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18-Jan-2026 07:30 AM
By First Bihar
Bihar liquor mafia : बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू कराने की दिशा में राज्य सरकार ने शराब माफियाओं के खिलाफ बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अवैध शराब की आपूर्ति, परिवहन और बिक्री में लिप्त माफियाओं पर शिकंजा कसते हुए बिहार पुलिस और मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग ने पहले चरण में करीब दो दर्जन कुख्यात शराब माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इन माफियाओं पर राज्य के आठ जिलों में फैले विभिन्न पुलिस और उत्पाद थानों में कुल 167 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो उनके संगठित अपराध नेटवर्क की गंभीरता को दर्शाते हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, चिह्नित किए गए 24 शराब माफियाओं में से 13 फिलहाल जेल में बंद हैं, जबकि 11 के खिलाफ बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम की धारा तीन (CCA-3) के तहत जिला बदर या निषिद्ध किए जाने की कार्रवाई की जा चुकी है। यह कार्रवाई न सिर्फ इन माफियाओं की गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की जा रही है, बल्कि उनके अपराध नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने की रणनीति का भी हिस्सा है।
इस अभियान की सबसे अहम बात यह है कि अब सिर्फ गिरफ्तारी या जिला बदर तक ही सीमित न रहकर, अपराध से अर्जित संपत्तियों को भी जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस प्रावधान के तहत शराब तस्करी से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त किया जाएगा, ताकि माफियाओं की आर्थिक कमर तोड़ी जा सके।
जिलावार कार्रवाई की बात करें तो बेगूसराय जिले में सबसे अधिक पांच शराब माफियाओं को चिह्नित किया गया है। इसके बाद सारण जिले में चार, गोपालगंज और भागलपुर में तीन-तीन माफियाओं पर कार्रवाई हुई है। वहीं पटना, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण जिले में दो-दो तथा मुजफ्फरपुर, नवादा, दरभंगा, अररिया और पूर्णिया में एक-एक शराब माफिया की पहचान की गई है। यह तथ्य साफ तौर पर दर्शाता है कि शराब तस्करी का नेटवर्क बिहार के सीमावर्ती और आंतरिक जिलों में समान रूप से फैला हुआ है।
जांच में यह भी सामने आया है कि ये शराब माफिया अन्य राज्यों से ट्रकों के माध्यम से भारी मात्रा में शराब बिहार लाते हैं और फिर इसे विभिन्न जिलों में सप्लाई करते हैं। अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए शराब की खेप को छिपाकर लाना, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करना और स्थानीय स्तर पर एजेंटों के माध्यम से बिक्री करना इनके काम करने का तरीका रहा है।
चिह्नित माफियाओं में मुजफ्फरपुर जिले का राकेश महतो सबसे कुख्यात माना जा रहा है। उसके खिलाफ सबसे अधिक 20 मामले दर्ज हैं। ये मामले सकरा, बहेरा, कुढ़नी, ब्रह्मपुर, पातेपुर, बलिगांव, दगौरा, पूसा, मुसरीघरारी और विभिन्न उत्पाद थानों में दर्ज हैं। राकेश महतो लंबे समय से शराब तस्करी के धंधे में सक्रिय रहा है और उसका नेटवर्क कई जिलों तक फैला हुआ बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शराब माफिया और भू-माफिया की सूची तैयार कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उनके निर्देश के बाद ही पुलिस और उत्पाद विभाग ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया और माफियाओं की पहचान की। अब लगातार इन पर कार्रवाई हो रही है, जिससे शराब तस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों में हड़कंप मचा हुआ है।
राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शराबबंदी कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। जिला बदर की कार्रवाई के साथ-साथ संपत्ति जब्ती जैसे कठोर कदम यह संकेत देते हैं कि अब सिर्फ छोटे तस्करों ही नहीं, बल्कि बड़े माफियाओं की जड़ पर वार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होने की संभावना है, जिससे बिहार में अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।