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15-Jan-2026 01:52 PM
By FIRST BIHAR
Bihar New Railway Project: सीतामढ़ी–जयनगर–निर्मली 188 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित नई रेल लाइन परियोजना को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है। वर्ष 2008-09 में स्वीकृत इस परियोजना को रेलवे बोर्ड ने 2019 में रोक दिया था। अब 29 सितंबर 2025 को इसे डी-फ्रीज कर दिया गया है।
पूर्व मध्य रेलवे (निर्माण संगठन) के महेंद्रुघाट, पटना कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराकर डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) महबूब आलम ने पत्र में स्पष्ट किया है कि लंबे समय से रुकी इस परियोजना को अब दोबारा गति दी जा रही है।
डीपीआर तैयार होने के बाद आगे की निर्माण प्रक्रिया का रास्ता साफ होगा और नया टेंडर भी आमंत्रित कर दिया गया है। बिहार सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के साथ हुई बातचीत में भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने की पुष्टि की गई है।
इस रेल लाइन के शुरू होने से सुपौल, मधुबनी और सीतामढ़ी समेत पूरे मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। वर्तमान में इन इलाकों में रेल नेटवर्क सीमित है, जिससे व्यापार और आवागमन में कठिनाइयां होती हैं। नई रेल लाइन बनने के बाद यात्रा आसान होगी, कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापार को बड़ा बाजार मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन पर भी कुछ हद तक अंकुश लगेगा।
सुपौल जिले के ललितग्राम से वीरपुर तक 22 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को भी हरी झंडी मिल चुकी है। इसके लिए फाइनल लोकेशन सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया है। रेलवे बोर्ड ने 9 सितंबर 2025 को इस परियोजना के सर्वे को मंजूरी दी थी और 9 दिसंबर 2025 को लागत अनुमान को स्वीकृति मिली।
यह रेलखंड नेपाल सीमा तक आवागमन को सुगम बनाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सीमावर्ती विकास को नई गति मिलेगी। ललितग्राम–वीरपुर रेल लाइन सुपौल जिले के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह न केवल जिले को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देगी, बल्कि भारत-नेपाल सीमा के पास आर्थिक गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
करीब दो दशक से चर्चा में रही यह परियोजना अब डीपीआर और सर्वे प्रक्रिया पूरी होते ही वास्तविक निर्माण की ओर बढ़ेगी। यदि योजना के अनुसार कार्य संपन्न होता है, तो आने वाले वर्षों में यह रेल लाइन बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है।