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09-Nov-2025 01:22 PM
By First Bihar
Bihar election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से पहले सियासी तापमान अपने चरम पर है। कैमूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत इस बात से की कि एनडीए सरकार ने बिहार में विकास की नई शुरुआत 2005 में की थी। “हमसे पहले बिहार में कुछ नहीं था, न सड़क थी, न रोशनी, न कानून-व्यवस्था,” नीतीश ने कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब 2005 में उन्होंने सत्ता संभाली, उस समय बिहार में हर ओर भय और अराजकता का माहौल था। “उस दौर में लोग अंधेरा होने के बाद घरों से बाहर निकलने से डरते थे। अपराध चरम पर था, सांप्रदायिक तनाव फैला हुआ था और सरकार नाम की कोई चीज़ नहीं थी,” उन्होंने कहा। नीतीश कुमार ने कहा कि उस समय बिहार के गाँव और शहर दोनों ही उपेक्षा का शिकार थे। “स्कूलों में शिक्षक नहीं थे, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं थे, सड़कें टूटी हुई थीं, बिजली की व्यवस्था बेहद खराब थी। ऐसे हालात में हमने काम शुरू किया,” उन्होंने कहा।
‘हमने डर का माहौल खत्म किया’
नीतीश कुमार ने कहा कि 2005 में एनडीए की सरकार बनने के बाद उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था को सुधारने को प्राथमिकता दी। “हमने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की, पुलिस की जिम्मेदारी तय की और लोगों को भरोसा दिलाया कि अब बिहार में कानून का राज होगा, गुंडों का नहीं,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि उनके शासन में हजारों अपराधी जेल भेजे गए और अब राज्य में लोग बेखौफ होकर यात्रा कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें बिहार की पहचान बन चुकी हैं। “पहले लोग कहते थे—‘बिहार की सड़कें देखो, वहां चलना मुश्किल है।’ लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। गाँव-गाँव तक सड़कें पहुंची हैं। पहले जहाँ लोगों को बाजार तक पहुंचने में घंटों लगते थे, अब कुछ ही मिनटों में पहुंच जाते हैं,” उन्होंने कहा।
‘परिवारवाद ने राज्य को पीछे किया’
नीतीश कुमार ने अपने भाषण में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और उसके नेता लालू प्रसाद यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले की सरकारों ने सिर्फ़ अपने परिवार को मजबूत किया, जनता की चिंता नहीं की। “जब उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा, तो उन्होंने अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिया। सत्ता उनके परिवार की संपत्ति बन गई थी। उन्होंने राज्य की जनता के लिए कुछ नहीं किया, सिर्फ़ बेटों-बेटियों के लिए राजनीति की,” नीतीश ने कहा।
उन्होंने कहा कि आज वही लोग फिर से सत्ता में आने का सपना देख रहे हैं, लेकिन बिहार की जनता अब सब कुछ समझ चुकी है। “अब जनता जानती है कि किसने विकास किया और किसने सिर्फ़ नारे दिए,” उन्होंने जोड़ा।
‘शिक्षा और स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार’
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने लाखों नए स्कूल खोले, लाखों शिक्षकों की नियुक्ति की और ‘मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना’ जैसी योजनाओं से लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित किया। “आज बिहार की बेटियाँ आत्मनिर्भर हैं, पढ़-लिख रही हैं और समाज में आगे बढ़ रही हैं। पहले जो बेटियाँ स्कूल नहीं जा पाती थीं, अब वे डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बन रही हैं,” उन्होंने कहा।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बोलते हुए नीतीश ने कहा कि पहले अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होते थे, दवाइयाँ नहीं मिलती थीं, लेकिन अब राज्य के हर प्रखंड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत किया गया है। “हमने चिकित्सा कर्मियों की नियुक्ति की, एंबुलेंस सेवा चलाई और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया,” उन्होंने कहा।
‘विकास और सामाजिक न्याय, यही है हमारी पहचान’
नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा ‘विकास के साथ न्याय’ के सिद्धांत पर काम किया है। “हमने गरीबों, दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को सशक्त किया है। पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया, जिससे वे निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन सकीं,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि “कुछ लोग अब जाति और धर्म के नाम पर वोट मांग रहे हैं, लेकिन बिहार की जनता अब विकास चाहती है, न कि झगड़ा।” उन्होंने कहा कि बिहार में अब हर क्षेत्र में काम हुआ है — चाहे वह सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य या बिजली हो। “हमारी सरकार ने हर घर बिजली पहुंचाई, हर गांव तक सड़क बनाई और रोजगार के अवसर बढ़ाए,” उन्होंने जोड़ा।
‘जनता से एक बार फिर आशीर्वाद की अपील’
अपने भाषण के अंत में नीतीश कुमार ने जनता से एनडीए को एक बार फिर मौका देने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमने जो काम शुरू किया है, उसे पूरा करने के लिए जनता का आशीर्वाद जरूरी है। जो बिहार पहले अंधकार में था, उसे हमने उजाले में लाया है। अब इस विकास को रुकने नहीं देना है।”
नीतीश ने कहा कि बिहार की जनता ने हमेशा विकास के साथ रहने का निर्णय लिया है और इस बार भी जनता वही करेगी। “हमारी प्राथमिकता सिर्फ बिहार का विकास है, किसी परिवार का नहीं,” उन्होंने कहा रैली में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। मंच पर कैमूर के एनडीए प्रत्याशी और स्थानीय नेता भी उपस्थित रहे। सभा के दौरान कई बार ‘नीतीश कुमार जिंदाबाद’ और ‘एनडीए वापस लाओ’ के नारे गूंजे।
कैमूर की रैली में नीतीश कुमार ने अपने शासनकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए बिहार की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य में विकास, कानून व्यवस्था और सामाजिक न्याय की दिशा में जो काम शुरू हुआ है, वह सिर्फ़ एनडीए सरकार ही जारी रख सकती है। वहीं उन्होंने विपक्ष पर परिवारवाद और बदहाली का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार अब पुराने दौर में नहीं लौटेगा।