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15-Nov-2025 08:07 AM
By First Bihar
Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि राज्य की राजनीति में गठबंधन की सामूहिक ताकत और नेतृत्व के व्यक्तिगत करिश्मे का संयोजन ही जीत का वास्तविक सूत्र है। 243 सीटों वाली विधानसभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 202 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भाजपा ने 89 और जदयू ने 85 सीटें अपने नाम कीं, जबकि शेष सीटों पर सहयोगी दलों को सफलता मिली। इस भव्य विजय में एक नाम विशेष रूप से उभरकर सामने आया, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास)। पार्टी ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 पर जीत हासिल कर एक नया राजनीतिक मानदंड स्थापित कर दिया।
चिराग पासवान: 2025 के किंगमेकर
भाजपा और जदयू ने यद्यपि अपने-अपने स्तर पर मजबूत प्रदर्शन किया, परंतु एनडीए की इस शानदार जीत को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने में चिराग पासवान की भूमिका निर्णायक साबित हुई। लोक जनशक्ति पार्टी (आरवी) ने 68% से अधिक स्ट्राइक रेट दर्ज किया, जो न केवल एनडीए में सबसे अधिक था बल्कि बिहार के चुनावी इतिहास में भी कम ही देखने को मिलता है। यह वह प्रदर्शन है जिसने चिराग को एनडीए के भीतर ‘किंगमेकर’ और ‘गेमचेंजर’ दोनों के रूप में स्थापित कर दिया है।
एलजेपी (आरवी) को जिन 29 सीटों पर जगह मिली थी, उनमें से अधिकांश सीटों पर त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला था। बावजूद इसके, पार्टी ने इन सीटों पर जो प्रदर्शन किया, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया। 2020 में जदयू को नुकसान पहुंचाने वाली वही पार्टी अब एनडीए को रिकॉर्ड जीत दिलाने वाले सबसे मजबूत स्तंभों में शामिल हो गई है।
बता दें कि चिराग पासवान की सफलता को समझने के लिए लखीसराय सीट का परिणाम एक प्रतीकात्मक उदाहरण है। यहां जदयू के कुछ स्थानीय नेता भाजपा के प्रत्याशी के खिलाफ माहौल बना रहे थे। खुद भाजपा प्रत्याशी तक यह मानकर चल रहे थे कि जीत-हार कुछ हजार वोटों में तय होगी। लेकिन परिणाम में भाजपा को 30,000 से अधिक की अप्रत्याशित बढ़त मिली। यह बताता है कि जमीन पर मतदाता मन की धारा क्या थी, खासकर महिला मतदाताओं की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ ने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई। अगर एक विधानसभा क्षेत्र में औसत तीन लाख की आबादी का केवल 30% भी इस योजना के लाभार्थी हों, तो परिणाम किस दिशा में जाएगा, यह स्पष्ट हो जाता है। यही वजह है कि तमाम स्थानीय समीकरण और असंतोष दब गए और राज्यव्यापी लहर ने एनडीए को भारी लाभ दिया।
एलजेपी (आरवी) का शानदार उभार
गठबंधन में शामिल होने के बाद एनडीए ने चिराग पासवान को 29 सीटें देकर एक जोखिम लिया था। विरोधियों का मानना था कि इससे वोटों का बंटवारा होगा या जदयू-बजेपी के पारंपरिक मतदाता भ्रमित हो सकते हैं। लेकिन परिणामों ने इन आशंकाओं को गलत साबित कर दिया। एलजेपी (आरवी) ने 19 सीटें जीतीं, जबकि 2020 की तुलना में इसकी सीटें 1800% बढ़ गईं। यह अप्रत्याशित सफलता भाजपा के वोट ट्रांसफर, चिराग की लोकप्रियता, राम विलास पासवान की जातीय विरासत और युवाओं में उनके कैचफ्रेज—“बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट”—के प्रभाव का संयुक्त परिणाम मानी जा रही है।
एक विभाजन से उभरी नई राजनीतिक ताकत
2021 में लोक जनशक्ति पार्टी दो गुटों में विभाजित हो गई—एक चिराग पासवान के नेतृत्व में और दूसरा पशुपति पारस के नेतृत्व में। राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद चिराग ने अपनी राजनीतिक जमीन को बचाए रखा और धीरे-धीरे मजबूत किया। इस चुनाव में उनकी सफलता बताती है कि उन्होंने अपने पिता राम विलास पासवान की राजनीतिक विरासत को सही दिशा में आगे बढ़ाया है।
2025 की जीत ने बढ़ाया चिराग का कद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी नजदीकी को चिराग पहले ही सार्वजनिक मंचों पर व्यक्त कर चुके हैं। “मैं मोदी जी का हनुमान हूं” जैसे बयान ने उन्हें भाजपा समर्थक वर्ग में लोकप्रिय बनाया। 2025 के नतीजों ने इस करीबी रिश्ते को राजनीतिक रूप से फलित कर दिया है। एनडीए में अब चिराग पासवान का कद पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है।
2030 में तेजस्वी बनाम चिराग? नई प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत
एनडीए की यह जीत और एलजेपी (आरवी) का उभार बिहार की राजनीति में एक नए समीकरण की भूमिका तैयार कर रहा है। 2030 में बिहार की राजनीति युवा नेतृत्व—तेजस्वी यादव और चिराग पासवान—के इर्द-गिर्द घूमने की संभावना है। दोनों के पास मजबूत जनाधार, पहचान और संगठन क्षमता है। 2025 के नतीजों ने इस संभावित भविष्य संघर्ष की बुनियाद रख दी है।