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13-Jan-2026 03:18 PM
By RAMESH SHANKAR
SAMASTIPUR: दो साल बीत जाने के बावजूद सांसद निधि (MPLADS) से एक भी रुपये खर्च नहीं करने वाले छह सांसदों के नाम सामने आए हैं। इस सूची में देश की सबसे युवा सांसद और समस्तीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी का नाम भी शामिल है। समस्तीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे एमपी फंड खर्च न किए जाने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सांसद निधि खर्च करना उनका निजी अधिकार है और वे इसे विपक्ष के दबाव में खर्च नहीं करेंगी।
उन्होंने कहा कि एमपी फंड से विकास कार्यों का निर्णय उनकी पार्टी और एनडीए कार्यकर्ताओं की सहमति से लिया जाएगा। जब कार्यकर्ता तय करेंगे कि किस क्षेत्र में और किस मद में राशि खर्च की जानी है, तभी फंड का उपयोग किया जाएगा। शांभवी चौधरी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि विकास को लेकर एक झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है, जो सफल नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि अगर विकास नहीं हुआ होता, तो पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए को इतनी बड़ी जीत नहीं मिलती।
दरअसल, वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद 18वीं लोकसभा का गठन हुआ था। अब दूसरा वित्तीय वर्ष पूरा होने वाला है। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूल, सड़क, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए फंड उपलब्ध कराया गया। लेकिन बिहार के सांसदों का रिपोर्ट कार्ड चौंकाने वाला सामने आया है। बिहार के कुल 40 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक विकास कार्यों के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं किया है। इनमें से 5 सांसद एनडीए गठबंधन से जुड़े हुए हैं, जिससे विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है।
गौरतलब है कि MPLADS (Members of Parliament Local Area Development Scheme) के तहत प्रत्येक सांसद को सालाना 5 करोड़ रुपये दिए जाते हैं। इस तरह 5 साल में एक सांसद को कुल 25 करोड़ रुपये मिलते हैं। बिहार के 40 सांसदों को 5 वर्षों में लगभग 1000 करोड़ रुपये विकास कार्यों के लिए मिलने हैं। अब तक प्रत्येक सांसद को करीब 9 करोड़ 80 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के सांसदों ने अब तक केवल 137 करोड़ 69 लाख रुपये ही खर्च किए हैं, जबकि 394 करोड़ 46 लाख रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। खर्च के मामले में बिहार देश में काफी पीछे नजर आ रहा है।
राजनीतिक दलों की स्थिति की बात करें तो बिहार के 40 सांसदों में बीजेपी और जदयू के सबसे अधिक 12-12 सांसद हैं। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) के 5, राजद के 4, कांग्रेस के 3, सीपीआई (एमएल) के 2, हम के 1 और एक अन्य सांसद शामिल हैं। एमपी फंड से एक भी रुपये खर्च न करने वाले सांसदों की सूची में पहला नाम राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी और पाटलिपुत्र से सांसद मीसा भारती का है। उन्होंने न तो कोई राशि खर्च की है और न ही किसी विकास योजना का प्रस्ताव दिया है।
मीसा भारती के अलावा एनडीए के पांच सांसद इस सूची में शामिल हैं। इनमें बीजेपी के तीन सांसद—सारण से राजीव प्रताप रूडी, पश्चिम चंपारण से संजय जायसवाल और नवादा से विवेक ठाकुर शामिल हैं। वहीं जदयू से मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और लोजपा (रामविलास) से समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी का नाम भी शामिल है, जिन्होंने अब तक अपने क्षेत्र के विकास के लिए सांसद निधि से कोई खर्च नहीं किया है।