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11-Feb-2026 02:52 PM
By First Bihar
Bihar school : बिहार में अब सरकारी स्कूल और अन्य शैक्षणिक भवनों के निर्माण में लाल ईंटों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। पटना हाई कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण और केंद्र सरकार के निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह अहम आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अब फ्लाई ऐश ईंटों का इस्तेमाल अनिवार्य होगा, जिससे निर्माण कार्य पर्यावरण और जलवायु सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।
कोर्ट ने पश्चिम चंपारण जिले के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि जोगपट्टी रोड स्थित चिमानिया बाजार में निर्माणाधीन 560 बेड वाले आवासीय विद्यालय के प्रोजेक्ट में लाल ईंटों का इस्तेमाल तुरंत बंद कराया जाए। यह आदेश पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 31 दिसंबर 2021 के निर्देशों के अनुरूप है। इन निर्देशों के अनुसार, थर्मल पावर प्लांट के 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी सरकारी निर्माण कार्यों में 100 फीसदी फ्लाई ऐश ईंटों का इस्तेमाल अनिवार्य है।
जस्टिस संदीप कुमार की सिंगल बेंच ने एक ब्रिक्स कंपनी की रिट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने बिहार एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड से भी जवाब मांगा कि पश्चिम चंपारण में रेजिडेंशियल स्कूल की बिल्डिंग में फ्लाई ऐश ईंटों के बजाय लाल ईंटें क्यों इस्तेमाल की गईं।
कॉर्पोरेशन की ओर से पेश वकील गिरिजेश कुमार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे अपने क्लाइंट को सलाह देंगे और आगे निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश ईंटों के पूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
फ्लाई ऐश ईंटें पर्यावरण के लिहाज से लाल ईंटों की तुलना में अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं। यह बिजली घरों से निकलने वाली राख से बनाई जाती हैं, जिससे निर्माण सामग्री का पुन: उपयोग होता है और पर्यावरण पर लाल ईंटों के जलाने से होने वाला नकारात्मक प्रभाव भी कम होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लाई ऐश ईंटें भवन निर्माण में मजबूती, दीर्घायु और तापमान नियंत्रण के लिहाज से भी फायदेमंद हैं।
पटना हाई कोर्ट का यह आदेश राज्य सरकार को यह स्पष्ट संदेश देता है कि सभी निर्माण परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों का पालन अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बिहार में शिक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के मामले में यह कदम महत्वपूर्ण है। अब सभी सरकारी स्कूल, कॉलेज और हॉस्टल निर्माण में पारंपरिक लाल ईंटों का उपयोग पूरी तरह बंद हो जाएगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में राज्य में एक मजबूत संदेश है।