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Bihar School News : 1 फरवरी से बिहार के सरकारी स्कूलों में बंद हो जाएगा यह काम, शिक्षा विभाग का आदेश जारी

बिहार के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में चल रहे मिड डे मील पायलट प्रोजेक्ट को 1 फरवरी 2026 से बंद करने का निर्देश जारी किया गया है।

Bihar School News : 1 फरवरी से बिहार के सरकारी स्कूलों में बंद हो जाएगा यह काम, शिक्षा विभाग का आदेश जारी

16-Jan-2026 02:11 PM

By First Bihar

Bihar School News : बिहार के सरकारी स्कूलों में चल रही मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) योजना से जुड़ा एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में मिड डे मील के संचालन को लेकर शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट अब 1 फरवरी 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने यह निर्णय पायलट प्रोजेक्ट के मूल्यांकन के बाद लिया है, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि इस प्रयोग से प्रधानाध्यापकों को मध्याह्न भोजन के कार्यों से अपेक्षित रूप से मुक्त नहीं किया जा सका।


मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र की ओर से गुरुवार को इस संबंध में सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मिड डे मील) को लिखित निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निर्देश में साफ कहा गया है कि पायलट प्रोजेक्ट का आगे विस्तार नहीं किया जाएगा और इससे जुड़े सभी विद्यालयों में अब पहले की व्यवस्था के अनुसार ही मिड डे मील का संचालन किया जाएगा। यानी अब एक बार फिर प्रधानाध्यापक और प्रारंभिक विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।


दरअसल, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसके तहत जिलों के चयनित एक-एक प्रखंड में यह व्यवस्था लागू की गई थी कि विद्यालय के प्रधानाध्यापक या प्रधान शिक्षक के स्थान पर किसी अन्य नामित शिक्षक के माध्यम से मिड डे मील का संचालन कराया जाए। इस प्रयोग के पीछे विभाग का मुख्य उद्देश्य यह था कि प्रधानाध्यापक को मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े प्रशासनिक और निगरानी कार्यों से मुक्त किया जा सके, ताकि वे अपना अधिकतम समय शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षण गुणवत्ता सुधार और विद्यालय के अकादमिक प्रबंधन में लगा सकें।


हालांकि, जब इस पायलट प्रोजेक्ट का मूल्यांकन प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के माध्यम से कराया गया, तो इसके नतीजे विभाग की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं पाए गए। मूल्यांकन रिपोर्ट में सामने आया कि पायलट प्रोजेक्ट लागू होने के बावजूद करीब 70 प्रतिशत प्रधानाध्यापक किसी न किसी रूप में मिड डे मील के संचालन से जुड़े हुए हैं। यानी कागजों पर भले ही जिम्मेदारी किसी अन्य नामित शिक्षक को सौंपी गई हो, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर प्रधानाध्यापकों की भूमिका समाप्त नहीं हो सकी।


रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सहायक शिक्षकों का विद्यालय प्रशासन पर नियंत्रण अपेक्षाकृत कमजोर होता है। ऐसे में प्रधानाध्यापक, औपचारिक रूप से मध्याह्न भोजन योजना से मुक्त होने के बावजूद, इस योजना से संबंधित निर्णयों और कार्यों में हस्तक्षेप करते रहे। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रधानाध्यापक न तो पूरी तरह से मिड डे मील की जिम्मेदारियों से अलग हो पाए और न ही उन्हें शैक्षणिक कार्यों के लिए अपेक्षित अतिरिक्त समय मिल सका।


इन्हीं तथ्यों को आधार बनाकर शिक्षा विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट को समाप्त करने का निर्णय लिया है। निदेशक विनायक मिश्र द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अब सभी संबंधित विद्यालयों में पूर्व की तरह ही प्रधानाध्यापक और विद्यालय शिक्षा समिति (वीईसी) के माध्यम से मध्याह्न भोजन योजना का संचालन किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे जिम्मेदारी की स्पष्टता बनी रहेगी और संचालन में व्यावहारिक स्तर पर होने वाली उलझनों को कम किया जा सकेगा।


इस फैसले के बाद अब जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि 1 फरवरी 2026 से सभी विद्यालयों में मिड डे मील की व्यवस्था सुचारु रूप से पुरानी प्रणाली के अनुसार लागू हो जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि कहीं भी पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ी व्यवस्था जारी न रहे।


शिक्षा विभाग के इस कदम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि प्रधानाध्यापकों को मिड डे मील जैसे प्रशासनिक कार्यों से मुक्त करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रधानाध्यापक और विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से ही योजना का संचालन अधिक व्यावहारिक और जवाबदेह साबित हो सकता है।


कुल मिलाकर, बिहार में मिड डे मील योजना से जुड़ा यह पायलट प्रोजेक्ट अब अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाने के कारण समाप्त किया जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पुरानी व्यवस्था के तहत मध्याह्न भोजन योजना को कैसे और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और बच्चों के हित में बनाया जाता है, ताकि शिक्षा के साथ-साथ पोषण का लक्ष्य भी सफलतापूर्वक पूरा हो सके।