Bihar Rajya Sabha Election : पांचवीं सीट पर सियासी घमासान, उपेंद्र कुशवाहा और एडी सिंह आमने-सामने; RLM प्रमुख ने CM नीतीश कुमार से की मुलाकात

बिहार में राज्यसभा चुनाव की पांचवीं सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पांच सीटों पर छह उम्मीदवार मैदान में उतरने से अब मतदान तय माना जा रहा है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही विधायकों का समर्थन जुटाने में जुटे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 07, 2026, 11:52:21 AM

Bihar Rajya Sabha Election : पांचवीं सीट पर सियासी घमासान, उपेंद्र कुशवाहा और एडी सिंह आमने-सामने; RLM प्रमुख ने CM नीतीश कुमार से की मुलाकात

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बिहार में राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है क्योंकि कुल पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में उतर गए हैं। ऐसे में अब राज्यसभा चुनाव में मतदान होना तय माना जा रहा है। राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए विधायकों की जोड़-तोड़ में जुट गए हैं।


राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Upendra Kushwaha ने पांचवीं सीट के लिए नामांकन दाखिल किया है। वे एनडीए के सहयोगी दल के उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में हैं। दूसरी ओर महागठबंधन की तरफ से A. D. Singh ने भी नामांकन दाखिल किया है। इससे चुनावी समीकरण दिलचस्प हो गया है क्योंकि अब मुकाबला सीधा एनडीए और महागठबंधन के बीच दिखाई दे रहा है।


दरअसल, बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है, लेकिन छह उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव अब निर्विरोध नहीं रह गया है। विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या और दलों की ताकत को देखते हुए चार सीटें एनडीए के खाते में जाती हुई दिखाई पड़ रही हैं। वहीं पांचवीं सीट को लेकर असली लड़ाई शुरू हो गई है।


विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार एनडीए के पास चार सीटें जिताने लायक संख्या है, लेकिन पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। दूसरी ओर महागठबंधन के पास भी अपनी सीट सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है और उसे करीब छह विधायकों का अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। यही वजह है कि दोनों पक्षों की ओर से लगातार रणनीतिक बैठकों और संपर्कों का दौर जारी है।


इसी बीच एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष Upendra Kushwaha ने मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitish Kumar से मुलाकात की है। इस मुलाकात को राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बैठक में पांचवीं सीट को लेकर रणनीति और विधायकों के समर्थन पर चर्चा हुई होगी।


राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि एनडीए इस बार राज्यसभा की पांचों सीटों पर जीत दर्ज करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि गठबंधन पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में है और सभी सहयोगी दल मिलकर जीत सुनिश्चित करेंगे।


उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर समय-समय पर बातचीत होती रहती है और सहयोगी दलों के बीच समन्वय बना हुआ है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी मुलाकात भी हुई है, लेकिन यह कोई पहली मुलाकात नहीं थी। उन्होंने कहा कि एनडीए के सहयोगी दलों के बीच लगातार संवाद चलता रहता है और चुनाव को लेकर रणनीति पर भी चर्चा होती रहती है।


मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में संभावित एंट्री को लेकर भी कुशवाहा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि निशांत कुमार को राजनीति में आना चाहिए। उनके अनुसार यह एक अच्छी पहल है और यदि कोई व्यक्ति राजनीति में आकर जनता की सेवा करना चाहता है तो उसका स्वागत होना चाहिए।


वहीं, जब नीतीश कुमार के दिल्ली जाकर सक्रिय राजनीति करने की संभावना को लेकर सवाल किया गया तो कुशवाहा ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो स्वाभाविक रूप से बिहार के लोगों को थोड़ा दुख होगा। उन्होंने कहा कि अभी तक नीतीश कुमार बिहार में रहकर राजनीति करते थे, लेकिन यदि वे दिल्ली जाकर काम करेंगे तो भी बिहार को देखते रहेंगे। फिर भी लोगों का भावनात्मक जुड़ाव होने के कारण थोड़ा दुख होना स्वाभाविक है।


इस दौरान जब पत्रकारों ने पूछा कि राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए अगर तीन विधायकों की जरूरत पड़ी तो विपक्ष के विधायकों को कैसे मैनेज किया जाएगा, तो कुशवाहा ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह पत्रकारों से ही विधायक मांग लेंगे। उनके इस बयान पर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा पड़े।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर एनडीए को कुछ निर्दलीय या छोटे दलों के विधायकों का समर्थन मिल जाता है, तो पांचवीं सीट भी उसके खाते में जा सकती है। हालांकि महागठबंधन भी इस सीट को लेकर पूरी ताकत लगा रहा है और अपने पक्ष में विधायकों को साधने की कोशिश कर रहा है।


इस बीच बिहार की राजनीति में एक और चर्चा जोरों पर है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने खुद जदयू कोटे से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। उनके नामांकन के बाद राज्य की राजनीति में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं, तो बिहार की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि राज्यसभा चुनाव के बाद बिहार की सियासत में नया समीकरण बन सकता है। ऐसे में सभी दल अपनी रणनीति बेहद सावधानी से बना रहे हैं ताकि चुनावी गणित उनके पक्ष में जा सके।


फिलहाल राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। दोनों गठबंधन अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। आने वाले दिनों में विधायकों का रुख और राजनीतिक समीकरण तय करेंगे कि यह सीट आखिर किसके खाते में जाती है।


इस तरह बिहार का राज्यसभा चुनाव केवल संसदीय प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की आगे की राजनीति और सत्ता के समीकरण को भी प्रभावित करने वाला माना जा रहा है। इसलिए इस चुनाव पर पूरे राज्य की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।