Bihar Teacher news : बिहार में शिक्षक बनना अब आसान नहीं! 100 अंकों की मेरिट और इंटरव्यू के बाद ही मिलेगी नौकरी; जानिए पूरी चयन प्रक्रिया BIHAR NEWS : बिहार की 1 करोड़ जीविका दीदियों को मिलेगा बीमा कवरेज! सिर्फ ₹20–₹436 में 4 लाख तक का फायदा बिहार में बड़ा फैसला! सरकार ने इन अफसर और कर्मचारियों के ट्रांसफर पर लगा दी रोक, अब 2027 तक नहीं होगा तबादला; जानें पूरा अपडेट BIHAR NEWS : पटना समेत बिहार में बुधवार को तेज आंधी-बारिश का अलर्ट, हवा की रफ्तार 60 किमी/घंटा तक वंदे भारत पर पत्थर मारने वाले की ट्रेन में लगे CCTV फुटेज से हुई पहचान, गिरफ्तारी के बाद नालंदा के अजय को भेजा गया फुलवारी जेल वैशाली में साली से शादी की जिद्द पर मोबाइल टावर पर चढ़ गया युवक, घंटों चला हाई वोल्टेज ड्रामा IIT बिहटा और फाउंडेशन एकेडमी विवाद, CBSE ने तत्काल प्रभाव से स्कूल की मान्यता रद्द किया...जारी हुआ आदेश प्रेमिका से बियाह नहीं होने पर प्रेमी बन गया शोले का वीरू, मोबाइल टावर पर चढ़कर बसंती से शादी की करने लगा जिद्द गर्ल फ्रेंड को बाइक सिखाना पड़ गया महंगा: 70 के स्पीड में प्रेमिका ने ट्रक को ठोका, बाल-बाल बची दोनों की जान मुजफ्फरपुर से लापता बंगाल का मजदूर 6 साल बाद पुणे में मिला, पुलिस ने ऐसे सुलझाई गुत्थी
20-May-2025 08:26 AM
By First Bihar
Saudi Arabia: सऊदी अरब के यानबू शहर में सेंडन इंटरनेशनल कंपनी में काम करने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के 300 से अधिक भारतीय मजदूर पिछले आठ महीनों से गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इनमें गोपालगंज, सिवान, और अन्य जिलों के मजदूर शामिल हैं, जो बिना वेतन, अपर्याप्त भोजन, और अमानवीय हालात में जीने को मजबूर हैं। मजदूरों ने वीडियो के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, और विदेश मंत्रालय से वतन वापसी की गुहार लगाई है। भारतीय दूतावास से संपर्क के बावजूद कोई ठोस मदद नहीं मिली है, जिससे उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है।
गोपालगंज के मांझा प्रखंड के कविलाशपुर गांव के शाह आलम उन मजदूरों में से एक हैं। पांच साल पहले रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए शाह ने वहां से कमाए पैसे से गांव में मकान बनवाया। कर्ज चुकाने और शादी की तैयारी के लिए वे और मेहनत करना चाहते थे, लेकिन आठ महीने से वेतन न मिलने और कंपनी द्वारा छुट्टी न देने से उनकी शादी टल गई। शाह के पिता इम्तेयाज आलम और मां शायदा खातून ने बताया कि उनका बेटा परिवार का एकमात्र कमाने वाला है। मां ने रोते हुए कहा, “ईद के बाद शादी तय थी, लेकिन अब सब रुक गया। सरकार से हाथ जोड़कर विनती है, मेरे बेटे को वापस लाएं।”
शाह आलम और अन्य मजदूरों ने वीडियो में बताया कि सेंडन इंटरनेशनल कंपनी ने न केवल उनका वेतन रोका है, बल्कि पर्याप्त भोजन और चिकित्सा सुविधाएं भी बंद कर दी हैं। मजदूर चावल और दाल खाकर गुजारा कर रहे हैं। कंपनी ने उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए हैं और घर लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही। मजदूरों ने भारतीय दूतावास को ईमेल और फोन के जरिए कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। गोपालगंज के फतेहपुर के दिलीप चौहान, दहीभत्ता के शलेश कुमार, धमापाकड़ के बैजनाथ साह, बालेपुर बथुआ के ओमप्रकाश, और सिवान के कई मजदूर भी इसी संकट में हैं।
सेंडन इंटरनेशनल, जो 1994 में स्थापित एक निर्माण और सेवा कंपनी है, तेल, गैस, उर्वरक, और बिजली क्षेत्रों में काम करती है। इसका मुख्यालय यानबू में है। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी ने उन्हें कैदियों जैसी जिंदगी जीने पर मजबूर किया है। आठ महीने से वेतन न मिलने से उनके सामने भोजन और बुनियादी जरूरतों का संकट है। कुछ मजदूरों ने बताया कि उन्हें 55,000 रुपये कमीशन देकर सऊदी लाया गया था, लेकिन वादे के मुताबिक न वेतन मिला और न ही सुविधाएं।
गोपालगंज के श्रम अधीक्षक सुबोध कुमार ने पुष्टि की कि फंसे मजदूरों के नियोजक की पहचान कर ली गई है। विभागीय स्तर पर उनकी वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब में भारतीय दूतावास को इस मामले की जानकारी दी गई है। बिहार सरकार ने भी मजदूरों की सुरक्षित वापसी के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है।