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20-Jan-2026 08:18 AM
By First Bihar
Bihar Budget 2026-27 : नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिहार की राजनीति और सरकार के सियासी इरादों की सबसे बड़ी परीक्षा खजाने के जरिए होने जा रही है। बिहार विधानसभा का बजट सत्र 2 फरवरी 2026 से शुरू होगा। सत्र के पहले दिन राज्यपाल का अभिभाषण होगा और इसके साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण सदन के पटल पर रखा जाएगा। इसके अगले ही दिन, यानी 3 फरवरी 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश किया जाएगा। इस बजट पर न सिर्फ सत्तापक्ष, बल्कि विपक्ष और आम जनता की भी निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसे आने वाले वर्षों की राजनीतिक दिशा और विकास की रूपरेखा से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकारी और वित्तीय हलकों में इस बात की चर्चा तेज है कि आगामी बजट का आकार 3.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 के 3.17 लाख करोड़ रुपये के बजट से करीब 11 फीसदी ज्यादा होगा। यानी एक ही झटके में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी। यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि सत्ता के एजेंडे, चुनावी वादों और भविष्य की रणनीति की झलक भी देती है। गौर करने वाली बात यह है कि 2024-25 की तुलना में 2025-26 में भी करीब 38 हजार करोड़ रुपये ज्यादा का बजट पेश किया गया था। इससे साफ संकेत मिलता है कि राज्य सरकार लगातार विस्तारवादी बजट की नीति पर आगे बढ़ रही है।
वित्त विभाग ने आगामी बजट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता में दो चरणों में बजट-पूर्व बैठकें आयोजित की गई हैं, जिनमें विभिन्न सामाजिक वर्गों, उद्योग जगत, व्यापार संगठनों, शिक्षाविदों और अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से सुझाव और राय ली गई। इन बैठकों का मकसद यह है कि बजट सिर्फ सरकारी दस्तावेज न बनकर समाज के अलग-अलग तबकों की जरूरतों और अपेक्षाओं को भी प्रतिबिंबित करे। सरकारी गलियारों की मानें तो 26 जनवरी तक बजट का ड्राफ्ट लगभग अंतिम रूप ले लेगा, ताकि 3 फरवरी को इसे बिना किसी अड़चन के बिहार विधानमंडल में पेश किया जा सके।
इस बार के बजट की आत्मा में सबसे बुलंद स्वर रोज़गार और “सात निश्चय-3” का रहने वाला है। राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार देने का जो बड़ा ऐलान किया है, उसे जमीन पर उतारने की कोशिश इस बजट में साफ दिखाई दे सकती है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए युवा रोजगार एवं कौशल विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और नागर विमानन विभाग जैसे नए विभागों का गठन किया गया है। माना जा रहा है कि इन विभागों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि रोजगार सृजन और कौशल विकास की योजनाओं को गति मिल सके।
वित्त विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बढ़ते रोजगार लक्ष्य को साधने के लिए गैर-योजना मद की राशि में इजाफा किया जा सकता है। इससे नई नियुक्तियों का रास्ता खुलेगा और विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज होगी। इसके साथ ही कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और स्टार्टअप को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर भी खास जोर रहने की उम्मीद है, ताकि युवाओं को सिर्फ सरकारी नौकरी ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र और स्वरोजगार के अवसर भी मिल सकें।
बजट में बुनियादी ढांचे के विकास को भी प्राथमिकता मिलने की संभावना है। सड़क, पुल, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा सकता है। खासकर ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर सरकार का फोकस रह सकता है। इसके अलावा कृषि, सिंचाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी नई घोषणाएं होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बजट सरकार के लिए बेहद अहम है। विपक्ष पहले से ही सरकार पर वादों और हकीकत के बीच अंतर को लेकर हमला बोलने की तैयारी में है। ऐसे में सरकार की कोशिश होगी कि बजट के जरिए वह विकास, रोजगार और सामाजिक कल्याण के मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से पेश करे। कुल मिलाकर, बिहार बजट 2026-27 सिर्फ आय-व्यय का हिसाब नहीं होगा, बल्कि यह आने वाले वर्षों की सियासत, नीतियों और जन अपेक्षाओं का आईना भी साबित होगा।