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03-May-2025 09:54 AM
By First Bihar
Bihar Teachers: पटना हाईकोर्ट ने 2 मई 2025 को बिहार के मान्यता प्राप्त निजी डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो हजारों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश अशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने आदेश दिया कि 19 अप्रैल 2007 से पहले नियुक्त सभी योग्य शिक्षकों को वेतन, पेंशन, और अन्य सेवा लाभ दिए जाएं। कोर्ट ने बिहार सरकार की दो अपीलों को खारिज करते हुए तीन महीने के भीतर इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है।
इस दौरान कोर्ट ने बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 की धारा 57-A में 2015 में किए गए संशोधन के दायरे को स्पष्ट किया। सरकार ने तर्क दिया था कि यह संशोधन केवल ‘पर्फॉर्मेंस ग्रांट’ आधारित कॉलेजों पर लागू होता है, न कि ‘डिफिसिट ग्रांट’ वाले कॉलेजों पर। लेकिन कोर्ट ने इस भेदभाव को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि सभी योग्य शिक्षकों को, चाहे उनका कॉलेज किसी भी श्रेणी में हो, संशोधन का लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने इसे शिक्षा नीति की भावना के खिलाफ माना और शिक्षकों के साथ समान व्यवहार की वकालत की।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि अधिकांश शिक्षक कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी की सिफारिश पर नियमित रूप से नियुक्त हुए थे और वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। विश्वविद्यालय सेवा आयोग के विघटन के बाद कॉलेजों ने अपनी जरूरतों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की थी। कोर्ट ने माना कि ऐसे शिक्षकों को वर्षों तक सेवा में रखने के बाद वेतन और पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। यह फैसला उन शिक्षकों के लिए भी राहत लेकर आया है, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिटायर्ड शिक्षकों को भी यूजीसी वेतनमान के अनुसार पेंशन और अन्य देय लाभ मिलने चाहिए।