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06-Feb-2026 09:15 AM
By First Bihar
Bihar police : मुजफ्फरपुर जिले में पुलिस विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष तुर्की समेत दो पुलिस पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई कर्तव्य में गंभीर लापरवाही, अनियमितता और संदिग्ध आचरण के आरोप में की गई है। वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मुजफ्फरपुर द्वारा किए गए औचक निरीक्षण और अन्य जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया।
जानकारी के अनुसार, वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना तुर्की का औचक निरीक्षण किया गया था। इस दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पश्चिमी-2 की निरीक्षण रिपोर्ट में भी कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि थाना तुर्की के थानाध्यक्ष पु०अ०नि० संदीप कुमार महतो ने बिना किसी लिखित परिवाद या कानूनी आधार के एक व्यक्ति को थाना में बंद कर रखा था। यह पुलिस नियमों और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना गया है। इसके अलावा, न्यायालय से जारी वारंट और कुर्की जैसे महत्वपूर्ण मामलों को भी लंबित रखा गया था, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) द्वारा सौंपे गए प्रतिवेदन में भी थाना तुर्की की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट में बताया गया कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम से जुड़े मामलों में जब्त किए गए पदार्थों की सुरक्षा व्यवस्था में भारी लापरवाही बरती गई थी। जब्त शराब या अन्य प्रतिबंधित सामग्री की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है, लेकिन इसमें गंभीर चूक पाई गई। इन सभी आरोपों को कर्तव्य के प्रति लापरवाही, अकर्मण्यता और संदिग्ध आचरण मानते हुए संदीप कुमार महतो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें सामान्य जीवन-यापन भत्ता दिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, पुलिस महानिदेशक बिहार के निर्देश पर पाल थाना कांड संख्या 334/25 की समीक्षा भी वरीय पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरपुर द्वारा की गई। इस मामले की जांच में भी गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। यह मामला हत्या जैसे गंभीर और संवेदनशील अपराध से जुड़ा हुआ है। समीक्षा में पाया गया कि घटना के सात महीने बीत जाने के बावजूद अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। इतना ही नहीं, मामले में आरोपियों के खिलाफ वारंट भी प्राप्त नहीं किया गया था और जख्मी स्वतंत्र साक्षी का बयान भी दर्ज नहीं किया गया था।
जांच रिपोर्ट में इन कमियों को पुलिस की गंभीर लापरवाही माना गया। हत्या जैसे संवेदनशील मामले में समय पर कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है। इन गंभीर त्रुटियों के आधार पर पु०अ०नि० चंदन कुमार को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन्हें भी निलंबन अवधि में सामान्य जीवन-यापन भत्ता दिया जाएगा।
पुलिस प्रशासन ने इस कार्रवाई को विभागीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में जरूरी कदम बताया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पुलिस पदाधिकारी द्वारा कर्तव्य में लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी इस तरह की लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जवाबदेही तय करना आवश्यक है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि कानून व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए सभी पुलिस कर्मियों को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ पालन करना होगा।