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02-Jan-2026 01:09 PM
By First Bihar
Patna waterbody birds : ठंड के मौसम में राजधानी पटना के प्राकृतिक दृश्य और अधिक जीवंत हो उठते हैं। खासकर उन स्थानों पर जहां जल और हरियाली का अद्भुत संयोजन होता है। राजधानी जलाशय, जो मुख्य सचिवालय के पास स्थित है, इन दिनों विदेशी और स्थानीय प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना बन गया है। इस जलाशय में हजारों पक्षियों की उपस्थिति ने इसे पर्यावरण प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है।
जैसे ही सुबह की धूप फैलती है और शाम ढलती है, जलाशय के चारों ओर पक्षियों की चहचहाहट गूंजती है। ये कलरव न केवल सुनने में मनमोहक है, बल्कि देखने में भी अत्यंत रमणीय है। इस वर्ष ठंड के मौसम की शुरुआत से ही जलाशय में लगभग 4 से 5 हजार प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इस जलाशय का पर्याप्त जलस्तर, स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता दूर-दराज के देशों से आए पक्षियों को आकर्षित कर रही है।
जलाशय के चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण इन पक्षियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल का काम कर रहा है। यहां देखने वाले प्रमुख प्रवासी पक्षियों में कांब डक, लालसर, गडवाल, कूट, पिनटेल, लेसर विसलिंग डक और अन्य कई प्रजातियां शामिल हैं। वहीं, स्थानीय पक्षियों जैसे हाउस क्रो, कॉमन मैना, एशियन कोयल, स्पॉटेड डव और कॉलर्ड डव की भी अच्छी संख्या देखी जा रही है। इन सभी पक्षियों का सामूहिक कलरव जलाशय की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा रहा है।
सबसे खास बात यह है कि इस जलाशय में रूस, चीन, तिब्बत, नॉर्थ यूरोप, ब्राज़ील, ईरान, अफगानिस्तान और उत्तरी अमेरिका जैसे दूर-दराज के देशों से आए पक्षियों की भी उपस्थिति दर्ज की गई है। यह तथ्य दिखाता है कि पटना का यह जलाशय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी पक्षियों के लिए कितना महत्वपूर्ण स्थल बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय में पर्याप्त जलस्तर, प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता और मानव हस्तक्षेप में कमी प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण है।
पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि जलाशय में जल की उपलब्धता से जलीय वनस्पतियों और कीट-पतंगों का प्राकृतिक प्रजनन होता है, जो पक्षियों के लिए मुख्य भोजन स्रोत है। इसके अलावा, शांत और प्राकृतिक वातावरण उन्हें यहां लंबे समय तक ठहरने के लिए प्रेरित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जलाशय का संरक्षण इसी तरह बना रहता है, तो आने वाले वर्षों में यह और अधिक विदेशी और स्थानीय पक्षियों को आकर्षित कर सकता है।
राजधानी जलाशय न केवल पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल बन गया है, बल्कि यह प्रकृति प्रेमियों, मॉर्निंग वॉक करने वालों और फोटोग्राफरों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। हर सुबह और शाम लोग दूरबीन और कैमरों के साथ यहां पहुंचते हैं और विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को निहारते हैं। जलाशय की यह गतिविधि स्थानीय लोगों में पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रवासी पक्षियों की यह यात्रा लंबी और चुनौतीपूर्ण होती है। हजारों किलोमीटर की यात्रा तय करने वाले ये पक्षी मौसम और पर्यावरण की अनुकूल परिस्थितियों के आधार पर अपने ठिकानों का चयन करते हैं। इस वर्ष जलाशय में बढ़ी ठंड और जलस्तर की अनुकूलता ने इन्हें पटना में ठहरने के लिए प्रेरित किया है।
इसके अलावा, जलाशय के आसपास का क्षेत्र हरा-भरा होने के कारण पक्षियों को आश्रय और सुरक्षित घोंसले बनाने की सुविधा मिलती है। इस प्रकार, यह जलाशय न केवल प्रवासी पक्षियों की आबादी बढ़ाने में सहायक है, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी सशक्त कर रहा है।
स्थानीय लोगों के लिए यह दृश्य अत्यंत मनोरम है। सुबह और शाम जलाशय में पक्षियों का कलरव और उनकी उड़ान देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। पर्यावरण प्रेमी और फोटोग्राफर यहां आकर विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की तस्वीरें और वीडियो बनाते हैं। यह अनुभव न केवल मन को प्रसन्न करता है, बल्कि बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति लगाव और संवेदनशीलता भी पैदा करता है।
संक्षेप में कहा जाए, तो राजधानी जलाशय इन दिनों प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का आदर्श स्थल बन चुका है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और जल की पर्याप्त उपलब्धता इसे पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण बना रही है। रूस, ब्राज़ील और अन्य देशों से आए इन विदेशी मेहमानों की उपस्थिति न केवल पटना की शोभा बढ़ा रही है, बल्कि यह दर्शाती है कि अगर प्रकृति का संरक्षण सही ढंग से किया जाए, तो शहर भी प्राकृतिक रूप से जीवंत और सुंदर बन सकता है।