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Success Story: इंजीनियर का बेटा बना IAS अधिकारी, दो बार असफलता के बाद भी नहीं टूटे हौसले, तीसरी बार UPSC में मिली सफलता

Success Story: सफलता की कहानी अपने मेहनत और लगन से लिख दिया है, और यह साबित भी कर दिया है कि ठान लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है. जानें...UPSC में AIR-19 रैंक पाने वाले की सफलता की कहानी.

03-May-2025 04:08 PM

By First Bihar

Success Story: कहते है कि अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है। यह साबित कर दिखाया है, उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव 'उत्रावली' से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 में 19वीं रैंक हासिल करने वाले विभोर भारद्वाज। उनकी सफलता सिर्फ मेहनत की कहानी नहीं, बल्कि धैर्य, प्रतिबद्धता और समाज सेवा की भावना का भी प्रमाण है।


विभोर के पिता एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं और माँ एक गृहिणी। साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने की दिशा में निरंतर प्रयास किया। विभोर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज से अपनी पढ़ाई की। कॉलेज में एनएसएस (नेशनल सर्विस स्कीम) के तहत उन्होंने यमुना खादर की स्लम बस्तियों में सेवा कार्य किया। यहीं से उन्हें समाज के लिए कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिली और यूपीएससी की ओर रुख किया।


उन्होंने अपनी एम.एससी (फिजिक्स) के अंतिम सेमेस्टर में ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। वर्ष 2021 से उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से घर से ही पढ़ाई शुरू की। वहीं, पहले प्रयास में उन्हें एआईआर 743 मिली और उनका चयन आईआरएमएस (Indian Railway Management Service) में हुआ। इससे विभोर को संतुष्टि नहीं हुई और उन्होंने दूसरी बार परीक्षा दी, जिसमें इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं मिली। तीसरे प्रयास में उन्होंने बाजी मारी और एआईआर19 के साथ टॉपर्स की सूची में शामिल हो गए।


रणनीति और अध्ययन शैली

ऑप्शनल सब्जेक्ट: Physics (5 साल से यह विषय पढ़ने के कारण इसे चुना)

गाइडेंस: DIAS की मदद से अभिजीत अग्रवाल की गाइडेंस में नोट्स तैयार किए

GS तैयारी: टॉपिक-वाइज नोट्स बनाए, करंट अफेयर्स को अलग से संकलित न करके संबंधित टॉपिक्स के साथ जोड़ा

स्रोत: न्यूज़पेपर, वेबसाइट्स, मैगज़ीन और सरकारी रिपोर्ट्स

रिवीजन रणनीति: छोटे नोट्स जिनमें डेटा, फैक्ट्स, कमेटियों की जानकारी शामिल थी


सिलेबस को जितना हो सके उतना रिविजन करें, ताकि गहराई से समझ आ सके और भूलने की कोई गुन्जाईस न हो। इसके अलावा सभी विषयों को साथ में और बराबर पढ़ी जाए, जिससे कोई भी विषय छूटे नहीं। वहीं,  विभोर ने अपनी सफलता का श्रेय न केवल अपनी मेहनत को, बल्कि अपने दोस्त को भी दिया, जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया। 


इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह एक मैराथन है, न कि स्प्रिंट, जिसमें निरंतरता ही असली कुंजी है। कोई भी सपना बड़ा नहीं होता। जरूरी है कि आप धैर्य रखें, लगातार सीखते रहें और खुद पर विश्वास रखें। आपको रास्ता जरूर मिलेगा। विभोर भारद्वाज की सफलता न सिर्फ छात्रों के लिए, बल्कि छोटे शहरों और गांवों में रहने वाले युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कमी संसाधनों की नहीं, दिशा और समर्पण की होती है।