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14-Nov-2025 06:36 AM
By First Bihar
Bihar Election : बिहार की राजनीति में नया अध्याय लिखने वाले 243 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव की मतगणना आज सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है। इस बार का चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा—रिकॉर्ड मतदान, सीट-दर-सीट जटिल समीकरण और कई क्षेत्रों में बहुकोणीय मुकाबले ने नतीजों को बेहद दिलचस्प और रोमांचक बना दिया है। तमाम एग्जिट पोल्स ने एनडीए को बढ़त दी है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि बिहार की राजनीति अक्सर अनुमान से उलट परिणाम देने में माहिर रही है। ऐसे में अंतिम तस्वीर कई सीटों पर पूरी तरह बदल सकती है।
इस बार राज्य में 66.9% मतदान दर्ज हुआ है, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक है। चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक इतना ऊंचा मतदान प्रतिशत किसी भी ओर झुक सकता है, इसलिए नतीजों का अनुमान लगाना बेहद कठिन है। यही वजह है कि इस बार की मतगणना पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, स्ट्रॉन्ग रूम कड़ी निगरानी में
चुनाव आयोग ने मतगणना को लेकर व्यापक तैयारी की है। सभी जिला मुख्यालयों पर काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं और सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व है। मतगणना केंद्रों के आसपास तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है, जिसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती भी शामिल है। राज्यभर में 70 से अधिक चुनाव ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जो हर चरण की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। ईवीएम और वीवीपैट संग्रहीत स्ट्रॉन्ग रूम्स उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सील किए गए थे। इन कमरों की 24×7 सीसीटीवी से निगरानी हो रही है, और किसी भी तरह की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पहला रुझान कब आएगा?
मतगणना की प्रक्रिया आज सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है, लेकिन शुरुआती रुझान 9 बजे के आसपास मिलने की संभावना है। सबसे पहले पोस्टल बैलेट के पैकेट खोले जाएंगे और उनकी गिनती की जाएगी। परंपरा के मुताबिक पोस्टल बैलेट से ही शुरुआती रुझान बनते हैं, लेकिन कई बार ईवीएम खुलने तक तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने के बाद ईवीएम की काउंटिंग शुरू होगी। पहले घंटे में ही विभिन्न सीटों पर शुरुआती बढ़त और पिछड़ने की स्थिति सामने आने लगेगी।
एग्जिट पोल्स में क्यों बढ़त पर है एनडीए?
लगभग सभी राष्ट्रीय एग्जेंसियों के एग्जिट पोल्स ने इस बार एनडीए को बढ़त दिलाई है। कई सर्वेक्षणों में एनडीए को बहुमत पार करते हुए दिखाया गया है, जबकि महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-लेफ्ट) को पीछे बताया गया है।हालांकि, राजनीतिक पंडितों का कहना है कि बिहार की राजनीति एग्जिट पोल्स को हमेशा सही साबित नहीं करती। राज्य की क्षेत्रीय विविधता और सीट-दर-सीट अलग-अलग समीकरण अंतिम नतीजों को किसी भी समय बदल सकते हैं।
बिहार को मोटे तौर पर कई हिस्सों में बांटकर देखा जाता है:
1. पश्चिमी बिहार:
यह क्षेत्र बीजेपी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। यहां पार्टी को हमेशा मजबूत समर्थन मिलता रहा है।
2. मध्य बिहार और पटना-गंगा बेल्ट:
इस इलाके में राजद का प्रभाव ज्यादा माना जाता है। यादव और मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या इस क्षेत्र में महागठबंधन को मजबूती देती रही है।
3. उत्तर-पूर्व बिहार:
यहां छोटे-छोटे स्थानीय समीकरण और जातीय समूह नतीजे तय करते हैं। कई बार बड़े दलों की बजाय स्थानीय उम्मीदवारों की लोकप्रियता भी निर्णायक बन जाती है।
4. भोजपुर-अवध क्षेत्र:
विचारधारा, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय वफादारियों की जटिलता यहां चुनाव को बेहद दिलचस्प बना देती है।
इन्हीं विविध राजनीतिक परिदृश्यों की वजह से चुनावी नतीजे एग्जिट पोल्स से अलग होकर भी सामने आ सकते हैं।
रिकॉर्ड मतदान क्या संकेत देता है?
66.9% मतदान को चुनावी पर्यवेक्षक कई तरह से पढ़ रहे हैं। एक राय यह है कि अधिक मतदान बदलाव का संकेत देता है। दूसरी राय के अनुसार ग्रामीण और महिला मतदाताओं की बड़ी भागीदारी से विकास, महंगाई और स्थानीय मुद्दों की भूमिका प्रमुख रही होगी। राजनीतिक दृष्टि से ये दोनों ही संकेत किसी भी पक्ष के लिए सकारात्मक या नकारात्मक हो सकते हैं। इसी कारण उत्सुकता चरम पर है कि रिकॉर्ड मतदान का फायदा किस गठबंधन को मिलेगा।
आज तय होगा बिहार का सियासी भविष्य
बिहार की जनता ने अपना फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है। अब वह फैसला मतगणना के साथ धीरे-धीरे सामने आएगा। सभी दलों ने अपने-अपने स्तर पर पूरी तैयारी कर ली है। नेता, कार्यकर्ता और उम्मीदवार मतगणना केंद्रों के बाहर मौजूद रहेंगे। आज का दिन तय करेगा कि क्या एग्जिट पोल्स का अनुमान सही साबित होता है या बिहार एक बार फिर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका देता है।