुंचे सदन Patna News: पटना में स्नातक पैरामेडिकल छात्रों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड व कैडर गठन की उठी मांग Patna News: पटना में स्नातक पैरामेडिकल छात्रों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड व कैडर गठन की उठी मांग Patna bullet train : वाराणसी से पटना का सफर सिर्फ 1 घंटे में! बिहार को पहली बुलेट ट्रेन की सौगात, सिलीगुड़ी तक चलेगी Bihar News: बिहार पुलिस ने पेश की मानवता की मिसाल, नदी में छलांग लगाने जा रही महिला और उसके बच्चे की बचाई जान

Supreme Court: NEET में फेल, फिर भी एडमिशन! सुप्रीम कोर्ट ने 10 डेंटल कॉलेजों पर लगाया करोड़ों का जुर्माना; जानिए क्या है पूरा मामला

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल और डेंटल शिक्षा में नियमों की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाते हुए राजस्थान के 10 प्राइवेट डेंटल कॉलेजों पर 10-10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

Supreme Court:  NEET में फेल, फिर भी एडमिशन! सुप्रीम कोर्ट ने 10 डेंटल कॉलेजों पर लगाया करोड़ों का जुर्माना; जानिए क्या है पूरा मामला

20-Dec-2025 09:19 AM

By First Bihar

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल और डेंटल शिक्षा में नियमों की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाते हुए राजस्थान के 10 प्राइवेट डेंटल कॉलेजों पर 10-10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इन कॉलेजों ने NEET 2016-17 में तय न्यूनतम अंक प्राप्त न करने वाले छात्रों को एडमिशन दिया, जिसे अदालत ने शिक्षा के स्तर से सीधा खिलवाड़ बताया। कोर्ट ने इसे नियमों का जानबूझकर उल्लंघन करार देते हुए शिक्षा के मानक को बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी ठहराई।


NEET के नियमों का उल्लंघन और कोर्ट की कार्रवाई

NEET परीक्षा पूरे देश में मेडिकल और डेंटल कोर्स में प्रवेश का एकमात्र आधार है। बावजूद इसके, राजस्थान के कुछ प्राइवेट डेंटल कॉलेजों ने 2016-17 में 2007 के नियमों को नजरअंदाज करते हुए ऐसे छात्रों को BDS कोर्स में प्रवेश दिया जो न्यूनतम योग्यता पूरी नहीं करते थे। यह मामला लंबे समय तक अदालत में चला, जिसमें छात्रों और कॉलेजों दोनों की भूमिका पर सवाल उठे। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जस्टिस जे. के. महेश्वरी और विजय बिश्नोई ने स्पष्ट किया कि संबंधित कॉलेजों ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया, इसलिए उन पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है।


राज्य सरकार और जुर्माने की राशि

कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी 10 कॉलेज राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पास 10-10 करोड़ रुपये जमा करें। साथ ही राजस्थान सरकार को भी 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिना अधिकार के दी गई छूट इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है।


जुर्माने का समाज हित में उपयोग

सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि कुल 100 करोड़ रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाएगी। इससे मिलने वाला ब्याज राजस्थान के वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, वृद्धाश्रम और बाल देखभाल संस्थानों के रखरखाव, उन्नयन और सुधार में इस्तेमाल होगा। अदालत ने इसे समाज के कमजोर वर्गों के लिए लाभकारी कदम बताया।


शर्तों के साथ छात्रों को राहत

अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए उन छात्रों की डिग्री को रेगुलर कर दिया जिन्होंने गलत तरीके से एडमिशन मिलने के बावजूद पढ़ाई पूरी कर ली थी। हालांकि, यह राहत शर्तों के साथ दी गई है। इन छात्रों को राजस्थान हाईकोर्ट में हलफनामा देना होगा कि आपदा, महामारी या अन्य आपात स्थितियों में वे राज्य सरकार को निःशुल्क सेवाएं देंगे।


निगरानी के लिए समिति

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे पांच जजों की एक समिति गठित करें, जिसमें कम से कम एक महिला जज शामिल हो। यह समिति फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाले ब्याज की राशि के सही और प्रभावी उपयोग की निगरानी करेगी, ताकि यह राशि सही उद्देश्य पर खर्च हो।


शिक्षा की गुणवत्ता पर कोर्ट की चिंता

कोर्ट ने मेडिकल और डेंटल शिक्षा के गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताई। बेंच ने कहा कि अवैध एडमिशन न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि भविष्य के डॉक्टरों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी संस्थान को नियम तोड़ने की हिम्मत न हो, इसके लिए सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।


तय समय में डिग्री पूरी न करने वालों पर कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन छात्रों ने 9 साल बीत जाने के बावजूद BDS कोर्स पूरा नहीं किया है, उन्हें अब कोर्स से बाहर कर दिया जाएगा। 2007 के नियमों के अनुसार पांच साल का डिग्री प्रोग्राम अधिकतम नौ साल में पूरा करना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि इस नियम में कोई ढील नहीं दी जा सकती।