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Bihar Crime News : खाकी शर्मसार ! रेल पुलिस पर महिला का शव नदी में फेंकने का आरोप; पढ़िए क्या है पूरी खबर

बेतिया के नरकटियागंज से खाकी वर्दी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। रेल पुलिस पर आरोप है कि उसने एक लावारिस वृद्ध महिला के शव को कानूनी प्रक्रिया के बजाय नदी में फेंकवाने की कोशिश की।

 Bihar Crime News : खाकी शर्मसार ! रेल पुलिस पर महिला का शव नदी में फेंकने का आरोप; पढ़िए क्या है पूरी खबर

19-Jan-2026 11:23 AM

By First Bihar

Bihar Crime News : बेतिया जिले के नरकटियागंज से सामने आई यह घटना न केवल शर्मनाक है, बल्कि कानून व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। खाकी वर्दी, जिसे सुरक्षा और न्याय का प्रतीक माना जाता है, उसी वर्दी पर इस मामले ने गहरा दाग लगा दिया है। आरोप है कि नरकटियागंज रेल पुलिस ने एक लावारिस वृद्ध महिला के शव के साथ कानूनन प्रक्रिया का पालन करने के बजाय अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किया और शव को नदी में फेंकवाने की कोशिश की।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, नरकटियागंज रेल परिसर में एक वृद्ध महिला, जो भिखारी बताई जा रही है, की मौत हो गई थी। महिला रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के इलाके में लंबे समय से भिक्षावृत्ति करती थी। उसकी मौत के बाद नियमानुसार रेल पुलिस को शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहिए था, ताकि मौत के कारणों की जांच हो सके और मृतक की पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। लेकिन आरोप है कि रेल पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए शव को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाने की साजिश रची।


बताया जा रहा है कि रेल पुलिस कर्मियों ने एक रिक्शा चालक को पैसे का लालच देकर शव को पास की हड़बोड़ा नदी में फेंकने का निर्देश दिया। यह पूरी कोशिश चोरी-छिपे की जा रही थी, ताकि मामला दबा दिया जाए और किसी तरह की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल कानून का घोर उल्लंघन है, बल्कि एक मृत महिला के सम्मान के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।


मामला तब उजागर हुआ जब रिक्शा चालक सूरदास और उसका साथी रामचंद्र शव को रिक्शे पर लादकर नदी की ओर ले जा रहे थे। रास्ते में स्थानीय युवाओं की नजर उन पर पड़ गई। संदिग्ध हालात देखकर युवाओं ने दोनों को रोक लिया और पूछताछ शुरू की। जब रिक्शे पर रखे शव की जानकारी सामने आई, तो युवाओं में आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते मौके पर हंगामा शुरू हो गया और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्काल शिकारपुर थाना पुलिस को सूचना दी।


पकड़े जाने के बाद रिक्शा चालक सूरदास ने जो बयान दिया, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। चालक ने बताया कि नरकटियागंज रेल थाने में तैनात प्रेम कुमार नामक कर्मी ने उसे पैसे देकर शव को नदी में बहाने को कहा था। चालक के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने यह कहकर उसे भरोसा दिलाया कि मृत महिला एक भिखारी थी, जिसका नाम तेतरी देवी बताया गया और वह मोतिहारी की रहने वाली है। यह भी कहा गया कि महिला का कोई वारिस नहीं है, इसलिए शव को नदी में फेंक देने से कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि, मृत महिला की पहचान को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, जिससे पूरे मामले में संदेह और गहराता जा रहा है।


घटना के सामने आने और हंगामे के बाद रेल पुलिस हरकत में आई। आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेतिया जीएमसीएच (GMCH) भेज दिया गया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब मामला पूरी तरह से उजागर हो चुका था और स्थानीय लोग पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे थे।


इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और मीडिया में खबरें आने के बाद मुजफ्फरपुर रेल एसपी वीणा कुमारी ने पूरे मामले का संज्ञान लिया है। रेल एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, गैरकानूनी या अमानवीय कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में रेल पुलिस के किसी भी कर्मी की भूमिका संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।


यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है। क्या वाकई पुलिस कानून से ऊपर समझने लगी है? क्या एक लावारिस और गरीब महिला होने की वजह से उसके शव के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि युवाओं की सतर्कता न होती, तो यह मामला कभी सामने ही नहीं आता और एक महिला का शव चुपचाप नदी में बहा दिया जाता।


फिलहाल पूरे इलाके में इस घटना को लेकर आक्रोश है। लोग निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और क्या खाकी वर्दी की साख पर लगे इस दाग को मिटाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।