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मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: दो लाख तक की मदद के लिए महिलाओं को देने होंगे हज़ारों रुपए, आसान भाषा में समझें पूरा नियम

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को रोजगार और व्यवसाय के लिए ₹2 लाख तक की सहायता मिलेगी। योजना में महिलाओं को अपनी ओर से अंशदान करना जरूरी होगा। जानें किस्त, नियम और पूरी प्रक्रिया।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: दो लाख तक की मदद के लिए महिलाओं को देने होंगे हज़ारों रुपए, आसान भाषा में समझें पूरा नियम

10-Feb-2026 08:17 AM

By First Bihar

Mukhyamantri Mahila Rozgar Yojana : मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को अपना रोजगार या छोटा व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार आर्थिक सहायता दे रही है। इस योजना में महिलाओं को कुल मिलाकर ₹2 लाख तक की मदद मिल सकती है, लेकिन इसके लिए लाभुक महिलाओं को भी अपनी तरफ से कुछ राशि अंशदान के रूप में जमा करनी होगी। ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।


अंशदान करना क्यों जरूरी है

सरकार का उद्देश्य है कि महिलाएं खुद के व्यवसाय को गंभीरता से आगे बढ़ाएं और आर्थिक रूप से मजबूत बनें। इसी कारण योजना में लाभुक महिलाओं को कुछ राशि अपनी तरफ से निवेश करनी होगी। सरकार मानती है कि जब महिलाएं अपनी पूंजी लगाती हैं, तो वे व्यवसाय को ज्यादा जिम्मेदारी से चलाती हैं।


चार किस्तों में मिलेंगे पैसे

इस योजना के तहत महिलाओं को सीधे एक साथ ₹2 लाख नहीं दिए जाएंगे। सरकार यह राशि चार अलग-अलग किस्तों में देगी। हर किस्त के साथ महिलाओं को अपना अंशदान भी करना होगा।


पहली किस्त

योजना के पहले चरण में महिलाओं को ₹10,000 दिए गए हैं। इस राशि के लिए महिलाओं को कोई अंशदान नहीं देना पड़ा है। इस किस्त का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए प्रारंभिक सहायता देना था।


दूसरी किस्त

दूसरे चरण में महिलाओं को ₹20,000 मिलेंगे। इस दौरान लाभुक महिलाओं को अपने व्यवसाय की प्रगति दिखानी होगी। इसके साथ ही कुछ मामलों में महिलाओं को छोटे स्तर पर अपनी ओर से भी निवेश करना होगा।


अतिरिक्त अंशदान और सहायता

योजना में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए ₹5,000-₹5,000 की अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान रखा गया है। हालांकि, इसके लिए महिलाओं को अपने व्यवसाय की स्थिति के आधार पर निर्धारित अंशदान देना होगा।


तीसरी किस्त

तीसरे चरण में महिलाओं को ₹40,000 की सहायता दी जाएगी। इस किस्त के लिए लाभुक महिलाओं को ₹10,000 का अंशदान करना होगा। यानी सरकार के साथ-साथ महिलाओं को भी अपने व्यवसाय में निवेश करना पड़ेगा।


चौथी किस्त

चौथे और अंतिम चरण में महिलाओं को ₹80,000 की राशि दी जाएगी। इस दौरान लाभुक महिलाओं को ₹20,000 का अंशदान करना होगा। इस तरह योजना में महिलाओं द्वारा कुल ₹35,000 तक का निवेश करना जरूरी होगा।


अंतिम चरण में राहत

योजना के अंतिम हिस्से में सरकार द्वारा ₹60,000 की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, जिसमें महिलाओं को कोई अंशदान नहीं करना होगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को व्यवसाय को स्थायी रूप से स्थापित करने में मदद देना है।


एकमुश्त राशि लेने का विकल्प

अगर कोई महिला एक बार में ₹2 लाख की सहायता लेना चाहती है, तो उसे इसके लिए विशेष प्रक्रिया से गुजरना होगा। पहले ग्राम स्तर पर उसके व्यवसाय का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति को भेजा जाएगा। जिला समिति की मंजूरी मिलने के बाद राज्य स्तरीय समिति अंतिम निर्णय लेगी। समिति की अनुशंसा के बाद ही एकमुश्त राशि दी जा सकेगी।


व्यवसाय की जांच के बाद ही अगली किस्त

ग्रामीण विकास विभाग ने साफ किया है कि महिलाओं द्वारा शुरू किए गए व्यवसाय का आकलन करने के बाद ही अगली किस्त जारी की जाएगी। अगर महिलाएं समूह बनाकर व्यवसाय शुरू करती हैं, तो ग्राम संगठन द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा और उसी आधार पर सहायता दी जाएगी।


अन्य योजनाओं से अलग नियम

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिहार लघु उद्यमी योजना का लाभ लेने वाली महिलाओं को इस योजना में आगे अतिरिक्त राशि नहीं दी जाएगी। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा नई महिलाओं को इस योजना का लाभ देना है।


महिलाओं के लिए बड़ा अवसर

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि इसमें अंशदान की शर्त रखी गई है, लेकिन इससे महिलाओं को अपने व्यवसाय में भागीदारी और जिम्मेदारी दोनों मिलती है। यह योजना खासकर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय बढ़ाने का अच्छा अवसर बन रही है।