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Bihar election : वीवीपैट बदले गए बूथों पर पहले होगी पर्चियों की गिनती, फिर शुरू होगी वोटों की गणना; चुनाव आयोग का नया निर्देश

बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। जिन बूथों पर वीवीपैट मशीनें बदली गई थीं, वहां अब पहले वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा, उसके बाद ही ईवीएम वोटों की गिनती शुरू होगी। आयोग ने पारदर्शिता के लिए नया निर्देश जार

13-Nov-2025 03:53 PM

By First Bihar

Bihar election : बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना को लेकर चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। आयोग ने साफ किया है कि जिन मतदान केंद्रों पर वीवीपैट (VVPAT) मशीनें बदली गई थीं, वहां अब वोटों की गिनती की प्रक्रिया पहले से अलग होगी। आयोग ने कहा है कि ऐसे सभी बूथों पर सबसे पहले वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा, उसके बाद ही आगे की वोट गिनती शुरू की जाएगी। यह कदम मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।


बदले गए बूथों पर होगी विशेष गिनती प्रक्रिया

चुनाव आयोग के नए आदेश के अनुसार, जिन मतदान केंद्रों पर मतदान के दौरान तकनीकी खराबी या किसी अन्य वजह से वीवीपैट मशीन बदली गई थी, वहां की गिनती प्रक्रिया सामान्य बूथों से अलग रखी गई है। मतगणना शुरू होने से पहले उन बूथों पर इस्तेमाल हुई सभी वीवीपैट मशीनों को एक साथ काउंटिंग टेबल पर रखा जाएगा।


काउंटिंग एजेंट्स यानी गणना अभिकर्ताओं की मौजूदगी में इन मशीनों से पर्चियां निकालकर टेबल पर रखी जाएंगी। इसके बाद इन पर्चियों की गिनती की जाएगी और उसे संबंधित ईवीएम के आंकड़ों से मिलाया जाएगा। केवल तभी उस बूथ की वोट गिनती आगे बढ़ेगी जब वीवीपैट स्लिप और ईवीएम के डेटा में पूरा मेल बैठ जाएगा।


पारदर्शिता और निष्पक्षता पर रहेगा फोकस

चुनाव आयोग ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि मतगणना को लेकर किसी तरह की शंका या विवाद की गुंजाइश न रहे। चुनाव आयोग ने कहा है कि “हमारा लक्ष्य मतदाताओं का विश्वास बनाए रखना और मतगणना की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है।”


इस निर्देश के तहत अब मतगणना कर्मियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे वीवीपैट मिलान की प्रक्रिया को सही ढंग से अंजाम दे सकें। हर काउंटिंग हॉल में एक नोडल अधिकारी तैनात रहेगा जो यह सुनिश्चित करेगा कि आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सख्ती से किया जाए।


फंसी हुई पर्चियों की नहीं होगी गिनती

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि अगर मशीन बदलते समय कोई वीवीपैट पर्ची अंदर फंसी रह गई थी, तो उसे बाहर निकालकर अलग रख दिया जाएगा। लेकिन उस पर्ची को वोट की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। आयोग के मुताबिक, जब तक वोटर स्लिप कटकर वीवीपैट मशीन के ड्रॉप बॉक्स में नहीं गिरती, तब तक उस वोट को वैध नहीं माना जाएगा। इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही वोट गिने जाएं जो पूरी तरह से दर्ज हो चुके हैं और जिन्हें मशीन ने सफलतापूर्वक स्वीकार किया है।


प्रत्येक बूथ पर सुरक्षा और निगरानी के पुख्ता इंतजाम

आयोग ने यह भी कहा है कि मतगणना के दौरान हर चरण पर सुरक्षा और निगरानी के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। काउंटिंग हॉल में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसके अलावा, हर बूथ पर मौजूद काउंटिंग एजेंट्स को यह अधिकार दिया गया है कि वे वीवीपैट मिलान के दौरान उपस्थित रहें और प्रक्रिया का अवलोकन करें।


मतगणना प्रक्रिया में किसी जल्दबाजी की मनाही

चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वीवीपैट मिलान की प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही आगे की वोट गिनती शुरू की जाए। आयोग ने कहा है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी बूथ पर वीवीपैट और ईवीएम के आंकड़ों में कोई विसंगति पाई जाती है, तो उसकी रिपोर्ट तत्काल जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपी जाएगी और आयोग के निर्देशानुसार दोबारा सत्यापन किया जाएगा।


तकनीकी कारणों से हुई मशीनों की अदला-बदली

मतदान के दौरान कई स्थानों पर वीवीपैट मशीनें तकनीकी कारणों से बदली गई थीं। सामान्यतः ऐसी स्थिति तब आती है जब मशीन में पेपर जाम, बैटरी फेल या डिस्प्ले संबंधी त्रुटि आती है। ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार मतदान तत्काल रोका जाता है और रिजर्व मशीन लगाई जाती है। अब मतगणना के दौरान, इन्हीं बदले गए मशीनों के कारण, गिनती से पहले पर्चियों के मिलान को अनिवार्य किया गया है।


मतगणना से पहले सभी जिलों को भेजे गए निर्देश

आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह नया निर्देश भेज दिया है। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मतगणना के दिन सुबह सबसे पहले उन बूथों की पहचान कर ली जाए जहां वीवीपैट बदली गई थी। इसके बाद वहां वीवीपैट स्लिप्स का मिलान कर उसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। तभी अन्य बूथों की गिनती प्रक्रिया शुरू होगी।


चुनाव आयोग का यह फैसला मतगणना की पारदर्शिता बढ़ाने और ईवीएम प्रणाली पर जनता का भरोसा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर वोट की सही गिनती हो और किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी मतगणना के परिणाम को प्रभावित न करे।