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BIHAR NEWS : पांडे जी देख लीजिए : सदर अस्पताल में हाईटेक “झाड़-फूंक” इलाज! डॉक्टर चुप, भगत मस्त मंत्र पढ़ता रहा

समस्तीपुर सदर अस्पताल में कुछ ऐसा हुआ, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। मरीज के पेट दर्द का इलाज करने आए परिवार के सामने खुला “हाईटेक इलाज”, जिसमें डॉक्टर चुप, स्टाफ निष्क्रिय और मरीज के पास बैठे भगत ने घंटों तक मंत्र पढ़कर झाड़-फूंक किया!

05-Dec-2025 09:52 AM

By RAMESH SHANKAR

BIHAR NEWS : समस्तीपुर सदर अस्पताल में कुछ ऐसा हुआ, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। मरीज के पेट दर्द का इलाज करने आए परिवार के सामने खुला “हाईटेक इलाज”, हुआ जिसमें डॉक्टर चुप, स्टाफ निष्क्रिय और मरीज के पास बैठे भगत ने घंटों तक मंत्र पढ़कर झाड़-फूंक किया!  सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि भगत मरीज के बाजू में बैठा मंत्र पढ़ रहा है और झाड़-फूंक कर रहा है, जबकि न तो डॉक्टर ने हस्तक्षेप किया और न ही नर्सिंग स्टाफ या सुरक्षा कर्मियों ने उसे रोका। लोग यह देखकर आश्चर्य और नाराजगी दोनों महसूस कर रहे हैं।


समस्तीपुर सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने लोगों को चौंका दिया है। यह घटना तब हुई जब इमरजेंसी वार्ड के भीतर एक कथित भगत (झाड़-फूंक से इलाज करने वाला) ने खुलेआम मरीज का इलाज करने का प्रयास किया। पूरा वाकया सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि भगत मरीज के पास बैठकर मंत्र पढ़ रहा है और झाड़-फूंक कर रहा है। इस दौरान न तो नर्सिंग स्टाफ ने उसे रोका और न ही सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप किया।


मिली जानकारी के अनुसार, इस घटना का शिकार महिला मरीज फूलो देवी हुईं, जो मुक्तापुर थाना क्षेत्र के चकदौलतपुर गांव की निवासी हैं और रामप्रीत पंडित की पत्नी हैं। परिजनों ने बताया कि उन्हें पेट दर्द की शिकायत थी, जिस पर वे उसे समस्तीपुर सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने आवश्यक उपचार किया, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। इसी बीच परिजन अंधविश्वास में पड़ गए और स्थानीय भगत को बुला लिया।


इमरजेंसी वार्ड में भगत ने घंटों तक मंत्र पढ़ते हुए और झाड़-फूंक करते हुए मरीज का “इलाज” जारी रखा। इस दौरान अस्पताल में मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन भी इस दृश्य को आश्चर्य और डर के मिश्रित भाव में देखते रहे। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की गतिविधि को अनुमति देना और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा इसे अनदेखा करना बेहद गंभीर लापरवाही है।


स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है। अस्पताल प्रशासन द्वारा उचित निगरानी न होने के कारण यह वाकया संभव हो पाया। वार्ड के भीतर सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ की तत्परता और मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।


सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ दिख रहा है कि भगत न केवल मरीज के पास बैठा था बल्कि उसने पूरे वार्ड में अपनी गतिविधि को स्वतंत्र रूप से अंजाम दिया। वीडियो में नर्सिंग स्टाफ और गार्ड की लापरवाही भी स्पष्ट रूप से दिख रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का अंधविश्वास मरीजों और उनके परिजनों के लिए खतरे का सबब बन सकता है और अस्पताल जैसे स्थान पर इसका होना पूरी तरह अनुचित है।


वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस घटना की गंभीरता से जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका यह भी कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।


इस मामले में सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश ने बताया कि घटना के बाद सुरक्षा में लगे सभी कर्मियों को तलब किया गया है। उन्होंने साफ किया कि अस्पताल परिसर में इस तरह का वाकया बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन इस तरह की लापरवाही को गंभीरता से ले रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


इस पूरी घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि समाज में अंधविश्वास अब भी जड़ें जमाए हुए हैं। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ केवल इलाज तक ही सीमित नहीं रह सकते, बल्कि उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी तरह की गैरकानूनी और असुरक्षित गतिविधि उनके नियंत्रण में रहे। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता और सुरक्षा मानकों को कड़ा करने की मांग को भी जोर दिया है।


इस प्रकार, समस्तीपुर सदर अस्पताल में हुए इस वाकये ने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो के बाद मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है। अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे इस घटना को गंभीरता से लें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।