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Bihar Transport: फोटो भेजें...वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट लें ! बिहार में फिर शुरू हुआ पुराना खेल, सभी ऑटोमेटेड परीक्षण केंद्र पर उठने लगे सवाल, एक दिन में इतना सर्टिफिकेट ?

बिहार में शुरू हुए स्वचालित फिटनेस टेस्टिंग स्टेशनों से 100 से 200 गाड़ियों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है, एक गाड़ी की जांच में औसतन 10 मिनट लगते हैं। आरोप है कि गाड़ियों की वास्तविक जांच की जगह फोटो देखकर सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं.

23-Jun-2025 03:04 PM

By Viveka Nand

Bihar Transport: केंद्र सरकार ने वाहनों का फिटनेस जांच आधुनिक तकनीक से कराने का निर्णय लिया. इसके लिए देश भर में स्वचालित फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन शुरू किए गए. मकसद था कि गाड़ियों को मैन्यूअल चेक करने की बजाय मशीन से जांच की जाय, ताकि सड़क दुर्घटना कम हो सके. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के इस निर्णय के बाद बिहार में आठ स्वचालित फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन काम करना शुरू किया. परिवहन विभाग ने इसके लिए लाइसेंस निर्गत किया, जिस आधार पर निजी क्षेत्र में सभी स्वचालित फिटनेस टेस्टिंग स्टेशन काम कर रहे हैं. लेकिन यहां तक ऐसा खेल किया जा रहा, जिसकी कल्पना सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी नहीं की होगी.

एक दिन में 100-200 गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर उठने लगे सवाल 

बिहार के स्वचालित फिटनेस सेंटर पर एक दिन में 100- 200 गाड़ियों की जांच की जा रही है. जानकार बताते हैं कि स्वचावित टेस्टिंग सेंटर पर कुल मिलाकर 36 प्रकार की जांच, जिसमें करीब 10 जांच  मशीन से और कई मैनुअल करना है. एक गाड़ी का फिटनेस जांच करने में कम से कम 10 मिनट का समय लगता है. ऐसे में एक सेंटर पर औसतन प्रति दिन 100-200 गाड़ियों का फिटनेस करना करना संभव नहीं दिखता. जानकार बताते हैं कि बिहार में फिर से पुराना खेल शुरू हो गया, यानि गाड़ियों की जांच की बजाय फोटो जांच कर फिटनेस सर्टिफिकेट देना. बताया जाता है कि स्वचालित परीक्षण केंद्र पर गाड़ी का फोटो मंगवाकर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं. इस खेल में बिहार से लेकर दूसरे राज्य के माफिया सक्रिय हैं. बाहरी माफिया दूसरे राज्यों की गाड़ियों का बिहार से फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करवा रहे हैं.

बिहार में आठ स्वचालित टेस्टिंग स्टेशन हैं कार्यरत्त 

बता दें, बिहार में आठ स्वचालित फिटनेस जांच सेंटर कार्यरत्त हैं. इनमें पटना में तीन, भागलपुर, दरभंगा, सासाराम, वैशाली और नालंदा में 1-1 स्वचालित फिटनेस जांच केंद्र संचालित हैं. इन केंद्रों द्वारा प्रति दिन कितने वाहनों की जांच कर सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं, इसकी पूरी जानकारी https://vahan.parivahan.gov.in/AFMS/#/dashboard पर रिकार्ड होता है. जून महीने की 1-23 तारीख तक बिहार के स्वचालित वाहन जांच केंद्रों ने सारा रिकार्ड तोड़ दिया है. राज्य के एक स्वचालित परीक्षण केंद्र ने सर्टिफिकेट जारी करने में देश के सारे सेंटर्स को पीछे छोड़ दिया है. दरभंगा में स्थापित उक्त स्वचालित फिटनेस जांच केंद्र ने 1- 23 जून तक 4825 टेस्ट किए हैं. जबकि भागलपुर में संचालित केंद्र द्वारा 2397 गाड़ियों की जांच कर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया गया. तीसरे नंबर पर पटना का एक सेंटर है, जिसने 1726 टेस्ट किए. वैशाली के एक स्वचालित वाहन फिटनेस टेस्ट सेंटर ने इस माह में अब तक 875 गाड़ियों की जांच कर सर्टिफिकेट जारी किया है. पटना के दूसरे सेंटर ने 551 और तीसरें सेंटर द्वारा 470 टेस्ट किए गए. रोहतास जिले में संचालित सेंटर द्वारा 356 वाहनों का फिटनेस जांच कर सर्टिफिकेट जारी किए हैं. 

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परिवहन विभाग के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्वचालित फिटनेस जांच केंद्र द्वारा खुल्लम खुल्ला नियमों का उलंघन किया जा रहा है. फोटो पर ही सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं. इस खेल में बड़े-बड़े दलाल शामिल हैं. चूंकि स्वचालित टेस्टिंग स्टेशन दूसरे राज्य की गाड़ियों का भी फिटनेस जांच कर सकते हैं, लिहाजा बाहरी गाड़ियों का धड़ल्ले से फोटो जांच कर सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं. फोटो भेजिए और सर्टिफिकेट पाइए, यह खेल बिहार में जारी है. इस संबंध में हमने परिवहन विभाग के सचिव से पक्ष जानना चाहा, लेकिन उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका. 

बता दें, पिछले साल ही बिहार के तीन फिटनेस जांच केंद्रों पर गाड़ियों की जांच के लिए बुकिंग पर रोक लगाई गई थी. हालांकि कुछ समय बाद सभी केंद्र फिर से शुरू हो गए। परिवहन विभाग के कमिश्नर ने यह आदेश जारी किया था. उड़ीसा के परिवहन कमिश्नर ने भी बिहार के ऑटोमेटेड फिटनेस जांच केंद्रों द्वारा किए जा रहे खेल का खुलासा किया था और रिपोर्ट सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को भेजा था.