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पटना हाईकोर्ट में कोरोना से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग अब चीफ जस्टिस की खण्डपीठ करेगी, अब तक सुनवाई कर रही खण्डपीठ को किया गया अलग

05-May-2021 08:44 PM

PATNA : बिहार में कोरोना संक्रमण से जुड़े मामलों की मॉनिटरिंग पटना हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस की खंडपीठ करेगी. अब तक इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ को कोरोना से जुड़े जनहित याचिकाओं पर सुनवाई से अलग कर दिया गया है. 


बिहार में कोरोना मामले पर सुनवाई करने वाली पटना हाई कोर्ट की खण्डपीठ बदल दी गयी है. पिछले महीने 15 अप्रैल से अब तक इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस मोहित कुमार शाह की खण्डपीठ अब आगे सुनवाई नहीं करेगी. बुधवार को जारी नोटिस के मुताबिक इन मामलों की सुनवाई अब मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एस.  कुमार की खण्डपीठ करेगी. 




गौरतलब हो कि बिहार में बेकाबू कोरोना संक्रमण और उससे निपटने के लिए सरकारी इंतजाम की मॉनिटरिंग अब तक जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस मोहित कुमार शाह की खण्डपीठ कर रही थी. शिवानी कौशिक व अन्य जनहित याचिकाओं की सुनवाई गुरुवार को अब मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली  खण्डपीठ करेगी.


आपको बता दें कि सोमवार को बिहार में कोरोना संक्रमण के चलते बिगड़ते हालात पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा एतराज जताया था और राज्य सरकार से पूछा कि लॉकडाउन लगाने की क्या तैयारी है. न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से सरकार के सिस्टम को फ्लॉप बताया था और महाधिवक्ता से कहा था कि कोरोना की रोकथाम के लिए सरकार के पास कोई इंतजाम नहीं है. 


कोर्ट की इस कड़ी टिप्पणी के बाद अगले ही दिन मंगलवार को नीतीश सरकार ने बिहार में 15 मई तक कम्पलीट लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया. इन सब के बीच पटना हाईकोर्ट ने एक बार फिर से मंगलवार को ही राज्य सरकार को फटकार लगाई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि बार-बार कोर्ट के आदेश के बावजूद भी बिहार में स्थिति में सुधार नहीं है.


मंगलवार को सुनवाई के दौरान पटना उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए मौखिक रूप से कहा कि 15 अप्रैल से आदेश पर आदेश दिया जा रहा है. लेकिन इसके बावजूद भी 15 से 30 अप्रैल तक लोगों का मरना बदस्तूर जारी रहा. कोर्ट ने कहा कि सरकार ने क्या किया. बिहार में स्थिति में सुधार नहीं होना शर्म की बात है. कोर्ट ने कहा कि क्यों नहीं पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की मदद लें. इतनी बात कहने के बाद कोर्ट ने 6 मई को सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी.

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