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26-Jan-2026 02:42 PM
By First Bihar
IAS IPS IFS Posting Rules : केंद्र सरकार ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के जरिए चयनित होने वाले IAS, IPS और IFoS अधिकारियों की कैडर अलॉटमेंट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। इस नई व्यवस्था को “UPSC Cadre Allocation Policy 2026” नाम दिया गया है, जो CSE 2026 से लागू होगी। नई नीति का उद्देश्य कैडर अलॉटमेंट को ज्यादा संतुलित, पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाना है, ताकि लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टताओं और विवादों को खत्म किया जा सके।
अब तक 2017 से लागू प्रणाली में जियोग्राफिकल जोन और इंसाइडर–आउटसाइडर बैलेंस के आधार पर कैडर अलॉटमेंट होता था। इसका मकसद यह था कि अधिकारी केवल अपने गृह राज्य तक सीमित न रहें और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने का अवसर मिले। लेकिन समय के साथ इस व्यवस्था में कई तरह के भ्रम और असमानताएं सामने आईं। इन्हीं को दूर करने के लिए नई कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी लाई गई है।
नई कैडर अलॉटमेंट नीति की मुख्य बातें
नई नीति के तहत मेरिट को प्राथमिक आधार बनाया गया है। अब किसी भी कैंडिडेट को कैडर अलॉटमेंट पूरी तरह उसकी रैंक, उपलब्ध वैकेंसी और तय नियमों के अनुसार मिलेगा। होम स्टेट पोस्टिंग यानी अपने ही राज्य में कैडर मिलने के नियम अब पहले से ज्यादा सख्त कर दिए गए हैं। किसी उम्मीदवार को अपने राज्य में पोस्टिंग तभी मिलेगी, जब उस राज्य में इंसाइडर वैकेंसी उपलब्ध हो और कैंडिडेट ने इसके लिए पहले से अपनी सहमति दी हो।
इसके साथ ही, सभी राज्यों और कैडरों की वैकेंसी हर साल 1 जनवरी को मौजूद कैडर गैप के आधार पर तय की जाएगी। इसका मतलब यह है कि बाद में भेजी गई या देर से आई मांगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे वैकेंसी निर्धारण में मनमानी की गुंजाइश कम होगी और प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी।
EWS और PwBD को लेकर बड़ा बदलाव
नई नीति में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) की सीटों को कैडर अलॉटमेंट में अलग श्रेणी नहीं माना जाएगा। इन्हें Unreserved (जनरल) कैटेगरी में ही गिना जाएगा। इससे लंबे समय से चला आ रहा कन्फ्यूजन खत्म हो जाएगा और कैडर रोस्टर ज्यादा स्पष्ट होगा।
वहीं PwBD (दिव्यांग) उम्मीदवारों को कैडर अलॉटमेंट में पहली प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके लिए अतिरिक्त सीटें भी बनाई जा सकती हैं, ताकि उनकी पोस्टिंग में किसी तरह की दिक्कत न हो। यह कदम समावेशी प्रशासन की दिशा में अहम माना जा रहा है।
इंसाइडर–आउटसाइडर सिस्टम और सख्त हुआ
नई नीति में इंसाइडर और आउटसाइडर सिस्टम को लेकर नियम और ज्यादा साफ किए गए हैं। अगर किसी राज्य में किसी विशेष कैटेगरी का इंसाइडर कैंडिडेट उपलब्ध नहीं होता है, तो उस सीट को सीट एक्सचेंज सिस्टम के तहत दूसरी कैटेगरी के उम्मीदवार से भरा जाएगा। इससे किसी भी सीट के खाली रहने की संभावना कम होगी।
इसके अलावा, अगर किसी उम्मीदवार को आउटसाइडर पोस्टिंग के तहत गलती से उसका ही गृह राज्य मिल जाता है, तो उस अलॉटमेंट को तुरंत बदल दिया जाएगा। इससे नियमों की सख्ती और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होंगी।
चार ग्रुप में बंटे राज्य और कैडर
नई कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी में पूरे देश के राज्यों और कैडरों को चार ग्रुप में बांटा गया है। आउटसाइडर पोस्टिंग इन्हीं ग्रुप्स के बीच तय की जाएगी।
ग्रुप 1: AGMUT, आंध्र प्रदेश, असम–मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़
ग्रुप 2: गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश
ग्रुप 3: महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु
ग्रुप 4: तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
इसके साथ ही होम पोस्टिंग के लिए ‘साइकिल सिस्टम’ लागू किया गया है, जिसमें हर 25 रैंक को एक साइकिल माना जाएगा। इससे कैडर अलॉटमेंट में संतुलन बना रहेगा और किसी एक राज्य को ज्यादा या कम फायदा नहीं होगा।
क्यों अहम है नई नीति?
पुराने कैडर अलॉटमेंट नियमों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और उनकी जगह यह नया सिस्टम लागू किया गया है, जिसे पहले से ज्यादा सख्त, स्पष्ट और पारदर्शी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सिविल सेवाओं में फेयरनेस बढ़ेगी और योग्य उम्मीदवारों को उनके मेरिट के अनुसार अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर, UPSC Cadre Allocation Policy 2026 सिविल सेवा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार है, जो न केवल प्रशासनिक संतुलन बनाएगा, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में अनुभवी और सक्षम अधिकारियों की समान भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा।
IAS IPS IFS Posting Rules : केंद्र सरकार ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के जरिए चयनित होने वाले IAS, IPS और IFoS अधिकारियों की कैडर अलॉटमेंट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। इस नई व्यवस्था को “UPSC Cadre Allocation Policy 2026” नाम दिया गया है, जो CSE 2026 से लागू होगी। नई नीति का उद्देश्य कैडर अलॉटमेंट को ज्यादा संतुलित, पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाना है, ताकि लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टताओं और विवादों को खत्म किया जा सके।
अब तक 2017 से लागू प्रणाली में जियोग्राफिकल जोन और इंसाइडर–आउटसाइडर बैलेंस के आधार पर कैडर अलॉटमेंट होता था। इसका मकसद यह था कि अधिकारी केवल अपने गृह राज्य तक सीमित न रहें और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने का अवसर मिले। लेकिन समय के साथ इस व्यवस्था में कई तरह के भ्रम और असमानताएं सामने आईं। इन्हीं को दूर करने के लिए नई कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी लाई गई है।
नई कैडर अलॉटमेंट नीति की मुख्य बातें
नई नीति के तहत मेरिट को प्राथमिक आधार बनाया गया है। अब किसी भी कैंडिडेट को कैडर अलॉटमेंट पूरी तरह उसकी रैंक, उपलब्ध वैकेंसी और तय नियमों के अनुसार मिलेगा। होम स्टेट पोस्टिंग यानी अपने ही राज्य में कैडर मिलने के नियम अब पहले से ज्यादा सख्त कर दिए गए हैं। किसी उम्मीदवार को अपने राज्य में पोस्टिंग तभी मिलेगी, जब उस राज्य में इंसाइडर वैकेंसी उपलब्ध हो और कैंडिडेट ने इसके लिए पहले से अपनी सहमति दी हो।
इसके साथ ही, सभी राज्यों और कैडरों की वैकेंसी हर साल 1 जनवरी को मौजूद कैडर गैप के आधार पर तय की जाएगी। इसका मतलब यह है कि बाद में भेजी गई या देर से आई मांगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे वैकेंसी निर्धारण में मनमानी की गुंजाइश कम होगी और प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी।
EWS और PwBD को लेकर बड़ा बदलाव
नई नीति में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) की सीटों को कैडर अलॉटमेंट में अलग श्रेणी नहीं माना जाएगा। इन्हें Unreserved (जनरल) कैटेगरी में ही गिना जाएगा। इससे लंबे समय से चला आ रहा कन्फ्यूजन खत्म हो जाएगा और कैडर रोस्टर ज्यादा स्पष्ट होगा।
वहीं PwBD (दिव्यांग) उम्मीदवारों को कैडर अलॉटमेंट में पहली प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर उनके लिए अतिरिक्त सीटें भी बनाई जा सकती हैं, ताकि उनकी पोस्टिंग में किसी तरह की दिक्कत न हो। यह कदम समावेशी प्रशासन की दिशा में अहम माना जा रहा है।
इंसाइडर–आउटसाइडर सिस्टम और सख्त हुआ
नई नीति में इंसाइडर और आउटसाइडर सिस्टम को लेकर नियम और ज्यादा साफ किए गए हैं। अगर किसी राज्य में किसी विशेष कैटेगरी का इंसाइडर कैंडिडेट उपलब्ध नहीं होता है, तो उस सीट को सीट एक्सचेंज सिस्टम के तहत दूसरी कैटेगरी के उम्मीदवार से भरा जाएगा। इससे किसी भी सीट के खाली रहने की संभावना कम होगी।
इसके अलावा, अगर किसी उम्मीदवार को आउटसाइडर पोस्टिंग के तहत गलती से उसका ही गृह राज्य मिल जाता है, तो उस अलॉटमेंट को तुरंत बदल दिया जाएगा। इससे नियमों की सख्ती और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होंगी।
चार ग्रुप में बंटे राज्य और कैडर
नई कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी में पूरे देश के राज्यों और कैडरों को चार ग्रुप में बांटा गया है। आउटसाइडर पोस्टिंग इन्हीं ग्रुप्स के बीच तय की जाएगी।
ग्रुप 1: AGMUT, आंध्र प्रदेश, असम–मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़
ग्रुप 2: गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश
ग्रुप 3: महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु
ग्रुप 4: तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
इसके साथ ही होम पोस्टिंग के लिए ‘साइकिल सिस्टम’ लागू किया गया है, जिसमें हर 25 रैंक को एक साइकिल माना जाएगा। इससे कैडर अलॉटमेंट में संतुलन बना रहेगा और किसी एक राज्य को ज्यादा या कम फायदा नहीं होगा।
क्यों अहम है नई नीति?
पुराने कैडर अलॉटमेंट नियमों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और उनकी जगह यह नया सिस्टम लागू किया गया है, जिसे पहले से ज्यादा सख्त, स्पष्ट और पारदर्शी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सिविल सेवाओं में फेयरनेस बढ़ेगी और योग्य उम्मीदवारों को उनके मेरिट के अनुसार अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर, UPSC Cadre Allocation Policy 2026 सिविल सेवा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार है, जो न केवल प्रशासनिक संतुलन बनाएगा, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में अनुभवी और सक्षम अधिकारियों की समान भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा।