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05-Mar-2026 08:46 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार की सियासत एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि वे गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन भर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बिहार की राजनीति में सत्ता का बड़ा हस्तांतरण देखने को मिल सकता है। करीब दो दशकों से राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की स्थिति में राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
दरअसल, मौजूदा समय में बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है, जिसमें मुख्यमंत्री पद जेडीयू के पास है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कोटे से दो उपमुख्यमंत्री सरकार में शामिल हैं। लेकिन अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं और मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बन सकता है। ऐसी स्थिति में जेडीयू और बीजेपी की भूमिका भी बदल जाएगी। अब तक जेडीयू के नेतृत्व में चल रही सरकार में बीजेपी सहयोगी दल की भूमिका में है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी बीजेपी के पास जा सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, अगर बीजेपी का मुख्यमंत्री बनता है तो जेडीयू को सरकार में संतुलन बनाए रखने के लिए उपमुख्यमंत्री पद दिया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि नई सरकार में जेडीयू कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, ताकि दोनों दलों के बीच राजनीतिक संतुलन कायम रखा जा सके।
बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों की चर्चा हो रही है। इनमें मंत्री दिलीप जायसवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ही नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
वहीं दूसरी ओर, नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलों के बीच जेडीयू के भीतर भी हलचल बढ़ गई है। पार्टी के कुछ नेताओं और समर्थकों के बीच यह मांग उठने लगी है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जाए। माना जा रहा है कि अगर निशांत कुमार की औपचारिक राजनीतिक एंट्री होती है तो उन्हें सीधे बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो उन्हें नीतीश कुमार के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाएगा। हालांकि अभी तक जेडीयू की ओर से इस तरह की किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसके अलावा यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर जेडीयू को दो उपमुख्यमंत्री पद मिलते हैं तो निशांत कुमार के साथ पार्टी का दूसरा नेता कौन होगा, जिसे यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम भी इसको लेकर चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच बातचीत के बाद ही होगा।
कुल मिलाकर, अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने के साथ ही सरकार की संरचना और गठबंधन के भीतर ताकत का समीकरण भी नया रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।