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09-Jan-2026 09:57 AM
By First Bihar
PATNA : बिहार में मनमाने तरीके से चलाए जा रहे प्राइवेट स्कूलों पर अब सरकार की नजर पड़ी है. सरकार ने प्राइवेट स्कूल चलने के लिए नियम-कानून बनाएं हैं. बिहार के शिक्षा विभाग ने पहली से आठवीं कक्षा तक संचालित होने वाले निजी स्कूलों को मान्यता देने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है.
सरकार की ओर से जारी नए SOP में प्राइवेट स्कूलों के लिए शिक्षकों की संख्या, छात्र-शिक्षक अनुपात, स्कूल में जरूरी बुनियादी सुविधाएं और मान्यता की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से तय गया है. अगर कोई स्कूल सरकारी नियमों को पूरा नहीं करेगा तो उसे मान्यता नहीं दी जाएगी.
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अनुसार, यह पहल निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE Act) के प्रावधानों को सही तरीके से लागू करने के उद्देश्य से की गई है. नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी निजी विद्यालय को मान्यता देने से पहले जिला स्तर पर जांच की जाएगी.
मान्यता के लिए बनेगी तीन सदस्यीय समिति
शिक्षा विभाग के एसओपी के मुताबिक, हर निजी स्कूल की मान्यता के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति स्कूल में उपलब्ध शिक्षकों, बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संसाधनों की जांच करेगी. समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही स्कूल को मान्यता दी जाएगी.
हर क्लास के लिए शिक्षकों की संख्या तय
शिक्षा विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी एसओपी में क्लास एक से पांच तक के लिए छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की न्यूनतम संख्या तय की गई है। इसके अनुसार, अगर क्लास में 60 स्टूडेंट्स हैं तो उनके लिए कम से कम 2 शिक्षक होने चाहिए. 61 से 90 बच्चों पर 3 शिक्षक, 91 से 120 बच्चों पर 4 शिक्षक और 121 से 200 बच्चों पर 5 शिक्षक होना जरूरी होगा.
इसके अलावा, 150 बच्चों पर 5 शिक्षक के साथ एक हेडमास्टर या प्रिंसिपल की नियुक्ति भी अनिवार्य कर दी गई है. यदि किसी स्कूल में 200 से अधिक बच्चों का एडमिशन हुआ है तो प्रधानाध्यापक को छोड़कर छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक नहीं होना चाहिए. यानि हर 40 स्टूडेंट ओर 40 टीचर होने चाहिए.
छठी से आठवीं तक हर कक्षा में शिक्षक जरूरी
सरकार ने कक्षा 6 से 8 तक के लिए भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं. एसओपी के अनुसार, हर क्लास के लिए कम से कम एक शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य होगी। विज्ञान एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषयों के शिक्षक जरूरी होंगे. प्रत्येक 35 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए.
जिस स्कूल में कुल नामांकित बच्चों की संख्या 100 से अधिक है, वहां पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक की नियुक्ति भी अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा कला शिक्षा, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा के लिए शिक्षकों की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
स्कूल भवन और क्लासरूम कैसा होगा
एसओपी में प्राइवेट स्कूल के बुनियादी ढांचे को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं. हर टीचर के लिए कम से कम एक क्लासरूम उपलब्ध होना चाहिए। साथ ही प्रधानाध्यापक के लिए ऑफिस और स्कूल में भंडार कक्ष का होना अनिवार्य किया गया है.
बच्चे आसानी से पहुंच पाएं
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल तक बच्चों की पहुंच में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए. स्कूल के कैंपस में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय, सुरक्षित पेयजल की सुविधा, मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए रसोई, खेल का मैदान और चारदीवारी होना जरूरी होगा.
इतने दिन होगी पढ़ाई
नई एसओपी में शिक्षण सत्र और पढ़ाई के घंटों को भी निर्धारित किया गया है. इसके तहत पहली से पांचवीं क्लास के बच्चों को एक साल में कम से कम 200 दिन पढ़ाया जाना चाहिए. छठी से आठवीं क्लास के लिए 220 दिन की पढ़ाई तय की गई है. सरकार ने तय किया है कि पहली से पांचवीं के लिए हर साल 800 घंटे पढ़ाई होनी चाहिए. छठी से आठवीं के लिए प्रति वर्ष 1000 घंटे अनिवार्य होंगे.वहीं शिक्षकों के लिए प्रति सप्ताह अधिकतम 45 शिक्षण घंटे निर्धारित किए गए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि नई एसओपी से निजी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।