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07-Jan-2026 08:45 AM
By First Bihar
Bihar crime news : मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर थाना परिसर से जीएसटी चोरी के आरोप में जब्त किए गए दो ट्रकों के रहस्यमय ढंग से गायब होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। दोनों ट्रकों पर तस्करी का माल लदा था और इन्हें जीएसटी अधिकारियों द्वारा जब्त कर थाना अभिरक्षा में रखा गया था। इस गंभीर लापरवाही और संभावित मिलीभगत के मामले में दारोगा उमाशंकर सिंह के आवेदन पर बीते दो जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई है।
एफआईआर के अनुसार, जीएसटी विभाग की टीम ने 31 दिसंबर को मुजफ्फरपुर से उत्तर प्रदेश ले जाए जा रहे तीन ट्रकों को रोका था। जांच के दौरान इन ट्रकों के पास जीएसटी के वैध कागजात नहीं पाए गए, जिसके बाद तीनों ट्रकों को जब्त कर लिया गया। जीएसटी के सहायक आयुक्त ने जब्ती सूची तैयार कर तीनों ट्रकों को मोतीपुर थाने की पुलिस को सौंप दिया था और निर्देश दिया गया था कि अगले आदेश तक ट्रकों को पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षित रखा जाए।
हालांकि, दो जनवरी की अहले सुबह जब पुलिस ने थाना परिसर में जांच की तो पाया गया कि जब्त किए गए तीन में से दो ट्रक गायब हैं। गायब ट्रकों की पहचान यूपी-53 ईटी 1421 और यूपी-53 डीटी 1358 के रूप में की गई है। ये दोनों ट्रक उत्तर प्रदेश नंबर के हैं। इस घटना के सामने आते ही पुलिस विभाग में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल मामले की जांच शुरू की गई।
दारोगा उमाशंकर सिंह ने एफआईआर में बताया है कि मोतीपुर थाना का अपना कोई पक्का सरकारी भवन नहीं है। थाना फिलहाल मोतीपुर चीनी मिल के पुराने भवन में संचालित हो रहा है। जब्त वाहनों को मिल के खुले मैदान में खड़ा किया जाता है, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। दारोगा के अनुसार, इसी का फायदा उठाकर ट्रकों के चालक और मालिकों ने आपसी मिलीभगत से रात करीब दो से तीन बजे के बीच अंधेरा और घने कोहरे का लाभ उठाते हुए दोनों ट्रकों को लेकर फरार हो गए।
इस मामले में यूपी के संतकबीर नगर जिले के खलीलाबाद थाना क्षेत्र के बरदहिया बाजार, वार्ड 11 निवासी अजय तिवारी और गोरखपुर के काकुपार निवासी विमल तिवारी को नामजद आरोपी बनाया गया है। दोनों पर ट्रक चोरी और सरकारी अभिरक्षा से वाहन निकालने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि चार दिनों से गायब ट्रकों की तलाश तेज कर दी गई है। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और ट्रक मालिकों व चालकों से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है।
गौरतलब है कि थाना परिसर से जब्त ट्रकों के गायब होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले के करजा, सदर और अहियापुर थानों की अभिरक्षा से ट्रक गायब होने के मामले सामने आ चुके हैं। करजा थाना क्षेत्र में खनन विभाग की टीम ने बालू लदे ट्रकों को जब्त किया था, लेकिन बाद में आरोप लगा कि थाना के दारोगा ने चालक और मालिक से मिलीभगत कर ट्रकों को छोड़ दिया। मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया तो लीपापोती के लिए ट्रकों के गायब होने का केस दर्ज किया गया। हालांकि, खनन विभाग के अधिकारियों ने जब मामले में संज्ञान लिया तो तत्कालीन दारोगा पर कार्रवाई की गई थी।
मोतीपुर थाना परिसर से दो ट्रकों के गायब होने की ताजा घटना ने एक बार फिर पुलिस अभिरक्षा में जब्त संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही, इसमें पुलिस कर्मियों की भूमिका को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।