Patna school closed : पटना में बढ़ती ठंड का असर: 5 जनवरी तक कक्षा पांच तक के सभी स्कूल बंद, ऊपरी कक्षाओं के लिए बदला समय Bihar State Women Commission : बिहार की महिलाओं पर विवादित बयान देकर बुरे फंसे महिला मंत्री के हसबैंड , महिला आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान ; सरकार से कार्रवाई की मांग Bihar News: बिहार के SHO की सैलरी से हर दिन कटेंगे पांच सौ रूपए, कोर्ट के फैसले से हर कोई हैरान Bihar News: बिहार के SHO की सैलरी से हर दिन कटेंगे पांच सौ रूपए, कोर्ट के फैसले से हर कोई हैरान बिहार में NIA का बड़ा एक्शन: फुलवारी शरीफ PFI मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया, पूछताछ के बाद एक को छोड़ा बिहार में NIA का बड़ा एक्शन: फुलवारी शरीफ PFI मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया, पूछताछ के बाद एक को छोड़ा पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी की जयंती पर भव्य समारोह का होगा आयोजन, सीएम नीतीश कुमार होंगे शामिल पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी की जयंती पर भव्य समारोह का होगा आयोजन, सीएम नीतीश कुमार होंगे शामिल मुजफ्फरपुर पुलिस की नई पहल: अब थानों पर लगेगा जनता दरबार, SP ने सुनीं जन-समस्याएं Bihar News: बिहार का भ्रष्ट दारोगा 25 हजार घूस लेते हुआ गिरफ्तार, निगरानी ब्यूरो की टीम ने थाना गेट पर ही रंगे हाथ धर लिया
15-Nov-2025 08:38 AM
By First Bihar
Bihar election results : बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार कई छोटी पार्टियों ने अपने स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। इन्हीं में से एक है जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), जिसने पूरे बिहार में सिर्फ 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। सीटों की संख्या कम होने के बावजूद पार्टी ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। छह में से पांच सीटों पर जीत हासिल कर पार्टी ने अपनी राजनीतिक जमीन को और मजबूत कर लिया है। सिर्फ एक सीट पर उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन बाकी पांच सीटों पर मिली भारी जीत ने पार्टी में नई ऊर्जा भर दी है। सबसे दिलचस्प और उत्साहजनक नतीजे उन सीटों पर आए हैं जहाँ हम पार्टी ने सामाजिक समीकरणों और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सशक्त उम्मीदवार उतारे थे।
इमामगंज से ललन राम की शानदार जीत
गया जिले की इमामगंज सीट से ललन राम को जीत मिली है। यह सीट हमेशा से राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यहां दलित–महादलित वोटरों का बड़ा आधार है। इस सीट पर शुरू से ही कड़ा मुकाबला देखने को मिला था, लेकिन परिणामों में ललन राम ने अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़ी बढ़त से पछाड़ते हुए जीत दर्ज की। स्थानीय स्तर पर सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को ललन राम ने मजबूती से उठाया। उनका जनसंपर्क अभियान पहले दिन से ही चर्चाओं में था। इसी कारण उन्हें जनता का भारी समर्थन मिला।
बाराचट्टी में दीपा कुमारी ने दिखाया जीत का दम
बाराचट्टी सीट से दीपा कुमारी ने जीत हासिल कर यह साबित कर दिया कि महिला नेतृत्व भी अब बिहार की राजनीति में मजबूती से जगह बना रहा है। दीपा कुमारी का जनाधार पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनकी जीत ने पार्टी को गया जिले में नई मजबूती दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि बाराचट्टी में दीपा कुमारी की जीत भविष्य में पार्टी को और बड़े स्तर पर फायदा दे सकती है।
अतराई से ज्योति देवी की बड़ी बढ़त
अतराई से ज्योति देवी ने प्रभावशाली जीत दर्ज की है। इलाके में पिछड़े वर्गों और महिलाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ पहले से ही मजबूत थी। जीत के बाद उन्होंने कहा कि यह जीत जनता की उम्मीदों और विश्वास की जीत है। अतराई क्षेत्र में कई वर्षों से लंबित सड़क परियोजनाओं, पेयजल संकट और शिक्षा की स्थिति को सुधारने का मुद्दा चुनाव में प्रमुख रहा। ज्योति देवी ने अपने चुनाव अभियान में इन मुद्दों को लगातार उठाया और लोगों को भरोसा दिलाया कि वे इन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर करेंगी। परिणामों में जनता ने भी उनके वादों को स्वीकार करते हुए उन्हें भारी समर्थन दिया।
सिकंदरा से प्रफुल्ल कुमार मांझी की बड़ी विजय
सिकंदरा सीट से प्रफुल्ल कुमार मांझी ने भी शानदार जीत हासिल की है। सिकंदरा क्षेत्र में मांझी समुदाय के साथ-साथ युवा वोटरों की बड़ी संख्या उनके पक्ष में खड़ी हुई। प्रफुल्ल मांझी ने बेरोजगारी, कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की कमी और कृषि आधारित उद्योगों के विकास जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्हें मिली जीत के बाद यह साफ हो गया कि उनकी लोकप्रियता का आधार सिर्फ जातीय समीकरणों पर नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों को समझने और उनके समाधान के लिए ईमानदार प्रयासों पर टिके हुए है।
पांच सीटों पर भारी जीत, एक पर हार – लेकिन मनोबल ऊँचा
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने इस बार भले ही सिर्फ 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन परिणाम दिखाते हैं कि पार्टी ने रणनीतिक रूप से सही क्षेत्रों का चयन किया। पांच सीटों पर जीत और एक पर हार दिखाती है कि पार्टी की पैठ कई जिलों में मजबूत हो चुकी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन परिणामों से पार्टी आने वाले चुनावों में बड़े गठबंधनों के लिए एक मजबूत सहयोगी बनकर उभर सकती है। जीतनराम मांझी की नेतृत्व क्षमता और जमीन से जुड़े मुद्दों पर उनकी पकड़ को जनता ने इस बार खुलकर स्वीकार किया है।