Bihar Crime News: बिहार में JDU का पूर्व जिला प्रवक्ता गिरफ्तार, वैशाली पुलिस ने यहां से किया अरेस्ट; क्या है मामला? Bihar Crime News: जंगल में पेड़ से लटके दो नर कंकाल मिलने से सनसनी, ऑनर किलिंग की आशंका Bihar News: सकरी और रैयाम में जल्द खुलेंगे सहकारी चीनी मिल, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश Bihar News: सकरी और रैयाम में जल्द खुलेंगे सहकारी चीनी मिल, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश पटना में NEET छात्रा की मौत पर उबाल: शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाहर महिला संगठनों का जोरदार प्रदर्शन, बुलडोजर एक्शन की मांग पटना में NEET छात्रा की मौत पर उबाल: शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बाहर महिला संगठनों का जोरदार प्रदर्शन, बुलडोजर एक्शन की मांग PM Awas Yojana Gramin: पीएम आवास योजना से बदली बिहार के गांवों की तस्वीर, 12 लाख परिवारों को मिलेगा अपना घर PM Awas Yojana Gramin: पीएम आवास योजना से बदली बिहार के गांवों की तस्वीर, 12 लाख परिवारों को मिलेगा अपना घर Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज माघ मेला में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने पर आभार सभा, संतों ने दिया सनातन संरक्षण का संदेश Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज माघ मेला में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूरे होने पर आभार सभा, संतों ने दिया सनातन संरक्षण का संदेश
21-Apr-2025 10:36 AM
By First Bihar
Bihar tribal voters: बिहार में पहली बार आदिम जनजातियों के हर 18 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की गई है। चुनाव आयोग के एक साल तक चले विशेष अभियान के बाद यह सफलता मिली है।
ये जनजातियां, जिन्हें सरकारी भाषा में पीवीटीजी (PVTG - Particularly Vulnerable Tribal Group) कहा जाता है, अब तक मुख्यधारा की नागरिक सुविधाओं से काफी हद तक कटे हुए थे। भाषा की बाधा, स्थायी निवास की अनुपस्थिति और संपर्क की कठिनाइयों के बावजूद आयोग ने अभियान को अंजाम तक पहुंचाया।
10 जिलों में खोज और संपर्क
गया, नवादा, कैमूर, बांका, भागलपुर, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल और किशनगंज, इन दस जिलों में आदिम जनजातियों के परिवारों तक पहुंच बनाकर 3147 वयस्कों को वोटर बनाया गया। इन जिलों में माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, पहाड़िया, कोरबा और बिरहोर जैसी जनजातियां निवास करती हैं, जिनकी कुल आबादी आयोग के अनुसार लगभग 7631 है।
संवाद और भरोसे से मिली राह
अभियान के दौरान कई वयस्कों से संपर्क उनके रिश्तेदारों के माध्यम से किया गया। स्थानीय भाषा बोलने वालों की मदद से संवाद स्थापित कर वोटर लिस्ट में नाम दर्ज किए गए। आदिम जनजातियों की जीवनशैली में जंगलों पर निर्भरता, मौसमी आवास और पत्तों से बनाए गए अस्थायी घर अब भी देखने को मिलते हैं।
लोकतंत्र की ओर एक मजबूत कदम
चुनाव आयोग का यह कदम न केवल लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने वाला है, बल्कि यह आदिम जनजातियों के लिए भी एक नई पहचान और अधिकारों की दिशा में अग्रसर होने का अवसर है।