पटना में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ फिर गरजेगा जिला प्रशासन का बुलडोजर, इस दिन से शुरू होगा विशेष अभियान पटना में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ फिर गरजेगा जिला प्रशासन का बुलडोजर, इस दिन से शुरू होगा विशेष अभियान ‘गुंडों के दम पर चल रही TMC’, गिरिराज सिंह का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला हर्ष फायरिंग केस में बुरे फंसे जीतनराम मांझी के करीबी, HAM प्रवक्ता दानिश रिजवान के खिलाफ केस दर्ज हर्ष फायरिंग केस में बुरे फंसे जीतनराम मांझी के करीबी, HAM प्रवक्ता दानिश रिजवान के खिलाफ केस दर्ज अब पहले से भी अधिक महंगी और लग्जरी गाड़ियों से घूमेंगे बिहार के मंत्री और अधिकारी, सरकार ने जारी किया आदेश अब पहले से भी अधिक महंगी और लग्जरी गाड़ियों से घूमेंगे बिहार के मंत्री और अधिकारी, सरकार ने जारी किया आदेश ‘देश में दो ही खलनायक- पहला मुसलमान और दूसरा सवर्ण’, बृजभूषण शरण सिंह के बयान से गरमाई सियासत ‘देश में दो ही खलनायक- पहला मुसलमान और दूसरा सवर्ण’, बृजभूषण शरण सिंह के बयान से गरमाई सियासत चोरनिया कांड में बड़ा एक्शन: SHO समेत पूरी टीम सस्पेंड, लापरवाही बरतने पर SSP ने की कार्रवाई
29-Dec-2025 11:53 AM
By RITESH HUNNY
Bihar News: सरकारें बदलीं और मंत्री भी बदले लेकिन नहीं बदली तो बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था। दावे तो राज्य के लोगों को वर्ल्ड क्लास हेल्थ सिस्टम उपलब्ध कराने के होते हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। बिहार के सहरसा सदर अस्पताल में इलाज की बदहाली सामने आई है। करंट से झुलसे युवक का इलाज डॉक्टर की जगह परिजनों ने चप्पल से किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दरअसल, बिहार का सहरसा सदर अस्पताल इन दिनों लगातार सुर्खियों में है। कोसी क्षेत्र के मॉडल अस्पताल कहे जाने वाले इस संस्थान में इलाज की बदहाली के कारण मरीजों की जान तक खतरे में पड़ रही है। हाल ही में अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करंट से झुलसे एक युवक का इलाज डॉक्टरों द्वारा करने के बजाय उसके परिजनों को अमानवीय तरीके से चप्पल से पीटकर करते हुए देखा गया। इस घटना का वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, बरियाही बस्ती निवासी मंजीत कुमार नामक युवक को काम के दौरान बिजली का करंट लग गया था। इसके बाद परिजन आनन-फानन में उसे बेहतर इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन अस्पताल में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं थे। इलाज में हो रही देरी से घबराए परिजनों ने ग्रामीण मान्यता के तहत युवक को चप्पल से पीट-पीटकर इलाज करना शुरू कर दिया।
इस दौरान अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया और परिजन लगातार यह अमानवीय तरीका अपनाते रहे। घायल युवक और उसके परिजनों का कहना है कि करंट लगने के बाद अस्पताल लाया गया, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में ऐसा करना पड़ा।
बाद में अस्पताल की ओर से केवल पानी चढ़ाया गया और इंजेक्शन दिया गया, लेकिन किसी डॉक्टर ने मरीज को देखने तक नहीं आया। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इलाज के लिए मरीज यहां लाए जाते हैं, लेकिन उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है।
इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन रतन झा ने बताया कि उन्हें भी इस घटना की जानकारी मिली है। मामले की जांच के लिए एक बोर्ड गठित किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।