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15-Jan-2026 08:03 AM
By First Bihar
Bihar Energy Project : बिहार में ऊर्जा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। राज्य में परमाणु बिजली घर स्थापित करने को लेकर प्रारंभिक सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। बांका, नवादा और सीवान जिलों में संभावनाएं तलाशने के लिए पिछले वर्ष शुरू किया गया यह सर्वे अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। बिजली कंपनी ने सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन शुरू कर दिया है और केंद्र सरकार के सहयोग से अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा। यदि सभी तकनीकी और नीतिगत पहलू अनुकूल रहे, तो वित्तीय वर्ष 2027-28 से बिहार में परमाणु बिजली घर के निर्माण की शुरुआत हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, 24 जून 2025 को पटना में पूर्वी भारत के राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित हुआ था। इसी सम्मेलन में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने देश में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) के माध्यम से परमाणु बिजली घर स्थापित करने की योजना की घोषणा की थी। राज्य सरकार की मांग और सहमति के बाद बिहार को भी इस महत्वाकांक्षी योजना में शामिल किया गया। केंद्र सरकार के निर्देश पर ही बांका, नवादा और सीवान में परमाणु बिजली घर की संभावनाओं का आकलन करने के लिए सर्वे शुरू कराया गया।
इस सर्वे का कार्य न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और एनटीपीसी की संयुक्त टीम ने किया। टीम ने विभिन्न तकनीकी, भौगोलिक और पर्यावरणीय पहलुओं का गहन अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की, जिसे अब बिजली कंपनी को सौंप दिया गया है। सर्वे के दौरान पानी की उपलब्धता, पर्याप्त भूमि, भूकंपीय जोन, जनसंख्या घनत्व, सड़क और रेल कनेक्टिविटी जैसे अहम बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
परमाणु बिजली घर के लिए पानी की उपलब्धता सबसे अहम शर्तों में से एक मानी जाती है। सर्वे रिपोर्ट में इस पहलू पर विशेष फोकस किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, परमाणु संयंत्रों को ठंडा रखने और बिजली उत्पादन की प्रक्रिया के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। रिएक्टर से उत्पन्न गर्मी को बाहर निकालने और टरबाइन को चलाने के लिए भाप बनाने में पानी का व्यापक उपयोग होता है। बिजली उत्पादन क्षमता जितनी अधिक होगी, उतनी ही अधिक गर्मी उत्पन्न होगी और उसी अनुपात में पानी की आवश्यकता भी बढ़ेगी।
सर्वे में बताया गया है कि औसतन एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए प्रति घंटे 500 से 700 गैलन, यानी लगभग 1,892 से 2,649 लीटर पानी की जरूरत होती है। कुछ आकलनों के अनुसार यह आवश्यकता लगभग 1,800 लीटर प्रति मेगावाट प्रति घंटे के आसपास भी हो सकती है। इसी कारण पानी की उपलब्धता को परमाणु बिजली घर के लिए निर्णायक कारक माना जा रहा है।
सर्वे एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में नवादा और बांका जिलों को तकनीकी रूप से उपयुक्त लोकेशन बताया है। हालांकि, इन दोनों जिलों में जल संसाधनों की सीमित उपलब्धता को लेकर चिंता भी जताई गई है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि यदि यहां परमाणु बिजली घर स्थापित किया जाता है, तो जल प्रबंधन के लिए विशेष और दीर्घकालिक योजनाएं बनानी होंगी। इसके विपरीत, सीवान जिले में पानी की प्रचुर उपलब्धता बताई गई है, जो परमाणु संयंत्र के लिए एक सकारात्मक पहलू है।
लेकिन सीवान के मामले में एक बड़ी चुनौती सामने आई है। सर्वे के अनुसार, सीवान भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। परमाणु बिजली घर के लिए भूकंपीय सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि किसी भी प्रकार का जोखिम राष्ट्रीय सुरक्षा और जनहित से जुड़ा होता है। इसी वजह से केंद्र सरकार की सलाह और दिशा-निर्देशों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बिहार बिजली कंपनी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सीवान की भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल नवादा और बांका में परमाणु बिजली घर की स्थापना के लिए आवश्यक प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्र सरकार द्वारा डीपीआर, सुरक्षा मानकों और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।
यदि यह परियोजना साकार होती है, तो इससे बिहार को दीर्घकालिक और स्थिर बिजली आपूर्ति मिलेगी। साथ ही राज्य में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी। फिलहाल सभी की निगाहें डीपीआर और केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो बिहार के ऊर्जा भविष्य की दिशा तय करेगा।