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06-Jul-2025 08:10 AM
By First Bihar
Patna Crime News: पटना जिले में अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है और हाल के पांच महीनों में जिले में हुई 116 हत्याओं से कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो गई है। इसी दौरान लूटपाट, डकैती, चेन छिनतई, रंगदारी और रेप की घटनाओं ने आम जनता में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। पटना जिले में कुल 7 आईपीएस अधिकारी और 22 एएसपी-डीएसपी कानून व्यवस्था संभाल रहे हैं, जबकि डीएसपी की संख्या को 11 से बढ़ाकर 22 कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद अपराध का ग्राफ कम नहीं हो पाया है।
बता दें कि जिले में एसएसपी के अलावा चार एसपी तैनात हैं-एसपी पूर्वी, एसपी पश्चिमी, एसपी मध्य और ग्रामीण एसपी हैं, लेकिन जिले में क्राइम रेट आए दिन बढ़ते जा रहे हैं। अगर बीते पांच माह के आंकड़ों को देखें तो एसपी पूर्वी के इलाके में सबसे अधिक 45 हत्या, 19 लूट, 119 गृहभेदन, 14 रेप और 1143 वाहनों की चोरी की घटनाएं हुई हैं। पश्चिमी एसपी के इलाके में डकैती और रंगदारी की 5-5 घटनाएं सामने आई हैं। वहीं रेप की 14 घटनाएं हुई हैं। एसपी मध्य के इलाके में सबसे अधिक चेन छिनतई की 18 घटनाएं हुई हैं। 637 वाहनों की चोरी और हत्या की 12 घटनाएं हुई हैं। पश्चिमी पटना में हत्या की 33 और ग्रामीण पटना में 26 घटनाएं हुई हैं।
दरअसल, गोपाल खेमका की हत्या पटना में हुई बड़ी और सनसनीखेज वारदातों में से एक है, जो पूर्व में हुई इंडिगो स्टेशन मैनेजर रूपेश सिंह की हत्या के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में आई है। रूपेश सिंह की हत्या 12 जनवरी 2021 को उनके आवास की पार्किंग में हुई थी, जिससे पुलिस और प्रशासन में भारी हलचल मची थी। गोपाल खेमका की हत्या भी उनके आवास के गेट पर हुई, जहां वे बांकीपुर क्लब से घर लौट रहे थे।
जांच में सामने आया है कि अपराधी बांकीपुर क्लब से ही उनकी रेकी कर रहे थे, लेकिन उस क्षेत्र में पुलिस गश्त का अभाव था। भास्कर की टीम ने दोनों क्लबों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की, जिसमें पाया गया कि बांकीपुर क्लब और पटना क्लब के आसपास पुलिस गश्त गाड़ियां नहीं थीं। करगिल चौक से अशोक राजपथ तक पुलिस गश्ती का भी अभाव दिखा।
पटना पुलिस द्वारा कई तरह की गश्त और क्विक मोबाइल टीमों के गठन का दावा किया जाता है, जिसमें रात्रि और दिन की गश्त, डॉल्फिन मोबाइल सहित सात तरह की गश्तें शामिल हैं। हर थाने को चार-चार बाइक दी गई हैं और उन पर दारोगा-सिपाही की ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन फिर भी गोपाल खेमका की हत्या के समय अपराधियों को पकड़ने में पुलिस असमर्थ रही।
बांकीपुर क्लब और पटना क्लब के पास सुरक्षा की कमी के कारण अपराधी बेधड़क घूम रहे हैं और पुलिस किसी तरह की पूछताछ भी नहीं कर रही। पटना की इस स्थिति ने शहर के बड़े व्यवसायियों में पुलिस प्रशासन को लेकर असंतोष और भय की स्थिति पैदा कर दी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कानून व्यवस्था को सख्त बनाने और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जरूरत है ताकि जनता का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर बना रहे।