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18-Jan-2026 09:52 AM
By First Bihar
Bihar Bhumi : बिहार में सरकारी जमीन पर फर्जी जमाबंदी के मामले लगातार बढ़ रहे थे। इन मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने अब कड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलों के एडीएम को निर्देश दिया है कि सरकारी जमीन पर अवैध जमाबंदी को 45 दिन के अंदर रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसके साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
इस आदेश के तहत एडीएम को यह अधिकार दिया गया है कि वे सरकारी जमीन की गलत, संदिग्ध या अवैध जमाबंदी को रद्द करने के लिए पहल करें। यह काम वे स्वयं (सुओ-मोटो) या राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट, या किसी अन्य आवेदक की सूचना मिलने पर जांच के बाद कर सकते हैं। यह निर्देश विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने जारी किए हैं।
सीओ पर भी होगी कार्रवाई
3 जून 1974 से अंचल अधिकारी अपने क्षेत्र की सरकारी जमीन के लिए कलेक्टर घोषित हैं। यदि उनके कार्यकाल में सरकारी जमीन का अवैध हस्तांतरण या जमाबंदी खुलने का मामला मिलता है, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अगर उनके कार्यकाल में सरकारी जमीन की निजी व्यक्तियों के नाम जमाबंदी खुलती है या दाखिल-खारिज होता है, तो भी उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
45 दिनों में क्या होगा?
फर्जी जमाबंदी की पहचान और उसे रद्द करने की प्रक्रिया अधिकतम 45 दिनों में पूरी की जाएगी। प्रक्रिया इस प्रकार होगी: जांच के बाद यदि अवैध जमाबंदी की पुष्टि होती है, तो एडीएम रजिस्ट्रेशन/कंट्रोल/मैपिंग सिस्टम (RCMS) पोर्टल के माध्यम से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। आवेदन के तीन दिन के अंदर चर्चा के लिए सूचना जारी होगी। सुनवाई 15 दिनों के अंदर शुरू होगी और अधिकतम तीन बार होगी।सुनवाई के बाद लिखित स्टेटमेंट 7 दिनों के अंदर दिया जाएगा। इसके बाद आदेश जारी कर RCMS पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया 45 दिन में समाप्त हो जाएगी।
सरकारी जमीनों के लिए विशेष एक्शन प्लान
सरकार ने फर्जी जमाबंदी वाले निम्न प्रकार की जमीनों के लिए एक्शन प्लान भी तैयार किया है: सरकारी विभाग, बोर्ड या निगम की जमीन, खास महाल की जमीन (सरकारी ओनरशिप वाली, जिसकी बंदोबस्ती नहीं हुई),धार्मिक न्यास बोर्ड या मान्यता प्राप्त ट्रस्ट की जमीन, गैर मजरुआ आम जमीन, नगर निगम, नगर पंचायत, जिला परिषद और ग्राम पंचायत की जमीन, फर्जी जमाबंदी वाले गौशाला और केंद्र सरकार की जमीन कैसर-ए-हिंद की जमीन (ब्रिटिश राज के समय ‘क्राउन’ की संपत्ति, स्वतंत्रता के बाद केंद्र/राज्य की संपत्ति) सरकार का यह कदम फर्जी जमाबंदी को रोकने और सरकारी जमीन की हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। अब इस आदेश के बाद जमीन की गलत जमाबंदी करने वालों के लिए राज्य में कोई जगह नहीं रहेगी।