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12-Mar-2026 09:16 AM
By First Bihar
NEET student case : पटना में चर्चित नीट छात्रा रेप और मौत मामले में बेउर जेल में बंद शंभू गर्ल्स हॉस्टल की बिल्डिंग के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई होगी। बुधवार को पॉक्सो की विशेष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले की जांच कर रही CBI और पटना पुलिस की SIT से कई अहम सवाल पूछे और उनके जवाबों से असंतुष्ट होकर नाराजगी भी जाहिर की। अब गुरुवार को होने वाली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि मनीष रंजन को फिलहाल जेल में ही रहना होगा या उन्हें जमानत मिल सकती है।
बुधवार को करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सबसे पहले CBI और फिर SIT से पूछा कि क्या इस मामले की जांच के लिए मनीष रंजन की अभी जरूरत है। इस पर दोनों एजेंसियों के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि फिलहाल जांच में उनकी कोई जरूरत नहीं है। इस जवाब पर अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान CBI चार बंडलों में अपनी जांच रिपोर्ट और केस से जुड़े दस्तावेज लेकर अदालत पहुंची थी। कोर्ट ने CBI को फटकार लगाते हुए पूछा कि पिछले 20 दिनों से एजेंसी मूकदर्शक बनी हुई है। अदालत ने कहा कि जब यह मामला CBI को सौंपा गया था, तब क्या एजेंसी को यह जानकारी नहीं थी कि मनीष रंजन पहले से न्यायिक हिरासत में हैं।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह क्यों नहीं माना जाए कि CBI की लापरवाही के कारण मनीष रंजन 14 फरवरी से 11 मार्च तक गैरकानूनी तरीके से जेल में रहे। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि अगर ऐसा है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और मनीष रंजन को इसका मुआवजा कौन देगा।
जांच के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि क्या CBI को यह जानकारी थी कि मनीष रंजन जेल में बंद हैं। अदालत ने कहा कि अगर एजेंसी को इसकी जानकारी थी, तो फिर इतने दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने इस पूरे मामले में CBI की भूमिका पर सवाल खड़े किए।
इस दौरान विशेष अदालत ने CBI के अधिकारियों के अलावा मामले की पहली जांच अधिकारी रोशनी कुमारी, SIT की एएसपी अनु कुमारी, मामले के सूचक के वकील और पॉक्सो के विशेष लोक अभियोजक से भी बारी-बारी से पूछताछ की। अदालत ने यह जानने की कोशिश की कि घटना के समय मनीष रंजन कहां थे और उनके खिलाफ क्या ठोस साक्ष्य हैं।
सुनवाई के दौरान रोशनी कुमारी और एएसपी अनु कुमारी के बयानों में अंतर सामने आने पर अदालत ने खुद मनीष रंजन से भी पूछताछ की। इस पर मनीष रंजन ने अदालत को बताया कि घटना के दिन वह अपने घर पर थे। उन्होंने कहा कि 5 जनवरी की सुबह वह अपनी बेटी को लेकर पावापुरी मेडिकल कॉलेज गए थे और उसी दिन रात करीब 8 बजे वापस लौट आए थे।
उन्होंने आगे बताया कि 6 जनवरी की सुबह करीब 10 बजे वह ऑफिस गए थे और रात करीब 8 बजे घर लौटे थे। मनीष रंजन के अनुसार, 7 जनवरी की सुबह जब वह ऑफिस जाने के लिए निकल रहे थे, तभी हॉस्टल की संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें छात्रा के साथ हुई घटना की जानकारी दी थी।
वहीं SIT की एएसपी अनु कुमारी ने अदालत को बताया कि 6 जनवरी को छात्रा के कमरे से कुछ दवाइयां मिली थीं। हालांकि उस समय उन्हें वापस उसी कमरे में रख दिया गया था और अगले दिन 7 जनवरी को उन दवाइयों को जब्त किया गया।
गौरतलब है कि नीट छात्रा की संदिग्ध मौत को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक मौत के असली कारण का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। इसी को लेकर अदालत ने भी जांच एजेंसियों की धीमी प्रगति पर सवाल उठाए हैं। अब गुरुवार को होने वाली सुनवाई में अदालत मनीष रंजन की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुना सकती है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।