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free electricity Bihar : बिहार में 125 यूनिट फ्री बिजली के बावजूद प्रीपेड मीटर से बैलेंस कटने पर उठे सवाल, अब सामने आ गई वजह

बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना लागू होने के बावजूद प्रीपेड मीटर से बैलेंस कटने की शिकायतें सामने आ रही हैं। NBPDCL ने स्पष्ट किया है कि इसका कारण पुराना बकाया या डिफरमेंट चार्ज हो सकता है, योजना जारी है।

15-Jan-2026 08:20 AM

By First Bihar

free electricity Bihar : बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना लागू होने के बावजूद प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के बैलेंस कटने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। खासकर उत्तर बिहार के जिलों से बड़ी संख्या में उपभोक्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि जब उनकी मासिक बिजली खपत 125 यूनिट से कम है, तो फिर प्रीपेड मीटर से पैसे क्यों कट रहे हैं। इसको लेकर लोगों में भ्रम और नाराजगी दोनों देखी जा रही है। अब उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की है।


दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले राज्य सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की घोषणा की थी। इस योजना के तहत अगस्त 2025 से उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का लाभ मिलना भी शुरू हो गया। सरकार का दावा है कि इससे राज्य के करोड़ों परिवारों को सीधा फायदा मिल रहा है और बिजली बिल का बोझ कम हुआ है। लेकिन जमीनी स्तर पर कई उपभोक्ता यह महसूस कर रहे हैं कि योजना का लाभ उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।


प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि ठंड के मौसम में, जब घरों में पंखे तक नहीं चल रहे और बिजली खपत बेहद कम है, तब भी मीटर का बैलेंस धीरे-धीरे घटता जा रहा है। कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने महीने भर में 60 से 80 यूनिट तक ही बिजली इस्तेमाल की, इसके बावजूद उनके प्रीपेड मीटर से राशि कट गई। इससे यह आशंका जताई जाने लगी कि कहीं 125 यूनिट फ्री बिजली योजना को चुपचाप बंद तो नहीं कर दिया गया है।


इन तमाम सवालों और अफवाहों के बीच NBPDCL ने साफ किया है कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना पूरी तरह जारी है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी के अनुसार, प्रीपेड मीटर से बैलेंस कटने का मतलब यह कतई नहीं है कि मुफ्त बिजली योजना खत्म हो गई है।


NBPDCL के अधिकारियों ने बताया कि बैलेंस कटौती के पीछे सबसे बड़ा कारण उपभोक्ताओं का पुराना बकाया बिल है। यदि किसी उपभोक्ता के नाम पर पूर्व अवधि का बिजली बिल बकाया है, तो वह राशि स्वतः प्रीपेड मीटर के बैलेंस से समायोजित कर ली जाती है। ऐसे में भले ही मौजूदा महीने में बिजली की खपत 125 यूनिट से कम हो, मीटर बैलेंस में कटौती दिखाई दे सकती है।



इसके अलावा कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ मामलों में डिफरमेंट चार्ज (Deferred Charges) की वजह से भी बैलेंस घटता है। यह चार्ज पूर्व महीनों के भुगतान या बिल समायोजन से संबंधित होता है। जब प्रीपेड मीटर में बैलेंस डाला जाता है, तो सिस्टम पहले पुराने बकाया या डिफरमेंट चार्ज को एडजस्ट करता है और उसके बाद वर्तमान खपत को गिनता है। यही कारण है कि कई उपभोक्ताओं को बिना ज्यादा बिजली इस्तेमाल किए भी बैलेंस कम होता हुआ नजर आता है।


बिजली कंपनी ने दो टूक कहा है कि जिन उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का पुराना बकाया नहीं है, उन्हें 125 यूनिट मुफ्त बिजली का पूरा लाभ मिल रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं के प्रीपेड मीटर से 125 यूनिट तक किसी तरह की राशि नहीं काटी जा रही है।


NBPDCL ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि यदि उन्हें बैलेंस कटौती को लेकर कोई संदेह है, तो वे अपनी बकाया स्थिति की जांच जरूर करें। इसके लिए उपभोक्ता NBPDCL की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लॉग इन कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी बिजली कार्यालय से संपर्क कर या कस्टमर केयर नंबर पर शिकायत दर्ज कराकर भी अपनी समस्या का समाधान कराया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि हर शिकायत का समाधान किया जाएगा।


हालांकि, जमीनी हकीकत इससे थोड़ी अलग नजर आती है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे स्थानीय बिजली कार्यालय में शिकायत लेकर जाते हैं, तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता। कई बार कर्मचारी सही जानकारी देने से बचते हैं या उपभोक्ताओं को एक-दूसरे के पास भेजते रहते हैं। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।


अब देखने वाली बात यह होगी कि बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का स्थानीय स्तर पर कितना सही तरीके से पालन होता है। यदि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर और पारदर्शी तरीके से समाधान नहीं किया गया, तो 125 यूनिट फ्री बिजली जैसी महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल उठते रहेंगे। सरकार और बिजली कंपनी दोनों के लिए यह जरूरी है कि उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे और उन्हें योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।


बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना लागू होने के बावजूद प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के बैलेंस कटने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। खासकर उत्तर बिहार के जिलों से बड़ी संख्या में उपभोक्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि जब उनकी मासिक बिजली खपत 125 यूनिट से कम है, तो फिर प्रीपेड मीटर से पैसे क्यों कट रहे हैं। इसको लेकर लोगों में भ्रम और नाराजगी दोनों देखी जा रही है। अब उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की है।


दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले राज्य सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की घोषणा की थी। इस योजना के तहत अगस्त 2025 से उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का लाभ मिलना भी शुरू हो गया। सरकार का दावा है कि इससे राज्य के करोड़ों परिवारों को सीधा फायदा मिल रहा है और बिजली बिल का बोझ कम हुआ है। लेकिन जमीनी स्तर पर कई उपभोक्ता यह महसूस कर रहे हैं कि योजना का लाभ उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।


प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि ठंड के मौसम में, जब घरों में पंखे तक नहीं चल रहे और बिजली खपत बेहद कम है, तब भी मीटर का बैलेंस धीरे-धीरे घटता जा रहा है। कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने महीने भर में 60 से 80 यूनिट तक ही बिजली इस्तेमाल की, इसके बावजूद उनके प्रीपेड मीटर से राशि कट गई। इससे यह आशंका जताई जाने लगी कि कहीं 125 यूनिट फ्री बिजली योजना को चुपचाप बंद तो नहीं कर दिया गया है।


इन तमाम सवालों और अफवाहों के बीच NBPDCL ने साफ किया है कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना पूरी तरह जारी है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी के अनुसार, प्रीपेड मीटर से बैलेंस कटने का मतलब यह कतई नहीं है कि मुफ्त बिजली योजना खत्म हो गई है।


NBPDCL के अधिकारियों ने बताया कि बैलेंस कटौती के पीछे सबसे बड़ा कारण उपभोक्ताओं का पुराना बकाया बिल है। यदि किसी उपभोक्ता के नाम पर पूर्व अवधि का बिजली बिल बकाया है, तो वह राशि स्वतः प्रीपेड मीटर के बैलेंस से समायोजित कर ली जाती है। ऐसे में भले ही मौजूदा महीने में बिजली की खपत 125 यूनिट से कम हो, मीटर बैलेंस में कटौती दिखाई दे सकती है।


इसके अलावा कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ मामलों में डिफरमेंट चार्ज (Deferred Charges) की वजह से भी बैलेंस घटता है। यह चार्ज पूर्व महीनों के भुगतान या बिल समायोजन से संबंधित होता है। जब प्रीपेड मीटर में बैलेंस डाला जाता है, तो सिस्टम पहले पुराने बकाया या डिफरमेंट चार्ज को एडजस्ट करता है और उसके बाद वर्तमान खपत को गिनता है। यही कारण है कि कई उपभोक्ताओं को बिना ज्यादा बिजली इस्तेमाल किए भी बैलेंस कम होता हुआ नजर आता है।


बिजली कंपनी ने दो टूक कहा है कि जिन उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का पुराना बकाया नहीं है, उन्हें 125 यूनिट मुफ्त बिजली का पूरा लाभ मिल रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं के प्रीपेड मीटर से 125 यूनिट तक किसी तरह की राशि नहीं काटी जा रही है।


NBPDCL ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि यदि उन्हें बैलेंस कटौती को लेकर कोई संदेह है, तो वे अपनी बकाया स्थिति की जांच जरूर करें। इसके लिए उपभोक्ता NBPDCL की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लॉग इन कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी बिजली कार्यालय से संपर्क कर या कस्टमर केयर नंबर पर शिकायत दर्ज कराकर भी अपनी समस्या का समाधान कराया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि हर शिकायत का समाधान किया जाएगा।


हालांकि, जमीनी हकीकत इससे थोड़ी अलग नजर आती है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे स्थानीय बिजली कार्यालय में शिकायत लेकर जाते हैं, तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता। कई बार कर्मचारी सही जानकारी देने से बचते हैं या उपभोक्ताओं को एक-दूसरे के पास भेजते रहते हैं। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।


अब देखने वाली बात यह होगी कि बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का स्थानीय स्तर पर कितना सही तरीके से पालन होता है। यदि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समय पर और पारदर्शी तरीके से समाधान नहीं किया गया, तो 125 यूनिट फ्री बिजली जैसी महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल उठते रहेंगे। सरकार और बिजली कंपनी दोनों के लिए यह जरूरी है कि उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे और उन्हें योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।