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30-Jun-2025 12:28 PM
By RITESH HUNNY
Bihar News: बिहार के सहरसा में चुनाव में चालबाजी एक मुखिया को भारी पड़ गई। शपथ पत्र में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र लगाकर चुनाव जीतने वाले बनमा ईटहरी प्रखंड अंतर्गत सहुरिया पंचायत के वर्तमान मुखिया मो. ईशा को अपने पद से हाथ धोना पड़ा है। निर्वाचन आयोग ने मुखिया को अयोग्य घोषित करते हुए पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया है।
दरअसल, यह कार्रवाई राज्य निर्वाचन आयोग ने वादी ठढिया, सलखुआ प्रखंड के निवासी सुभाष कुमार की शिकायत पर की है। आयोग ने बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 135 एवं 138(2) के तहत दोषी पाते हुए 25 जून 2025 को मो. ईशा को मुखिया पद से हटाने का आदेश जारी किया था।
आरोप है कि मो. ईशा मूल रूप से शेख जाति से हैं, जो कि सामान्य मुस्लिम वर्ग में आता है। बावजूद इसके, उन्होंने तेली (मुस्लिम) जाति का फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाया और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़कर सहुरिया पंचायत के मुखिया बने। शिकायतकर्ता के वकील ने आयोग को बताया कि मो. ईशा ने आरक्षण का अनुचित लाभ लेकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया। इस पर आयोग ने वादी के आरोपों को सत्य पाते हुए कड़ी कार्रवाई की।
राज्य निर्वाचन आयोग ने बनमा ईटहरी प्रखंड विकास पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि आयोग के आदेश की प्रति दोनों पक्षों को 24 घंटे के भीतर तामिल कराई जाए। राज्य स्तरीय कास्ट स्क्रूटनी कमिटी की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि तत्कालीन बनमा ईटहरी अंचलाधिकारी और संबंधित राजस्व कर्मचारी ने गलत प्रमाण-पत्र जारी करने में भूमिका निभाई। आयोग ने जिला पदाधिकारी सह पंचायत निर्वाचन पदाधिकारी को इन दोनों के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि मो. ईशा द्वारा गलत शपथ-पत्र और सूचना के आधार पर चुनाव लड़ना बिहार पंचायत राज अधिनियम की धारा-125 का उल्लंघन है। ऐसे में उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध साक्ष्यों सहित अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की जाए और रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए। इस पूरे मामले पर सहरसा के डीएम दीपेश कुमार ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिल रही है और जो भी निर्देश आयोग से प्राप्त होंगे, उनका कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा।