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12-Oct-2025 02:51 PM
By First Bihar
Digital Transparency : केंद्र सरकार ने स्कूलों में डिजिटल ट्रांसपेरेंसी (Digital Transparency) को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूलों को पत्र जारी कर फीस भुगतान के लिए डिजिटल पेमेंट मोड खासतौर पर यूपीआई (UPI) को अपनाने का आग्रह किया है। यह आदेश NCERT, CBSE, KVS और NVS जैसे राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों पर भी लागू होगा। मंत्रालय का कहना है कि इस पहल से न केवल फीस भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी, बल्कि स्कूल प्रशासन को भी टेक्नोलॉजी के साथ कदम से कदम मिलाने में मदद मिलेगी।
अब तक ज्यादातर स्कूलों में फीस कैश में जमा करनी पड़ती थी। ऐसे में अभिभावकों को स्कूल जाकर लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ता था। खासकर नए एडमिशन या परीक्षा के समय फीस काउंटरों पर भारी भीड़ देखी जाती थी, जिससे समय की बर्बादी होती थी। कई बार कैश न होने या रिसीट में गलती होने पर और भी दिक्कतें सामने आती थीं। लेकिन अब डिजिटल पेमेंट सिस्टम के जरिए ये समस्या खत्म हो जाएगी। अभिभावक घर बैठे ही एक क्लिक में फीस जमा कर सकेंगे और ट्रांजेक्शन का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा।
डिजिटल पेमेंट से स्कूलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी। कैश हैंडलिंग की जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे गड़बड़ियों की संभावना भी घटेगी। फीस से जुड़ी हर डिटेल ऑनलाइन रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेगी। वहीं अभिभावक बिना किसी झंझट के कभी भी, कहीं से भी पेमेंट कर सकेंगे। इसके अलावा, इससे स्कूलों में कर्मचारियों का बोझ भी कम होगा और अकाउंटिंग प्रक्रिया अधिक ऑटोमैटेड और साफ-सुथरी हो जाएगी।
यह कदम डिजिटल इंडिया मिशन (Digital India Mission) को और मजबूत बनाएगा। UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनाने से न केवल स्कूल प्रशासन आधुनिक बनेगा बल्कि पेरेंट्स भी डिजिटल लिटरेसी (Digital Literacy) की दिशा में आगे बढ़ेंगे। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि 2047 तक विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य को पाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल बदलाव जरूरी है।
स्मार्ट क्लासरूम, ऑनलाइन स्टडी मैटेरियल और डिजिटल फीस सिस्टम जैसे इनिशिएटिव्स से देश के स्कूलों को भविष्य के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। अब फीस भरने के लिए स्कूल के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि कुछ सेकंड में मोबाइल से पेमेंट कर पेरेंट्स अपना समय बचा सकेंगे।
सरकार का यह कदम न केवल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देगा बल्कि कैशलैस इकोनॉमी (Cashless Economy) को भी सशक्त बनाएगा। इससे शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, सुविधा और डिजिटल दक्षता का नया अध्याय शुरू होगा — जो आने वाले समय में भारत के स्कूल सिस्टम की तस्वीर बदल सकता है।