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18-Jan-2026 01:32 PM
By First Bihar
Shambhu Girls Hostel : राजधानी पटना के मुन्नाचक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद मामले में हर दिन नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इसी बीच आज हॉस्टल के बाहर बड़ी संख्या में छात्राएं और उनके परिजन जमा हो गए। छात्राओं ने आरोप लगाया कि उनके सामान को हॉस्टल में बंद रखा गया है और उन्हें वापस नहीं दिया जा रहा है। इस बात को लेकर छात्राएं और परिजन लगातार हंगामा कर रहे हैं।
छात्राओं का कहना है कि उनका NEET का एग्जाम 2 फरवरी से शुरू हो रहा है, लेकिन उनके किताबें, नोट्स, लेबटॉप और अन्य जरूरी सामग्री हॉस्टल के कमरे में बंद पड़ी है। ऐसे में उनकी परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो रही है। छात्राओं ने कहा कि उन्होंने हॉस्टल में अपनी मेहनत से पढ़ाई की है और उनका पूरा भविष्य इसी परीक्षा पर निर्भर है, लेकिन हॉस्टल प्रशासन उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे उनका सामान कोई अपराध हो। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि उनका सारा सामान तुरंत वापस दिया जाए, ताकि वे अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर सकें।
हॉस्टल के बाहर मौजूद छात्राओं ने कहा कि अगर उनका सामान वापस नहीं मिला तो वे अपने परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ भविष्य के लिए भी चिंतित हैं। कई छात्राएं रोते हुए कह रही थीं कि उनके पास अभी तक पढ़ाई की तैयारी के लिए कोई किताबें ही नहीं हैं, और समय कम होने के कारण उन्हें भारी तनाव हो रहा है।
परिजनों का कहना है कि वे अपनी बेटियों को ऐसे हॉस्टल में पढ़ने नहीं भेजेंगे। उन्होंने कहा कि अगर बेटियों की सुरक्षा ही नहीं हो सकती तो उन्हें पढ़ाई के लिए पटना लाने का कोई फायदा नहीं है। परिजनों का गुस्सा इस बात पर भी है कि अब पटना के किसी भी हॉस्टल पर उनका भरोसा खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि बिहार के अलग-अलग जिलों से छात्राएं अपने परिजनों के साथ हॉस्टल पहुंची थीं और सभी का यही कहना था कि वे अपनी बेटियों को अब पटना में नहीं रखेंगे।
मीडिया से बातचीत में परिजनों ने यह भी कहा कि उनकी बेटियों का करियर खराब हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा तो देती है, लेकिन जब बेटी की सुरक्षा की बात आती है तो कहीं भी भरोसा नहीं रहता। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की और हॉस्टल के मामले में सख्ती नहीं दिखाई तो भविष्य में और भी कई छात्राओं के साथ ऐसा हो सकता है।
हॉस्टल पहुंची छात्राओं ने मृतका को पहचानने से भी इनकार किया। हालांकि परिजन का कहना है कि वे अपनी बेटी को पटना में नहीं रखेंगे। इसी बीच पुलिस की गैर मौजूदगी भी चर्चा में रही। हॉस्टल के बाहर भारी भीड़ होने के बावजूद पुलिस अधिकारी मौके पर नहीं दिखे। गश्ती दल में शामिल एक सिपाही ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे भीड़ देखकर आए हैं और गश्ती दल का हिस्सा हैं। उन्होंने परिजनों से कहा कि सभी थाना चले जाएं, लेकिन परिजन अपनी जिद पर अड़े रहे और अपने बच्चों का सामान लेकर जाने की मांग करते रहे।
परिजन और छात्राएं जब हॉस्टल से बाहर निकले तो उन्होंने जोरदार हंगामा किया। कई लोग सड़क पर खड़े होकर चिल्ला रहे थे और अपने-अपने बच्चों का सामान वापस लेने की मांग कर रहे थे। कुछ छात्राओं ने कहा कि उनका 2 फरवरी से एग्जाम है और अगर उनका सामान नहीं मिला तो उनकी परीक्षा खराब हो जाएगी। उन्होंने कहा कि उनका भविष्य अधर में है और उन्हें किसी भी तरह की मदद चाहिए।
वहीं, छात्राएं और परिजन जब थाना पहुंचे तो वहां भी हंगामा जारी रहा। मीडिया कर्मियों को थाना में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। परिजन और छात्राएं इस बात से नाराज थे कि उन्हें अपनी बात मीडिया तक पहुंचाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे और भी बड़े स्तर पर आंदोलन कर सकते हैं।
इस बीच मामला अभी भी कई सवालों के घेरे में है। छात्राओं और परिजनों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और उन्हें यह आशंका है कि अगर प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में और भी कई छात्राओं के साथ ऐसी घटना हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने पटना के हॉस्टल सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।