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02-Nov-2025 12:57 PM
By First Bihar
Anant Singh Arrest: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। बहुचर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में बाहुबली नेता और पूर्व विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। अनंत सिंह इस विधानसभा चुनाव में जेडीयू के प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे। उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने की है। इस घटना ने चुनावी माहौल को और भी गर्मा दिया है। वहीं, पटना के जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. त्यागराजन एम.एस. ने कहा कि “मोकामा की घटना को प्रशासन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है, और कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
अनंत सिंह लंबे समय से विवादों और आपराधिक मामलों से जुड़े रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मोकामा और आस-पास के इलाकों में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
अब अगर बात करें उन दो अधिकारियों की, जिन्होंने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, तो सबसे पहले पटना के डीएम डॉ. त्यागराजन एम.एस. की बात करें। वे 2011 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और मूल रूप से कोयंबटूर (तमिलनाडु) के रहने वाले हैं। उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से 2008 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी। डॉक्टर बनने के बाद भी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया और पहले 2010 में आईपीएस, फिर 2011 में आईएएस बने। उनका प्रशासनिक सफर पूर्णिया जिले से प्रशिक्षु अधिकारी के रूप में शुरू हुआ।
इसके बाद उन्होंने पटना सिटी के एसडीओ, बिहार शरीफ नगर निगम के आयुक्त, 2015 में नालंदा के डीएम, 2019 में दरभंगा के डीएम और 2021 के अंत में गया के डीएम के रूप में कार्य किया। वर्तमान में वे पटना के डीएम के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और प्रशासनिक सख्ती के लिए जाने जाते हैं।
वहीं, पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा की बात करें तो वे 2014 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और झारखंड के मूल निवासी हैं। उन्होंने बी.टेक के साथ पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट भी किया है। जून 2025 में उन्हें पटना का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) नियुक्त किया गया था।
बता दें कि, इससे पहले वे पूर्णिया जिले में SSP रहे, जहां उन्होंने कई जघन्य अपराधों का सफलतापूर्वक खुलासा किया था। उनकी छवि एक सख्त और परिणाम देने वाले पुलिस अधिकारी की रही है। पटना प्रशासन की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह संदेश गया है कि चुनावी माहौल में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन दोनों ही पूरी तरह सजग हैं।