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Lalu Prasad Yadav : लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबन पर सुनवाई अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की चुनौती

देवघर चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में CBI की याचिका पर अप्रैल से सुनवाई होगी। कोर्ट ने लंबित फाइलों पर नाराजगी जताई।

Lalu Prasad Yadav : लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबन पर सुनवाई अप्रैल में, सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की चुनौती

17-Feb-2026 12:16 PM

By First Bihar

Lalu Prasad Yadav : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव को देवघर जिला कोषागार (चारा घोटाला) मामले में मिली सजा के निलंबन को लेकर नया कानूनी मोड़ आ गया है। इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सजा के निलंबन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए अप्रैल महीने की तारीख तय करने का संकेत दिया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर बहुचर्चित चारा घोटाले को सुर्खियों में ला दिया है।


मंगलवार को इस मामले की सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान CBI की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि चारा घोटाले में दोषी ठहराए गए आरोपी सजा निलंबित होने के कारण बाहर हैं, जो कानूनी रूप से उचित नहीं है। एजेंसी ने दलील दी कि दोषसिद्धि के बाद सजा का निलंबन गंभीर कानूनी प्रश्न खड़ा करता है और इस पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।


CBI की दलीलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़ी कई फाइलें लंबे समय से लंबित पड़ी हुई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, उन्हें बंद कर दिया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि शेष मामलों पर विस्तृत सुनवाई अप्रैल में की जाएगी।


देवघर जिला कोषागार घोटाला बहुचर्चित चारा घोटाले का ही एक हिस्सा है। यह मामला वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर ट्रेजरी से करीब 89 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी से जुड़ा है। आरोपों के मुताबिक पशुपालन विभाग को दवाइयों और पशु चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए करीब 4.7 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। लेकिन जांच में सामने आया कि फर्जी बिल और रसीदों के जरिए सरकारी खजाने से बड़ी रकम निकाली गई।


इस मामले में आरोप है कि उस समय राज्य के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और घोटाले से संबंधित जांच फाइलों को अपने पास रोके रखा। जांच के दौरान मामला गंभीर होने पर CBI को इसकी जांच सौंपी गई थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2017 में CBI की विशेष अदालत ने लालू यादव को दोषी ठहराते हुए 3.5 वर्ष की सजा सुनाई थी।


देवघर कोषागार मामला लालू यादव के खिलाफ दर्ज कई मामलों में से एक है। इसके अलावा उन्हें चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी से जुड़े दो मामलों में भी सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं दुमका ट्रेजरी और डोरंडा कोषागार से जुड़े मामलों में भी अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था। इन सभी मामलों को मिलाकर चारा घोटाला बिहार के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में गिना जाता है।


राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। चारा घोटाले की वजह से बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला था। इस मामले में सजा मिलने के बाद लालू यादव को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और बाद में उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कमान परिवार के अन्य सदस्यों के हाथों में चली गई थी।


अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अप्रैल में होने वाली है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि अदालत CBI की याचिका पर गंभीर रुख अपनाती है, तो इससे लालू यादव और अन्य दोषियों की कानूनी स्थिति पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष की ओर से सजा निलंबन को न्यायसंगत बताते हुए राहत बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्णय का इंतजार किया जा रहा है, जो न केवल इस मामले बल्कि चारा घोटाले से जुड़े अन्य मामलों की दिशा भी तय कर सकता है।