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06-Feb-2026 01:07 PM
By First Bihar
Bihar Budget 2026-27 : बिहार सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 3.46 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक बजट का प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें महिलाओं के बहुमुखी विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इस बजट में महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए करीब 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि खर्च करने का अनुमान है।
विशेष रूप से, सरकार ने सात निश्चय-3 के अंतर्गत करीब 14 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है, जिनमें से लगभग 9 हजार करोड़ रुपये सीधे महिलाओं के कल्याण और उनके विकास पर खर्च होंगे। यह कदम राज्य सरकार की महिलाओं के सशक्तिकरण और समानता को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा है।
बिहार सरकार ने वार्षिक बजट पेश करने के साथ ही जेंडर बजट तैयार करने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया है। जेंडर बजट तैयार करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न विभागों की योजनाओं में महिलाओं पर खर्च होने वाली राशि स्पष्ट रूप से दर्शाई जाए और सामान्य खर्च में महिलाओं की हिस्सेदारी को भी समेकित रूप से प्रस्तुत किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, इस बार के जेंडर बजट में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में अधिक विभागों की रिपोर्टिंग की जाएगी। चालू वित्तीय वर्ष में 25 विभागों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जबकि आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 27 विभागों तक पहुंच जाएगी। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं में महिलाओं के लिए किए जाने वाले खर्च की पारदर्शिता बढ़ाना और महिलाओं के विकास की दिशा में प्रभावी निवेश सुनिश्चित करना है।
वित्त विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में महिला सशक्तिकरण और उनके आत्मनिर्भर बनने के लिए कुल 9052 करोड़ 32 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से सशक्त बनाने के कार्यक्रमों में किया जाएगा। इसमें महिला शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, कौशल विकास, स्वयं सहायता समूह (SHG) और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
जेंडर बजट का मुख्य उद्देश्य यह है कि महिलाओं को सिर्फ लाभार्थी के रूप में नहीं देखा जाए, बल्कि राज्य के विकास में उनकी हिस्सेदारी और योगदान को बढ़ावा दिया जाए। इसके तहत योजनाओं की निगरानी, उनकी कार्यान्वयन प्रक्रिया और खर्च की स्पष्टता सुनिश्चित की जाएगी।
जेंडर बजट में केवल महिलाओं के लिए आवंटित धनराशि ही शामिल नहीं है, बल्कि सामान्य बजट में महिलाओं की हिस्सेदारी को भी दिखाया जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सभी विभागों की योजनाओं में महिलाओं के लाभ के लिए कितनी राशि खर्च की जा रही है।
सरकार की योजना है कि चालू बजट सत्र के अंतिम सप्ताह में यह जेंडर बजट बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। इस कदम से न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
बिहार सरकार का यह प्रयास यह दिखाता है कि विकास योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी और उनकी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना अब राज्य की प्रमुख नीति बन गई है। आने वाले वर्षों में इस तरह की पहलें महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।