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15-Jan-2026 03:00 PM
By First Bihar
Bihar Bhavan : बिहार सरकार ने राज्य के लोगों, खासकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को राहत देने और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। मंगलवार, 13 जनवरी को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मुंबई में ‘बिहार भवन’ के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर प्रदेश सरकार कुल 314 करोड़ 20 लाख 59 हजार रुपये खर्च करेगी। यह बिहार भवन मुंबई के वडाला इलाके में बनाया जाएगा, जिसके लिए मुंबई पोर्ट अथॉरिटी से 2,752 वर्ग मीटर जमीन 60 साल की लीज पर ली गई है।
सरकार के अनुसार, मुंबई में बनने वाला बिहार भवन सिर्फ एक अतिथि गृह नहीं होगा, बल्कि यह बिहार के लोगों के लिए बहुआयामी सुविधाओं से लैस एक आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि इसमें बिहार के कैंसर रोगियों और उनके परिजनों के ठहरने की विशेष व्यवस्था की जाएगी। मुंबई जैसे महंगे शहर में इलाज कराने आने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी रहने और खाने के खर्च को लेकर होती है। कई बार इलाज से ज्यादा पैसा सिर्फ होटल और भोजन पर खर्च हो जाता है। ऐसे में बिहार भवन उनके लिए बड़ी राहत साबित होगा।
प्रस्तावित बिहार भवन एक आधुनिक बहुमंजिला इमारत होगी, जिसमें रहने, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां विश्वस्तरीय गेस्ट हाउस सुविधाओं के साथ-साथ सरकारी बैठकों के लिए आधुनिक हॉल, कार्यालय और कॉन्फ्रेंस सुविधाएं भी होंगी। इसका उद्देश्य सिर्फ लोगों को ठहरने की जगह देना नहीं, बल्कि मुंबई जैसे बड़े महानगर में बिहार सरकार की एक मजबूत और प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराना भी है।
दरअसल, मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी माना जाता है और यहां देश के बड़े उद्योगपति और कारोबारी रहते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने मौजूदा कार्यकाल में बिहार को ‘उद्योग हब’ के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। इसी रणनीति के तहत सरकार प्रदेश में प्लग एंड प्ले मॉडल पर उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। इस मॉडल के तहत निवेशकों को पहले से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर—जैसे जमीन, बिजली, पानी, सड़क, शेड, वेयरहाउस और जरूरी अनुमतियां—एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार का मानना है कि मुंबई में बिहार भवन बनने के बाद वहां रहने वाले उद्योगपतियों को बिहार बुलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिहार सरकार के अधिकारी और प्रतिनिधि मुंबई में ही उनसे मुलाकात कर निवेश से जुड़ी डील और योजनाओं को अंतिम रूप दे सकेंगे। इससे निवेश प्रक्रिया तेज होगी और बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
गौरतलब है कि बिहार से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे कई राज्यों के सरकारी भवन या गेस्ट हाउस मुंबई में पहले से मौजूद हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार के भी कई अतिथि गृह और हॉस्टल—जैसे हैदराबाद एस्टेट और प्रतिष्ठा भवन—मुंबई में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बिहार भवन का निर्माण राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
वहीं, मुंबई के अलावा दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में भी प्रदेश सरकार का ‘बिहार निवास’ नाम से गेस्ट हाउस मौजूद है। इसका निर्माण वर्ष 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में हुआ था। नीतीश सरकार ने अब इसे गिराकर नए सिरे से बनाने का फैसला लिया है, जिस पर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। राजद का आरोप है कि नीतीश सरकार जानबूझकर लालू प्रसाद यादव के नाम वाली शिलापट्टिका हटाने के उद्देश्य से 32 साल पुराने इस भवन को तोड़ रही है। कुल मिलाकर, मुंबई में बिहार भवन का निर्माण जहां एक ओर मरीजों और आम लोगों को राहत देगा, वहीं दूसरी ओर यह बिहार को निवेश और उद्योग के नक्शे पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।